मध्य प्रदेश

हाई कोर्ट का सरकार को आदेश, कर्मचारियों की जानकारी पेश करें

Saba Naaz
14 July 2026 4:49 PM IST
हाई कोर्ट का सरकार को आदेश, कर्मचारियों की जानकारी पेश करें
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जबलपुर: मध्य प्रदेश में पदोन्नति में आरक्षण (Promotion Reservation) से जुड़े मामले में हाई कोर्ट में मंगलवार को अहम सुनवाई हुई। इस दौरान राज्य सरकार ने अपनी आरक्षण नीति का बचाव करते हुए अदालत में जवाब पेश किया। सरकार ने कहा कि पदोन्नति में आरक्षण का फैसला पिछड़ेपन और सरकारी सेवाओं में पर्याप्त प्रतिनिधित्व से जुड़े आंकड़ों के आधार पर लिया गया है।

सुनवाई के बाद हाई कोर्ट की विशेष पीठ ने राज्य सरकार को संबंधित कर्मचारियों का डेटा याचिकाकर्ताओं के साथ साझा करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 21 जुलाई की तारीख तय की है। अब इस मामले में आगे की सुनवाई के दौरान कर्मचारियों से जुड़े आंकड़ों और सरकार की नीति पर विस्तार से चर्चा होगी।

इस मामले की सुनवाई हाई कोर्ट की विशेष पीठ के समक्ष हुई। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया के स्वयं को मामले से अलग करने के बाद गठित विशेष पीठ में न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल और न्यायमूर्ति विनय सराफ शामिल हैं। पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत में विस्तृत जवाब पेश किया गया। सरकार ने अपने पक्ष में कहा कि पदोन्नति में आरक्षण लागू करने का निर्णय किसी मनमाने आधार पर नहीं लिया गया है, बल्कि इसके लिए संबंधित वर्गों के पिछड़ेपन और सरकारी सेवाओं में उनके प्रतिनिधित्व से जुड़े आंकड़ों का अध्ययन किया गया है।

सरकार ने अदालत को बताया कि आरक्षण नीति का उद्देश्य उन वर्गों को उचित प्रतिनिधित्व देना है, जो लंबे समय से सरकारी सेवाओं में पर्याप्त भागीदारी नहीं पा सके हैं। वहीं, याचिकाकर्ताओं की ओर से इस नीति को लेकर कई सवाल उठाए गए हैं और मामले में आवश्यक दस्तावेजों की मांग की गई है।

हाई कोर्ट ने दोनों पक्षों के बीच पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सरकार को संबंधित कर्मचारियों से जुड़ा डेटा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। अदालत के इस आदेश के बाद अब सरकार को कर्मचारियों की जानकारी और संबंधित रिकॉर्ड याचिकाकर्ताओं के साथ साझा करना होगा।

मध्य प्रदेश में पदोन्नति में आरक्षण का मामला लंबे समय से कानूनी विवाद में है। इस मामले को लेकर सरकारी कर्मचारी संगठनों और विभिन्न पक्षों की अलग-अलग राय रही है। कुछ संगठन पदोन्नति में आरक्षण को जरूरी बताते हैं, जबकि कुछ पक्ष इसका विरोध कर रहे हैं।

अब 21 जुलाई को होने वाली सुनवाई में यह साफ हो सकेगा कि मामले में आगे की दिशा क्या होगी। फिलहाल हाई कोर्ट के आदेश के बाद सरकार द्वारा उपलब्ध कराए जाने वाले डेटा और दस्तावेजों पर सभी की नजर बनी हुई है।

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