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MP : कुवैत की कंपनी के साथ ₹7,430 करोड़ का मत्स्य पालन समझौता

Madhya Pradesh मध्य प्रदेश : सरकार ने राज्य में मत्स्य पालन और जलीय कृषि को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार ने कुवैत की एक निजी कंपनी के साथ ₹7,430 करोड़ का मत्स्य पालन समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते का उद्देश्य राज्य के प्रमुख जलाशयों में आधुनिक तकनीक के माध्यम से मछली उत्पादन को बढ़ाना है।
इस समझौते के तहत राज्य के बड़े जलाशयों में पिंजरे आधारित (केज कल्चर) मछली पालन को विकसित किया जाएगा। इससे न केवल उत्पादन क्षमता में वृद्धि होगी, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
मत्स्य पालन विभाग के अनुसार, यह परियोजना राज्य के अंतर्देशीय जल निकायों के बेहतर उपयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। सरकार का मानना है कि आधुनिक तकनीक अपनाकर जल संसाधनों का अधिक प्रभावी उपयोग किया जा सकता है।
VIDEO | Bhopal: An MoU worth Rs 7,430 crore fisheries signed with Kuwait to boost aquaculture at major reservoirs, in presence of Madhya Pradesh CM Mohan Yadav.
— Press Trust of India (@PTI_News) July 6, 2026
(Full video available on PTI Videos - https://t.co/n147TvrpG7) pic.twitter.com/8Gi0bhNkAH
मत्स्य पालन मंत्री नारायण सिंह पंवार ने बताया कि इस समझौते से राज्य में जलीय कृषि के क्षेत्र में एक नई क्रांति आएगी। उन्होंने कहा कि पिंजरे की संस्कृति (केज कल्चर) के माध्यम से जलाशयों में मछली उत्पादन को बड़े स्तर पर बढ़ाया जा सकेगा।
मंत्री के अनुसार, यह निवेश राज्य के ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा देगा। इससे स्थानीय मछुआरों और किसानों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा और उनकी आय में वृद्धि होने की संभावना है।
समझौते के तहत तकनीकी सहयोग, आधुनिक उपकरणों की स्थापना और प्रशिक्षण कार्यक्रमों पर भी ध्यान दिया जाएगा। इसके माध्यम से स्थानीय लोगों को आधुनिक मत्स्य पालन तकनीकों से जोड़ा जाएगा ताकि वे अधिक उत्पादन और बेहतर गुणवत्ता प्राप्त कर सकें।
मध्य प्रदेश सरकार का कहना है कि यह परियोजना राज्य के जल संसाधनों के सतत उपयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। सरकार का लक्ष्य है कि जलाशयों का उपयोग केवल सिंचाई तक सीमित न रहकर आर्थिक विकास का भी माध्यम बने।
विशेषज्ञों के अनुसार, केज कल्चर तकनीक से कम जगह में अधिक उत्पादन संभव होता है और यह पारंपरिक मत्स्य पालन की तुलना में अधिक लाभकारी माना जाता है। इससे जलाशयों की प्राकृतिक क्षमता का भी बेहतर उपयोग किया जा सकता है।
इस समझौते से राज्य में निर्यात क्षमता बढ़ने की भी उम्मीद जताई जा रही है। बेहतर गुणवत्ता वाली मछली उत्पादन प्रणाली से अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी अवसर खुल सकते हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में इस परियोजना को लेकर उत्साह देखा जा रहा है, क्योंकि इससे रोजगार और आय के नए साधन उपलब्ध होने की संभावना है। स्थानीय मछुआरा समुदाय को भी इस परियोजना से प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता मिलने की उम्मीद है।
कुल मिलाकर, यह समझौता मध्य प्रदेश के मत्स्य पालन क्षेत्र में एक बड़े बदलाव की शुरुआत माना जा रहा है, जिससे जल संसाधनों का बेहतर उपयोग और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की संभावना है।





