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इंदौर : मध्य प्रदेश के इंदौर जिले में छोटे बच्चों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने और शिशु मृत्यु दर को कम करने के उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग ने मंगलवार से ‘दस्तक’ अभियान की शुरुआत की है। इस अभियान के तहत पांच साल से कम उम्र के बच्चों की घर-घर जाकर जांच की जाएगी और गंभीर बीमारियों की पहचान कर समय पर इलाज उपलब्ध कराया जाएगा।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, यह अभियान 14 जुलाई से शुरू होकर 31 अगस्त तक चलेगा। इस दौरान जिले के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य टीमें सक्रिय रहेंगी। अभियान का मुख्य उद्देश्य बच्चों में होने वाली गंभीर बीमारियों का शुरुआती चरण में पता लगाना और उन्हें बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
इंदौर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. माधव प्रसाद हसानी ने बताया कि ‘दस्तक’ अभियान को सफल बनाने के लिए आशा कार्यकर्ताओं, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और एएनएम (ANM) की मदद ली जाएगी। ये स्वास्थ्यकर्मी घर-घर जाकर बच्चों की जांच करेंगे और जरूरत पड़ने पर उन्हें अस्पतालों तक पहुंचाने में सहायता करेंगे।
उन्होंने बताया कि अभियान के दौरान खासतौर पर उन इलाकों पर ज्यादा ध्यान दिया जाएगा, जहां बच्चों के बीमार होने का खतरा अधिक रहता है। इनमें झुग्गी-झोपड़ी क्षेत्र, ईंट भट्टे, खानाबदोश समुदायों के ठिकाने और निर्माणाधीन साइट्स शामिल हैं। इन स्थानों पर रहने वाले बच्चों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना अभियान की प्राथमिकता होगी।
स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि कई बार छोटे बच्चों में बीमारी के शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर दिया जाता है, जिससे स्थिति गंभीर हो सकती है। ऐसे में समय पर जांच और इलाज मिलने से बच्चों को गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से बचाया जा सकता है।
‘दस्तक’ अभियान के दौरान स्वास्थ्य टीमें बच्चों में कई महत्वपूर्ण बीमारियों की जांच करेंगी। इनमें डायरिया, निमोनिया, गंभीर तीव्र कुपोषण (Severe Acute Malnutrition), एनीमिया और बचपन में होने वाली अन्य बीमारियां शामिल हैं।
डायरिया और निमोनिया पांच साल से कम उम्र के बच्चों में गंभीर समस्या बन सकते हैं। समय पर इलाज नहीं मिलने पर ये बीमारियां जानलेवा भी साबित हो सकती हैं। अभियान के जरिए इन बीमारियों की पहचान कर बच्चों को तुरंत उपचार उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।
इसके अलावा, स्वास्थ्यकर्मी बच्चों के पोषण स्तर की भी जांच करेंगे। कुपोषण की स्थिति मिलने पर बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्रों और स्वास्थ्य सुविधाओं से जोड़ा जाएगा। स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य है कि कोई भी बच्चा इलाज और पोषण संबंधी सुविधाओं से वंचित न रहे।
एनीमिया की जांच भी अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। बच्चों में खून की कमी से कमजोरी, विकास में रुकावट और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। ऐसे मामलों में स्वास्थ्य विभाग बच्चों और उनके अभिभावकों को आवश्यक सलाह और उपचार उपलब्ध कराएगा।
अभियान के दौरान स्वास्थ्यकर्मी अभिभावकों को बच्चों की देखभाल, साफ-सफाई, पोषण और बीमारी के लक्षणों के बारे में जागरूक भी करेंगे। उन्हें बताया जाएगा कि बच्चों में किसी भी तरह की स्वास्थ्य समस्या दिखाई देने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
स्वास्थ्य विभाग ने अभियान को प्रभावी बनाने के लिए मैदानी स्तर पर टीमों को जिम्मेदारी सौंपी है। आशा कार्यकर्ता और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता अपने क्षेत्रों में बच्चों की सूची तैयार कर उनकी स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी जुटाएंगी।
अधिकारियों का कहना है कि ‘दस्तक’ अभियान केवल बीमारी की पहचान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बच्चों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं से जोड़ने का काम भी करेगा। गंभीर स्थिति वाले बच्चों को तत्काल इलाज के लिए उच्च स्वास्थ्य केंद्रों पर भेजा जाएगा।
इंदौर जिले में स्वास्थ्य विभाग पहले भी बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर कई अभियान चला चुका है। ‘दस्तक’ अभियान के माध्यम से विभाग का लक्ष्य है कि बच्चों में बीमारी की पहचान जल्दी हो और इलाज में देरी न हो।
विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों की मृत्यु दर कम करने के लिए शुरुआती जांच और समय पर उपचार बेहद जरूरी है। ग्रामीण और कमजोर वर्ग के परिवारों में कई बार स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के कारण बीमारियों का पता देर से चलता है। ऐसे अभियानों से इन परिवारों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने में मदद मिलती है।
स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे अभियान के दौरान स्वास्थ्य टीमों का सहयोग करें और अपने पांच साल से कम उम्र के बच्चों की जांच जरूर करवाएं। अधिकारियों ने कहा कि बच्चों का बेहतर स्वास्थ्य ही स्वस्थ समाज की नींव है।
फिलहाल इंदौर जिले में ‘दस्तक’ अभियान शुरू हो चुका है और स्वास्थ्य विभाग की टीमें अलग-अलग क्षेत्रों में पहुंचकर बच्चों की जांच कर रही हैं। 31 अगस्त तक चलने वाले इस अभियान के जरिए हजारों बच्चों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।





