- Home
- /
- राज्य
- /
- मध्य प्रदेश
- /
- MP : बांधवगढ़ टाइगर...
MP : बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व में बाघ की मौत कार्डियो-रेस्पिरेटरी फेलियर से

Madhya Pradesh मध्य प्रदेश : मध्य प्रदेश के बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व में एक बाघ की मौत को लेकर किए गए दूसरे पोस्ट-मॉर्टम में महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। अधिकारियों के अनुसार, बाघ की मौत कार्डियो-रेस्पिरेटरी फेलियर के कारण हुई थी, जिसकी पुष्टि दूसरी ऑटोप्सी रिपोर्ट में की गई है।
रिपोर्ट में यह भी पाया गया कि बाघ के शरीर पर जहां ट्रैंक्विलाइज़र डार्ट लगा था, उस स्थान पर खून का प्रवाह नहीं था। इस तथ्य से यह संकेत मिलता है कि रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान वन विभाग की टीम द्वारा डार्ट चलाए जाने से काफी पहले ही बाघ की मौत हो चुकी थी।
यह दूसरी ऑटोप्सी जबलपुर स्थित स्टेट वाइल्डलाइफ फॉरेंसिक हेल्थ (SWFH) में की गई, जिसमें पशु चिकित्सकों की एक टीम के साथ दो वाइल्डलाइफ विशेषज्ञ भी शामिल थे। इस टीम ने पूरे मामले की गहन जांच करते हुए पोस्ट-मॉर्टम निष्कर्ष तैयार किए।
प्रारंभिक जांच के बाद उठे सवालों को देखते हुए दूसरी ऑटोप्सी कराई गई थी, ताकि मौत के कारणों को स्पष्ट किया जा सके और किसी भी तरह की शंका को दूर किया जा सके। रिपोर्ट के अनुसार, बाघ की मौत प्राकृतिक कारणों या किसी गंभीर शारीरिक समस्या के चलते हुई प्रतीत होती है।
वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह मामला अत्यंत संवेदनशील है और पूरी प्रक्रिया की समीक्षा की जा रही है। रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान अपनाई गई कार्यवाही और समय-सीमा की भी जांच की जा रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार, कार्डियो-रेस्पिरेटरी फेलियर जैसी स्थिति में जानवर का हृदय और श्वसन तंत्र अचानक काम करना बंद कर देता है, जिससे मृत्यु हो सकती है। रिपोर्ट में मिले संकेत इसी दिशा में इशारा करते हैं कि बाघ की हालत पहले से ही गंभीर थी।
इस घटना के बाद वन्यजीव संरक्षण से जुड़े संगठनों ने भी मामले पर नजर रखी हुई है। उनका कहना है कि ऐसी घटनाओं में पारदर्शी जांच बेहद जरूरी होती है ताकि भविष्य में रेस्क्यू ऑपरेशन और अधिक प्रभावी बनाए जा सकें।
कुल मिलाकर, बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व में हुई इस बाघ की मौत को लेकर दूसरी ऑटोप्सी रिपोर्ट ने महत्वपूर्ण तथ्य सामने रखे हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि जानवर की मौत डार्ट लगाने से पहले ही हो चुकी थी और यह मामला अब आगे की जांच के दायरे में है।





