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Sehore में उपेक्षा की मार, 100 से अधिक कुएं कूड़े के ढेर में तब्दील

Madhya Pradesh मध्य प्रदेश : मध्य प्रदेश के सीहोर शहर में जल स्रोतों की स्थिति चिंताजनक होती जा रही है। शहर में 100 से अधिक कुएं, जिनमें कई ऐतिहासिक और पुराने कुएं भी शामिल हैं, सफाई और रखरखाव के अभाव में अब कूड़े के ढेर में बदल चुके हैं। यह स्थिति स्थानीय प्रशासन की लापरवाही और नियमित सफाई व्यवस्था की कमी को उजागर करती है।
मंडी इलाके में स्थित लगभग 15 कुएं पूरी तरह खंडहर में तब्दील हो चुके हैं। इनमें से कई कुएं अब उपयोग योग्य नहीं बचे हैं और लंबे समय से उपेक्षित पड़े हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, इन कुओं की देखभाल न होने के कारण इनमें कचरा भरता जा रहा है और आसपास का वातावरण भी प्रभावित हो रहा है।
फ्रीजगंज क्षेत्र में गणेश मंदिर के बाहर मौजूद तीन कुएं भी गंभीर स्थिति में हैं। ये कुएं भी कचरे से भरे हुए हैं और उनकी स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। धार्मिक और सार्वजनिक स्थानों के पास स्थित होने के बावजूद इन जल स्रोतों की अनदेखी चिंता का विषय बनी हुई है।
इसी तरह गल्ला मंडी क्षेत्र में स्थित एक बाबड़ी (बावड़ी), वर्कशॉप रोड पर जिनवाला कुआं और वर्कशॉप कॉलोनी के पीछे स्थित एक अन्य कुआं भी कूड़े से अटे पड़े हैं। इन सभी स्थानों पर साफ-सफाई की कोई नियमित व्यवस्था दिखाई नहीं देती, जिसके चलते स्थिति और खराब हो रही है।
स्थानीय बुजुर्गों का कहना है कि पहले के समय में जब पार्वती नदी से पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं हो पाता था, तब लोगों ने पानी की जरूरत पूरी करने के लिए कई कुएं खुदवाए थे। ये कुएं उस समय जीवनरेखा का काम करते थे, लेकिन समय के साथ इनका रखरखाव बंद हो गया।
अब ये ऐतिहासिक जल स्रोत अपनी पहचान खोते जा रहे हैं और कचरे के कारण पर्यावरण और स्वास्थ्य दोनों पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है। स्थानीय लोग प्रशासन से इन कुओं की सफाई और संरक्षण की मांग कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समय रहते इन जल स्रोतों का संरक्षण नहीं किया गया, तो शहर अपनी ऐतिहासिक जल संरचनाओं को हमेशा के लिए खो सकता है। साथ ही यह भूजल स्तर और पर्यावरण संतुलन पर भी नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।
कुल मिलाकर, सीहोर में कुओं की यह स्थिति न केवल प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाती है, बल्कि यह भी संकेत देती है कि पारंपरिक जल संसाधनों के संरक्षण के लिए तुरंत ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।





