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‘सेफ क्लिक 2.0’ अभियान में इंदौर पुलिस को राज्य स्तरीय सम्मान

Madhya Pradesh मध्य प्रदेश : साइबर अपराधों के प्रति लोगों को जागरूक बनाने के उद्देश्य से चलाए गए ‘सेफ क्लिक 2.0’ अभियान में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए इंदौर पुलिस कमिश्नरेट को राज्य स्तर पर सम्मानित किया गया है। 24 जून से 8 जुलाई तक चले इस विशेष साइबर जागरूकता अभियान के दौरान इंदौर पुलिस ने बड़े पैमाने पर जनसंपर्क कार्यक्रम आयोजित कर नागरिकों को ऑनलाइन धोखाधड़ी, डिजिटल सुरक्षा और साइबर अपराधों से बचाव के प्रति जागरूक किया। अभियान की सफलता को देखते हुए पुलिस मुख्यालय ने इंदौर पुलिस को राज्य का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले कमिश्नरेट्स में शामिल करते हुए सम्मान प्रदान किया।
यह सम्मान भोपाल में आयोजित एक राज्य स्तरीय कार्यक्रम में पुलिस महानिदेशक (DGP) कैलाश मकवाना द्वारा प्रदान किया गया। इस अवसर पर इंदौर पुलिस कमिश्नरेट को उत्कृष्ट कार्य के लिए शील्ड और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। यह सम्मान साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में पुलिस द्वारा किए गए व्यापक जनजागरूकता प्रयासों की आधिकारिक सराहना माना जा रहा है।
अभियान के दौरान इंदौर पुलिस ने पूरे शहर में 307 से अधिक साइबर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए। इन कार्यक्रमों के माध्यम से नागरिकों को डिजिटल दुनिया में बढ़ते साइबर अपराधों से बचने के उपाय बताए गए। पुलिस अधिकारियों ने लोगों को फर्जी कॉल, ऑनलाइन बैंकिंग धोखाधड़ी, फिशिंग लिंक, फर्जी निवेश योजनाओं, सोशल मीडिया फ्रॉड, ओटीपी शेयरिंग, डिजिटल अरेस्ट जैसे साइबर अपराधों से सावधान रहने की सलाह दी।
पुलिस के अनुसार, इस अभियान के तहत 275 से अधिक ऑफलाइन कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिनके माध्यम से 80 लाख से अधिक लोगों तक साइबर सुरक्षा का संदेश पहुंचाया गया। इनमें 5 लाख से अधिक नागरिकों ने सीधे तौर पर विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लिया और विशेषज्ञों से साइबर सुरक्षा संबंधी जानकारी प्राप्त की।
अभियान को अधिक प्रभावी बनाने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी व्यापक उपयोग किया गया। “Safe Click, Safe Life” थीम के तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लगातार जागरूकता संदेश, वीडियो, पोस्टर और सावधानी संबंधी जानकारी साझा की गई। इन डिजिटल प्रयासों के माध्यम से 75 लाख से अधिक लोगों तक साइबर सुरक्षा का संदेश पहुंचाया गया।
इंदौर पुलिस ने अभियान को केवल औपचारिक कार्यक्रमों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि शहर के विभिन्न सार्वजनिक स्थलों पर भी व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाया। स्कूलों, कॉलेजों, आवासीय कॉलोनियों, बैंकों, होटलों, रेस्टोरेंट, शॉपिंग मॉल, बाजारों, धार्मिक स्थलों, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर विशेष जागरूकता गतिविधियों का आयोजन किया गया।
अभियान के दौरान लोगों को आकर्षित करने और संदेश को सरल तरीके से पहुंचाने के लिए कई रचनात्मक माध्यमों का इस्तेमाल किया गया। इनमें व्याख्यान, नुक्कड़ नाटक, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, जागरूकता रैलियां, मैराथन, साइबर हैकाथॉन, पोस्टर वितरण तथा एलईडी स्क्रीन पर साइबर सुरक्षा से जुड़े वीडियो का प्रदर्शन शामिल था। इन कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में विद्यार्थी, युवा, वरिष्ठ नागरिक, व्यापारी और आम नागरिक शामिल हुए।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि साइबर अपराध लगातार नए रूपों में सामने आ रहे हैं। ऐसे में केवल कानून लागू करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि नागरिकों को समय रहते जागरूक करना भी उतना ही जरूरी है। यदि लोग सतर्क रहें और साइबर अपराधियों द्वारा अपनाए जाने वाले तरीकों को समझें, तो अधिकांश ऑनलाइन धोखाधड़ी को रोका जा सकता है।
विशेषज्ञों ने अभियान के दौरान लोगों को सलाह दी कि किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें, मोबाइल पर प्राप्त संदिग्ध कॉल या संदेशों पर विश्वास न करें, बैंक खाते, एटीएम कार्ड, ओटीपी या पासवर्ड जैसी गोपनीय जानकारी किसी के साथ साझा न करें। साथ ही साइबर धोखाधड़ी होने पर तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 या साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने की भी जानकारी दी गई।
पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना ने सम्मान समारोह के दौरान कहा कि साइबर अपराधों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए जनभागीदारी और जागरूकता सबसे महत्वपूर्ण हथियार हैं। उन्होंने इंदौर पुलिस की पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के अभियान अन्य जिलों के लिए भी प्रेरणादायक हैं।
इंदौर पुलिस कमिश्नरेट के अधिकारियों ने इस सम्मान का श्रेय पुलिस बल, स्वयंसेवी संगठनों, शैक्षणिक संस्थानों, सामाजिक संगठनों, मीडिया और उन सभी नागरिकों को दिया जिन्होंने अभियान को सफल बनाने में सहयोग किया। उनका कहना है कि भविष्य में भी साइबर सुरक्षा के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए ऐसे अभियान लगातार जारी रहेंगे।
‘सेफ क्लिक 2.0’ अभियान की सफलता यह दर्शाती है कि यदि पुलिस, समाज और डिजिटल माध्यम मिलकर काम करें तो साइबर अपराधों के खिलाफ एक मजबूत सुरक्षा तंत्र तैयार किया जा सकता है। राज्य स्तरीय सम्मान मिलने से इंदौर पुलिस का मनोबल भी बढ़ा है और उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में साइबर जागरूकता के ऐसे अभियान और अधिक व्यापक स्तर पर चलाए जाएंगे।





