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Indore : फूड पॉइजनिंग से 110 बच्चे बीमार, प्राइवेट स्कूल की रसोई सील

Madhya Pradesh मध्य प्रदेश : इंदौर में एक प्राइवेट स्कूल में भोजन करने के बाद लगभग 110 बच्चों के बीमार पड़ने का मामला सामने आया है। इस घटना के बाद प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए जांच शुरू कर दी है और सोमवार को संबंधित स्कूल की रसोई को सील कर दिया गया।
अधिकारियों के अनुसार, यह मामला दो दिन पहले हुई संदिग्ध फूड पॉइजनिंग से जुड़ा है। शुरुआती जांच में स्कूल की रसोई में कई अनियमितताएं पाई गईं, जिनमें एक्सपायर्ड खाद्य सामग्री का उपयोग और स्वच्छता मानकों का पालन न किया जाना शामिल है। इन गंभीर खामियों के सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने रसोई को सील करने का निर्णय लिया।
अभिभावकों की शिकायत के बाद प्रशासनिक टीम ने बाईपास रोड स्थित शिशुकुंज इंटरनेशनल स्कूल के झालरिया कैंपस का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान भोजन की गुणवत्ता और किचन संचालन से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच की गई।
अधिकारियों ने बताया कि स्कूल की रसोई से भोजन सामग्री और तैयार खाने के कुल 23 सैंपल एकत्र किए गए हैं। इन सभी सैंपलों को विस्तृत जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि बच्चों की तबीयत बिगड़ने की असली वजह क्या थी।
प्रशासन का कहना है कि प्रारंभिक जांच में कुछ खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता संदिग्ध पाई गई है, जिसके बाद सख्त कदम उठाते हुए रसोई को तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया गया।
घटना के बाद कई बच्चों को उल्टी, पेट दर्द और कमजोरी जैसी शिकायतों के चलते स्थानीय अस्पतालों में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज जारी है और अधिकांश बच्चों की स्थिति अब स्थिर बताई जा रही है।
जिला प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए स्कूल प्रबंधन से भी जवाब-तलब किया है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि स्कूल में भोजन आपूर्ति और सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा था या नहीं।
अधिकारियों ने कहा कि जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। यदि लापरवाही या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।
इस घटना ने शहर में स्कूलों की भोजन सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अभिभावकों ने मांग की है कि सभी शैक्षणिक संस्थानों में भोजन की गुणवत्ता की नियमित जांच की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
फिलहाल प्रशासनिक टीमें मामले की विस्तृत जांच में जुटी हुई हैं और बच्चों के स्वास्थ्य पर लगातार नजर रखी जा रही है।





