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उज्जैन। मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में सोमवार, 14 सितंबर को गणेश चतुर्थी के अवसर पर विशेष भस्म आरती का आयोजन किया गया। इस दौरान बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक भगवान महाकाल का भगवान गणेश के स्वरूप में आकर्षक श्रृंगार किया गया। अलसुबह हुई भस्म आरती में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे। भक्तों ने भगवान महाकाल के विशेष श्रृंगार के दर्शन कर सुख-समृद्धि, बुद्धि और जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर करने की प्रार्थना की।
गणेश चतुर्थी के कारण मंदिर परिसर में सुबह से ही उत्सव और भक्ति का वातावरण बना रहा। भगवान महाकाल के गणपति स्वरूप ने श्रद्धालुओं को विशेष रूप से आकर्षित किया। भस्म आरती के दौरान पूरा मंदिर परिसर भगवान महाकाल और भगवान गणेश के जयकारों से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने आरती में शामिल होकर पंचामृत अभिषेक, पूजन और श्रृंगार की धार्मिक रस्मों का दर्शन किया।
Ujjain, Madhya Pradesh: A divine Bhasma Aarti and enchanting shringar of Lord Mahakal were performed at the Mahakaleshwar Temple. After the temple doors opened, Lord Mahakal was bathed with water and Panchamrit, followed by a divine shringar with sandalwood and fresh flowers.… pic.twitter.com/bRGHkcruVb
— IANS (@ians_india) September 14, 2026
सुबह चार बजे खुले मंदिर के कपाट
पारंपरिक भस्म आरती के लिए श्री महाकालेश्वर मंदिर के कपाट सुबह चार बजे खोले गए। मंदिर के कपाट खुलने के बाद पुजारियों और पंडितों ने गर्भगृह में स्थापित सभी देवी-देवताओं की विधिवत पूजा-अर्चना की। इसके बाद भगवान महाकाल की भस्म आरती से जुड़ी धार्मिक प्रक्रिया शुरू हुई।
सबसे पहले भगवान महाकाल का जल से अभिषेक किया गया। इसके बाद दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से तैयार पंचामृत से अभिषेक किया गया। अभिषेक के उपरांत भगवान को पुनः शुद्ध जल अर्पित किया गया। पुजारियों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान महाकाल की पूजा संपन्न कराई। इस दौरान मंदिर में मौजूद श्रद्धालु हाथ जोड़कर आराधना करते दिखाई दिए।
अभिषेक और पूजन के बाद भगवान महाकाल का विशेष श्रृंगार किया गया। गणेश चतुर्थी को ध्यान में रखते हुए भगवान को गणपति का स्वरूप प्रदान किया गया। श्रृंगार पूरा होने के बाद भगवान महाकाल को वस्त्र और आभूषण अर्पित किए गए। इसके बाद परंपरा के अनुसार भस्म अर्पित कर भव्य आरती की गई।
गणपति स्वरूप ने मोहा भक्तों का मन
भगवान महाकाल के गणेश स्वरूप के दर्शन पाकर श्रद्धालु भावविभोर हो गए। विशेष श्रृंगार में भगवान महाकाल के दिव्य स्वरूप के साथ गणपति की छवि प्रस्तुत की गई। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान गणेश को प्रथम पूज्य, विघ्नहर्ता और बुद्धि-सिद्धि का देवता माना जाता है। वहीं भगवान महाकाल को समय और मृत्यु पर विजय प्राप्त करने वाले देव के रूप में पूजा जाता है।
गणेश चतुर्थी पर महाकाल के गणपति स्वरूप के दर्शन को श्रद्धालुओं ने अत्यंत शुभ माना। अनेक भक्तों ने अपने परिवार की खुशहाली, बच्चों की शिक्षा, व्यापार में प्रगति और जीवन की बाधाओं के निवारण के लिए प्रार्थना की। मंदिर में आए श्रद्धालुओं ने इस धार्मिक अवसर को यादगार बताते हुए कहा कि भगवान महाकाल के विशेष स्वरूप का दर्शन उनके लिए सौभाग्य की बात है।
भस्म आरती के दौरान डमरू, घंटियों और मंत्रोच्चार की ध्वनि से मंदिर का वातावरण भक्तिमय हो गया। पुजारियों ने भगवान महाकाल की आरती उतारी और भक्तों ने जयकारे लगाए। विशेष आरती और श्रृंगार का दर्शन करने के लिए गर्भगृह के बाहर तथा मंदिर के निर्धारित दर्शन क्षेत्रों में श्रद्धालुओं की कतार दिखाई दी।
भस्म आरती का विशेष धार्मिक महत्व
श्री महाकालेश्वर मंदिर की भस्म आरती देशभर में प्रसिद्ध है। भगवान महाकाल की यह आरती प्रतिदिन सूर्योदय से पहले होती है। महाकालेश्वर को दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग के रूप में पूजा जाता है और यहां होने वाली भस्म आरती मंदिर की प्रमुख धार्मिक परंपराओं में शामिल है। देश के अलग-अलग राज्यों से श्रद्धालु इस आरती का दर्शन करने उज्जैन पहुंचते हैं।
त्योहारों और विशेष धार्मिक अवसरों पर भगवान महाकाल का अलग-अलग स्वरूपों में श्रृंगार किया जाता है। इसी परंपरा के तहत गणेश चतुर्थी पर भगवान का गणपति स्वरूप में श्रृंगार किया गया। मंदिर के पुजारियों ने पूरे विधि-विधान के साथ पूजन कराया। भगवान को भोग अर्पित करने के बाद श्रद्धालुओं के दर्शन का क्रम आगे बढ़ा।
दर्शन के लिए उमड़े हजारों श्रद्धालु
गणेश चतुर्थी और विशेष भस्म आरती के कारण मंदिर में आम दिनों की तुलना में अधिक भीड़ रही। सुबह से ही श्रद्धालुओं का मंदिर पहुंचना शुरू हो गया था। मंदिर प्रशासन की ओर से दर्शन व्यवस्था बनाए रखने के लिए श्रद्धालुओं को निर्धारित मार्ग से प्रवेश और निकास कराया गया।
कतार में खड़े श्रद्धालु भगवान महाकाल के जयकारे लगाते रहे। कई भक्त अपने परिवार के साथ मंदिर पहुंचे थे। दर्शन के बाद श्रद्धालुओं ने मंदिर परिसर और आसपास मौजूद अन्य धार्मिक स्थलों पर भी पूजा-अर्चना की। उज्जैन में गणेश चतुर्थी का उत्साह अन्य मंदिरों और पूजा स्थलों पर भी दिखाई दिया।
श्री महाकालेश्वर मंदिर में आयोजित विशेष भस्म आरती ने गणेश चतुर्थी के धार्मिक उल्लास को और बढ़ा दिया। भगवान महाकाल के गणपति स्वरूप, पंचामृत अभिषेक और मंत्रोच्चार के बीच हुई आरती ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभूति कराई। विशेष दर्शन के साथ भक्तों ने भगवान महाकाल और गणपति बप्पा से मंगलमय जीवन का आशीर्वाद मांगा।





