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मध्य प्रदेश
मध्य प्रदेश में सरकारी खरीद में गड़बड़ी का मामला गरमाया
Ratna Netam
22 Oct 2026 4:44 PM IST

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भोपाल। मध्य प्रदेश के नगरीय विकास एवं आवास विभाग में सरकारी खरीद प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का मामला सामने आने के बाद राज्य सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। विभाग की राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी ने गुरुवार को अधिकारियों द्वारा की गई खरीद में गड़बड़ियों के आरोपों की उच्चस्तरीय जांच के निर्देश दिए हैं। यह कार्रवाई अतिरिक्त मुख्य सचिव (ACS) संजय दुबे का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद की गई है। वीडियो में वरिष्ठ अधिकारी नगर निकायों द्वारा की गई खरीद की प्रक्रिया और सामान की कीमतों में भारी अंतर को लेकर सवाल उठाते दिखाई दे रहे हैं।मामले के सामने आने के बाद सरकारी खरीद में पारदर्शिता, वित्तीय जवाबदेही और अधिकारियों की भूमिका को लेकर चर्चा तेज हो गई है। मंत्री प्रतिमा बागरी ने स्पष्ट किया कि यदि जांच में किसी भी स्तर पर अनियमितता मिलती है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
वायरल वीडियो में वरिष्ठ अधिकारी ने उठाए सवाल
नगरीय विकास एवं आवास विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव संजय दुबे का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें वह नगर निकायों के अधिकारियों को सरकारी सामान की खरीद में बरती गई कथित लापरवाही को लेकर फटकार लगाते नजर आ रहे हैं।विभागीय बैठक के इस वीडियो में संजय दुबे ने कचरा संग्रहण वाहनों की खरीद में कीमतों के बड़े अंतर का उल्लेख किया। उन्होंने सवाल उठाया किसमान प्रकार के वाहन अलग-अलग नगर निकायों द्वारा अलग-अलग कीमतों पर क्यों खरीदे गए।उन्होंने यह भी कहा कि सरकारी खरीद में अनावश्यक खर्च रोकने के लिए अधिकारियों को अधिक जिम्मेदारी से काम करना चाहिए।
करोड़ों रुपये की खरीद पर उठे गंभीर सवाल
रिपोर्ट के अनुसार, अतिरिक्त मुख्य सचिव ने बताया कि प्रदेश के 374 नगरीय निकायों ने पिछले तीन वर्षों में सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) के माध्यम से लगभग 1,134 करोड़ रुपये की खरीद की है।उन्होंने खरीद के आंकड़ों का विश्लेषण करते हुए कहा कि यदि सामान की कीमतों का उचित आकलन किया जाता, तो करीब 250 करोड़ रुपये तक की संभावित बचत हो सकती थी।उन्होंने कचरा संग्रहण वाहनों की खरीद का उदाहरण देते हुए बताया कि समान उपयोग वाले कुछ वाहनों की कीमतों में कई गुना अंतर देखने को मिला है।हालांकि, इन आंकड़ों के आधार पर वास्तविक वित्तीय नुकसान कितना हुआ है, यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
मंत्री प्रतिमा बागरी ने दी कार्रवाई की चेतावनी
राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी ने मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि विभाग में होने वाली खरीद और निर्माण कार्यों की नियमित निगरानी की जाती है।उन्होंने कहा, "विभाग में जब भी कोई काम होता है, चाहे वह खरीद से जुड़ा हो या निर्माण से, तो उसकी निगरानी की जाती है। यदि निगरानी के दौरान कोई अनियमितता पाई जाती है, तो विभाग मामले की जांच करता है और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करता है।"मंत्री ने कहा कि पहले भी अनियमितताओं से जुड़े मामलों में कार्रवाई की गई है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि मौजूदा मामले में भी जांच के दौरान दोषी पाए जाने वाले किसी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता पर जोर
सरकारी विभागों में सामान और सेवाओं की खरीद के लिए निर्धारित नियमों का पालन जरूरी होता है। इसमें निविदा प्रक्रिया, बाजार मूल्य का आकलन, गुणवत्ता परीक्षण और भुगतान संबंधी दस्तावेजों की जांच शामिल होती है।सरकारी ई-मार्केटप्लेस का उद्देश्य सरकारी खरीद को अधिक पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी बनाना है। हालांकि, अलग-अलग नगर निकायों द्वारा एक जैसे सामान की खरीद में कीमतों का अत्यधिक अंतर सामने आने पर उसकी समीक्षा आवश्यक हो जाती है।विभागीय स्तर पर ऐसे मामलों में संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगने और खरीद से जुड़े दस्तावेजों की जांच करने की व्यवस्था होती है।
अधिकारियों की जिम्मेदारी होगी तय
मंत्री प्रतिमा बागरी के अनुसार, विभाग में खरीद और निर्माण कार्यों की निगरानी लगातार की जा रही है। अनियमितता पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।जांच में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अलग-अलग नगरीय निकायों द्वारा खरीदे गए सामान की कीमतें बाजार दरों के अनुरूप थीं या नहीं।इसके साथ ही खरीद की आवश्यकता, गुणवत्ता, मंजूरी देने वाले अधिकारियों की भूमिका और भुगतान प्रक्रिया का परीक्षण भी महत्वपूर्ण हो सकता है।हालांकि, किसी अधिकारी की व्यक्तिगत जिम्मेदारी और संभावित वित्तीय नुकसान के संबंध में अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही निकाला जा सकेगा।
सरकारी खर्च की निगरानी बढ़ाने की जरूरत
इस विवाद ने नगरीय निकायों में सरकारी धन के उपयोग और खरीद प्रक्रिया की निगरानी को लेकर सवाल खड़े किए हैं।वरिष्ठ अधिकारी संजय दुबे ने विभागीय बैठक में स्पष्ट किया कि आधुनिक तकनीक और आंकड़ों के विश्लेषण से सरकारी खरीद की निगरानी की जा सकती है। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी दी कि अनावश्यक और अधिक कीमत पर की जाने वाली खरीद को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।फिलहाल मंत्री प्रतिमा बागरी द्वारा उच्चस्तरीय जांच के निर्देश दिए जाने के बाद संबंधित अधिकारियों और विभागीय खरीद प्रक्रियाओं पर नजर बनी हुई है। जांच के निष्कर्षों से स्पष्ट होगा कि कथित अनियमितताएं किस स्तर पर हुईं और उनके लिए कौन जिम्मेदार है।
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