मध्य प्रदेश

MP : नए मेडिकल कॉलेजों में सुविधाओं की कमी पर छात्रों की चिंता

Kavita2
23 Jun 2026 10:47 AM IST
MP : नए मेडिकल कॉलेजों में सुविधाओं की कमी पर छात्रों की चिंता
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Madhya Pradesh मध्य प्रदेश : नए सरकारी मेडिकल कॉलेजों में बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर मेडिकल छात्रों ने गंभीर चिंता जताई है। श्योपुर, सिंगरौली, दतिया, नीमच, मंदसौर सहित कई जिलों के मेडिकल कॉलेजों में बुनियादी ढांचे और सुविधाओं से जुड़ी समस्याएं सामने आ रही हैं।

इस मुद्दे को लेकर जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (JUDA) के अंडरग्रेजुएट (UG) विंग ने औपचारिक रूप से आवाज उठाई है और डायरेक्टरेट ऑफ मेडिकल एजुकेशन (DME) को एक ज्ञापन सौंपा है। इस ज्ञापन में कॉलेजों में मौजूद कमियों को दूर करने की मांग की गई है।

छात्रों का कहना है कि कई नए मेडिकल कॉलेजों में हॉस्टल सुविधाएं पर्याप्त नहीं हैं और सुरक्षा व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं है। इसके कारण छात्रों को रोजमर्रा की जिंदगी में कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

इसके अलावा, मेडिकल संस्थानों में सैनिटरी मटीरियल के निपटान के लिए लगाए गए इनसिनरेटर (कचरा जलाने वाली मशीन) के ठीक से काम न करने पर भी चिंता जताई गई है। छात्रों के अनुसार, यह स्थिति स्वच्छता और स्वास्थ्य मानकों पर भी सवाल खड़े करती है।

इस पूरे मामले में मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन (MTA) और फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (FAIMA) जैसे डॉक्टर संगठनों ने भी JUDA-UG विंग का समर्थन किया है। इन संगठनों ने कहा है कि मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए बुनियादी सुविधाओं का होना बेहद जरूरी है।

डॉक्टर संगठनों का मानना है कि नए मेडिकल कॉलेजों में तेजी से बढ़ती सीटों और छात्रों की संख्या के अनुसार इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास नहीं हुआ है, जिसके कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है।

छात्रों ने DME से मांग की है कि सभी संबंधित कॉलेजों में तत्काल निरीक्षण कराया जाए और जिन जगहों पर कमियां पाई जाएं, उन्हें जल्द से जल्द दूर किया जाए। साथ ही हॉस्टल सुरक्षा, स्वच्छता और मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम को मजबूत करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया है।

मामले को लेकर प्रशासनिक स्तर पर भी हलचल बढ़ गई है और उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही इस पर समीक्षा बैठक की जा सकती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि मेडिकल शिक्षा में बुनियादी सुविधाओं की कमी का सीधा असर छात्रों की पढ़ाई और प्रशिक्षण पर पड़ सकता है, जो भविष्य में स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावित कर सकता है।

फिलहाल सभी संगठनों ने एकजुट होकर इस मुद्दे को गंभीरता से उठाया है और सुधारात्मक कदम उठाने की मांग की है।

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