मध्य प्रदेश

सिवनी में क्लर्क के 5 ठिकानों पर लोकायुक्त का छापा

Kavita2
8 Aug 2026 5:06 PM IST
सिवनी में क्लर्क के 5 ठिकानों पर लोकायुक्त का छापा
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सिवनी/जबलपुर। मध्य प्रदेश के सिवनी जिले में तैनात एक क्लर्क के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने की शिकायत के बाद जबलपुर लोकायुक्त पुलिस ने शनिवार सुबह बड़ी कार्रवाई की। लोकायुक्त की टीम ने संबंधित कर्मचारी से जुड़े पांच अलग-अलग ठिकानों पर एक साथ छापेमारी कर तलाशी अभियान चलाया। कार्रवाई के दौरान अधिकारियों ने संपत्तियों और अन्य दस्तावेजों से संबंधित जानकारी जुटाई।

लोकायुक्त पुलिस की यह कार्रवाई सिवनी में क्षेत्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज प्रशिक्षण केंद्र में पदस्थ क्लर्क सुभाष शर्मा के खिलाफ मिली शिकायत के आधार पर की गई। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि कर्मचारी ने अपनी ज्ञात आय के स्रोतों की तुलना में काफी अधिक संपत्ति अर्जित की है।

पांच स्थानों पर एक साथ पहुंची टीम

जानकारी के मुताबिक, शिकायत की जांच के बाद लोकायुक्त पुलिस ने शनिवार सुबह कार्रवाई की योजना बनाई। इसके बाद अलग-अलग टीमों को बनाकर सुभाष शर्मा से जुड़े पांच ठिकानों पर एक साथ तलाशी शुरू की गई।

एक साथ कई स्थानों पर कार्रवाई का उद्देश्य संभावित दस्तावेजों, संपत्ति से संबंधित कागजात और अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्यों को सुरक्षित करना था। लोकायुक्त की टीम ने घर और अन्य संबंधित परिसरों में मौजूद दस्तावेजों की जांच की।

कार्रवाई के दौरान अधिकारियों ने संपत्ति के दस्तावेज, वित्तीय लेनदेन से जुड़े रिकॉर्ड और अन्य महत्वपूर्ण कागजात की जानकारी जुटाने का प्रयास किया। हालांकि, तलाशी के दौरान वास्तव में कितनी संपत्ति या नकदी बरामद हुई, इसकी विस्तृत जानकारी कार्रवाई पूरी होने के बाद सामने आने की उम्मीद है।

आय से अधिक संपत्ति का आरोप

लोकायुक्त पुलिस के सामने की गई शिकायत का मुख्य आधार आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोप है। शिकायतकर्ता की ओर से दावा किया गया था कि सुभाष शर्मा की संपत्तियां उनकी वैध और ज्ञात आय के अनुपात में अधिक हैं।

ऐसे मामलों में लोकायुक्त की टीम संबंधित कर्मचारी की आय, संपत्ति, निवेश और खर्च का विस्तृत मिलान करती है। जांच में यह देखा जाता है कि कर्मचारी की घोषित आय के मुकाबले उसके पास मौजूद चल-अचल संपत्तियां और अन्य आर्थिक संसाधन किस अनुपात में हैं।

शनिवार को हुई तलाशी के दौरान अधिकारियों को ऐसी संपत्तियों के बारे में जानकारी मिलने की बात सामने आई है, जिनका मूल्य कर्मचारी की ज्ञात आय के स्रोतों से काफी अधिक बताया जा रहा है। हालांकि, संपत्तियों के वास्तविक मूल्य और आय के बीच अंतर का आधिकारिक आकलन जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

क्षेत्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज प्रशिक्षण केंद्र में पदस्थ

सुभाष शर्मा सिवनी में क्षेत्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज प्रशिक्षण केंद्र में क्लर्क के पद पर तैनात हैं। उनके खिलाफ मिली शिकायत में कथित तौर पर लंबे समय से आय के मुकाबले अधिक संपत्ति जुटाने के आरोप लगाए गए थे।

लोकायुक्त की कार्रवाई के बाद अब उनके सेवा रिकॉर्ड और आय से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच किए जाने की संभावना है। इसके अलावा संपत्ति खरीदने के स्रोत, बैंक खातों, निवेश और अन्य आर्थिक गतिविधियों की भी पड़ताल की जा सकती है।

दस्तावेजों की जांच पर फोकस

लोकायुक्त की टीम की कार्रवाई में केवल संपत्तियों की पहचान करना ही महत्वपूर्ण नहीं होता, बल्कि उनके स्रोत की जानकारी जुटाना भी जांच का अहम हिस्सा होता है। इसी वजह से तलाशी के दौरान मिले दस्तावेजों को जांच के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

अधिकारियों द्वारा संपत्ति से जुड़े कागजात, बैंकिंग रिकॉर्ड और अन्य वित्तीय दस्तावेजों का मिलान कर्मचारी की आधिकारिक आय से किया जा सकता है। यदि जांच में आय और संपत्ति के बीच बड़ा अंतर सामने आता है तो उसके आधार पर आगे कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

जांच के बाद सामने आएगी तस्वीर

लोकायुक्त पुलिस की ओर से की गई कार्रवाई फिलहाल जांच के चरण में है। तलाशी में मिले दस्तावेजों और अन्य सामग्री का परीक्षण किए जाने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कर्मचारी के खिलाफ लगाए गए आय से अधिक संपत्ति के आरोप कितने सही हैं।

अधिकारियों की ओर से संपत्तियों का मूल्यांकन और आय के स्रोतों का सत्यापन किया जाएगा। इसके बाद जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

भ्रष्टाचार के मामलों पर लोकायुक्त की नजर

मध्य प्रदेश में लोकायुक्त पुलिस सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति से जुड़ी शिकायतों पर समय-समय पर कार्रवाई करती रही है। इस तरह की कार्रवाई का उद्देश्य सरकारी पद का दुरुपयोग कर अवैध तरीके से संपत्ति अर्जित करने के आरोपों की जांच करना है।

सिवनी में क्लर्क के ठिकानों पर हुई यह कार्रवाई भी इसी प्रक्रिया का हिस्सा है। एक साथ पांच स्थानों पर छापेमारी किए जाने से मामले की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

फिलहाल लोकायुक्त टीम की तलाशी और दस्तावेजों की जांच जारी है। कार्रवाई पूरी होने के बाद बरामद संपत्ति, दस्तावेज और अन्य सामग्री का विस्तृत विवरण सामने आने की उम्मीद है। इसके बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कर्मचारी की घोषित आय और कथित संपत्ति के बीच कितना अंतर है और मामले में आगे किस तरह की कानूनी कार्रवाई की जाती है।

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