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धार जिले में अंतिम संस्कार के दौरान बड़ा हादसा, उफनते नाले में बहा शव

Madhya Pradesh मध्य प्रदेश : धार जिले से एक बेहद दर्दनाक और विचलित करने वाली घटना सामने आई है, जिसने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया है। जिले के बाग क्षेत्र अंतर्गत जामला गांव में एक बुजुर्ग के अंतिम संस्कार के दौरान अचानक आई बाढ़ जैसी स्थिति ने पूरे श्मशान घाट को प्रभावित कर दिया। देखते ही देखते तेज बारिश के बाद उफनते नाले का पानी अंतिम संस्कार स्थल तक पहुंच गया और जलती चिता के पास रखा शव पानी के तेज बहाव में बहने लगा। इस घटना से वहां मौजूद परिजनों और ग्रामीणों में अफरा-तफरी और चीख-पुकार मच गई।
जानकारी के अनुसार, ग्राम जामला निवासी लगभग 62 वर्षीय बापू नाछरिया रावत का कुछ दिनों से बीमारी के चलते निधन हो गया था। गुरुवार शाम उनके परिजन पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार उन्हें अंतिम विदाई देने के लिए गांव के पास स्थित श्मशान घाट पहुंचे थे। यह श्मशान घाट एक बड़े नाले के किनारे बना हुआ है, जो सामान्य दिनों में शांत रहता है, लेकिन बारिश के मौसम में अचानक उफान पर आ जाता है।
परिजन और ग्रामीण अंतिम संस्कार की प्रक्रिया में जुटे हुए थे और धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार चिता तैयार कर अंतिम संस्कार किया जा रहा था। इसी दौरान मौसम ने अचानक करवट ली और तेज बारिश शुरू हो गई। कुछ ही समय में आसपास के पहाड़ी और निचले इलाकों से पानी तेजी से बहकर नाले में भरने लगा। देखते ही देखते नाला उफान पर आ गया और पानी श्मशान घाट की ओर बढ़ने लगा।
स्थानीय लोगों के अनुसार, किसी को भी अंदाजा नहीं था कि स्थिति इतनी तेजी से बिगड़ जाएगी। जब तक लोग कुछ समझ पाते, तब तक पानी अंतिम संस्कार स्थल तक पहुंच चुका था। जलती चिता के आसपास पानी भरने लगा और स्थिति इतनी भयावह हो गई कि शव का कुछ हिस्सा बहाव में चला गया। इस दृश्य को देखकर वहां मौजूद परिजन सदमे में आ गए और रो-रोकर बेहाल हो गए।
घटना के दौरान मौजूद ग्रामीणों ने सूझबूझ दिखाते हुए स्थिति को संभालने की कोशिश की। उन्होंने बिना अपनी जान की परवाह किए तेज बहाव में उतरकर शव को सुरक्षित निकालने का प्रयास किया। काफी मशक्कत के बाद ग्रामीणों ने शव को पानी से बाहर निकाला और सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। इसके बाद अंतिम संस्कार की प्रक्रिया को किसी तरह दोबारा व्यवस्थित किया गया।
ग्रामीणों का कहना है कि यह श्मशान घाट लंबे समय से इसी स्थान पर बना हुआ है, लेकिन मानसून के दौरान यहां अक्सर पानी भर जाता है। बावजूद इसके अभी तक इसके स्थायी समाधान के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। इस घटना के बाद एक बार फिर श्मशान घाट की सुरक्षा और स्थान चयन को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
स्थानीय लोगों ने बताया कि बाग क्षेत्र और आसपास के इलाकों में बारिश के मौसम में नाले और छोटे नदी-नाले अचानक उफान पर आ जाते हैं, जिससे निचले इलाकों में खतरा बढ़ जाता है। इस बार बारिश की तीव्रता अधिक होने के कारण स्थिति और भी गंभीर हो गई।
घटना के बाद पूरे गांव में शोक और चिंता का माहौल है। लोग इस बात से भी चिंतित हैं कि यदि समय रहते ग्रामीण सक्रिय नहीं होते तो स्थिति और भी भयावह हो सकती थी। परिजनों के अनुसार, यह उनके लिए बेहद दुखद क्षण था क्योंकि एक तरफ वे अपने परिजन को अंतिम विदाई दे रहे थे और दूसरी तरफ अचानक आई आपदा ने पूरे माहौल को भयावह बना दिया।
स्थानीय प्रशासन से भी लोगों ने मांग की है कि ऐसे संवेदनशील स्थानों पर स्थित श्मशान घाटों की सुरक्षा को लेकर उचित व्यवस्था की जाए। ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के मौसम में इन जगहों पर विशेष सतर्कता और संरचनात्मक सुधार की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
फिलहाल, गांव में स्थिति सामान्य है लेकिन घटना की चर्चा हर जगह हो रही है। लोग इसे एक बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और असामान्य घटना के रूप में देख रहे हैं, जिसने सभी को झकझोर कर रख दिया है।





