मध्य प्रदेश

MP News: देवता के दर्शन मात्र से कुंवारों की हो जाती है शादी

Sarita
13 March 2025 10:56 AM IST
MP News: देवता के दर्शन मात्र से कुंवारों की हो जाती है शादी
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MP News: वैसे तो देशभर में देवी-देवताओं के कई मंदिर हैं, जो लोगों के दुख-दर्द दूर करते हैं. लोगों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं, लेकिन क्या आपने कभी कुंवारों के देवता के बारे में सुना है? उनके दर्शन मात्र से कुंवारों की शादी हो जाती है. यह देवता मध्य प्रदेश के नीमच जिले के जावद कस्बे में स्थित हैं. जिन्हें 'बिल्लम बावजी' के नाम से जाना जाता है. मान्यता है कि जावद के बिल्लम बावजी की पूजा करने से योग्य वर-वधू की प्राप्ति होती है. इसी के चलते लोग सालों से बिल्लम बावजी की पूजा करते आ रहे हैं. जावद कस्बे की पुरानी धान मंडी जावद में कुंवारों के देवता बिल्लम बावजी की चल प्रतिमा विराजमान है. मान्यता है कि 19 मार्च रंगपंचमी से 27 मार्च रंगतेरस तक इनके दर्शन और पूजन करने से कुंवारों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं और उनका विवाह हो जाता है|
कुंवारों के देवता बिल्लम बावजी रंगपंचमी से जावद कस्बे में विराजमान हो जाएंगे. अब यह देवता रंगतीरस यानि 27 मार्च तक कुंवारों और विवाहित जोड़ों को दर्शन देंगे। इसमें श्रद्धालु विधि-विधान से बिल्लम बावजी की पूजा-अर्चना कर उन्हें नगर भ्रमण कराएंगे। साथ ही उन्हें निर्धारित स्थान पर विराजमान किया गया।नगर के प्रवीण सोनी और राजेंद्र बोहरा ने बताया कि चमत्कारी बिल्लम बावजी की मूर्ति नगर के श्री ऋद्धि-सिद्धि गणपति मंदिर में है। रंगपंचमी के दिन इस मूर्ति को बाहर निकाला जाता है। स्थापना के 9 दिन बाद यह मूर्ति फिर से मंदिर में स्थापित कर दी जाती है। इन 9 दिनों में कुंवारे युवक-युवतियां पूजा-अर्चना कर अपने विवाह की कामना करते हैं। बिल्लम बावजी का स्थान कुंवारों के लिए चमत्कारी तीर्थ बन गया है। क्षेत्रवासियों के अनुसार पहले इस देव स्थान पर आने वालों की संख्या काफी कम थी, लेकिन चमत्कार के कारण यहां कुंवारों का तांता लगा रहता है। कुंवारों के अलावा उनके माता-पिता और अन्य रिश्तेदार भी यहां अपने बच्चों के शीघ्र विवाह की कामना करने आते हैं।
अब तक मन्नत मांगने वाले सैकड़ों कुंवारे विवाह बंधन में बंध चुके हैं। यही कारण है कि श्रद्धालु बिल्लम बावजी को कुंवारों का देवता भी कहते हैं। 500 कुंवारे विवाह बंधन में बंध चुके हैं। शहर के व्यवसायी नवीन पुरोहित व अंकित जोशी ने बताया कि पिछले वर्षों में बिल्लम बावजी के दर्शन के लिए करीब 2500 कुंवारे आते थे। इनमें से 500 लोगों का विवाह हो चुका है। इस बार भी रंगपंचमी के दिन सुबह से ही बड़ी संख्या में कुंवारे दर्शन के लिए आ रहे हैं। यह सिलसिला रंग तेरस यानी 6 अप्रैल तक जारी रहेगा।
नवदंपति संतान प्राप्ति की कामना करते हैं
विवाह की मनोकामना पूरी होते ही दंपत्ति बिल्लम बावजी के चरणों में एक साथ शीश झुकाते हैं। संतान प्राप्ति की कामना करते हैं। मनोकामना पूरी होते ही उन्हें संतान प्राप्ति के लिए बावजी का आशीर्वाद भी मिलता है।
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