मध्य प्रदेश

गुप्त गोदावरी मंदिर चार दिन से बंद, गुफा में पत्थर गिरने के बाद श्रद्धालुओं को इंतजार

Kavita2
29 Sept 2026 11:25 AM IST
गुप्त गोदावरी मंदिर चार दिन से बंद, गुफा में पत्थर गिरने के बाद श्रद्धालुओं को इंतजार
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चित्रकूट। प्रसिद्ध धार्मिक स्थल गुप्त गोदावरी मंदिर की पहली गुफा में पहाड़ी से पत्थर का टुकड़ा गिरने की घटना के चार दिन बाद भी मंदिर श्रद्धालुओं के लिए बंद है। मंदिर बंद रहने से दूर-दराज से दर्शन के लिए पहुंच रहे हजारों श्रद्धालुओं में निराशा है। प्रशासन ने सुरक्षा कारणों से प्रवेश रोक रखा है और जांच टीम के निरीक्षण के बाद ही आगे का फैसला किए जाने की बात कही गई है।

जानकारी के मुताबिक लगातार बारिश और पहाड़ी क्षेत्र में पानी के रिसाव के कारण गुफा के भीतर चट्टानों की स्थिति प्रभावित हुई। इसी दौरान पहली गुफा में एक बड़ा पत्थर गिर गया। घटना के बाद एहतियात के तौर पर मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं का प्रवेश रोक दिया गया, ताकि किसी तरह की दुर्घटना न हो।

शुरुआती जानकारी में यह भी सामने आया कि शिव मंदिर के पास तीन बड़े पत्थर गिरे थे। पत्थरों के गिरने के बाद गुफा के अंदर मौजूद अन्य चट्टानों की मजबूती को लेकर भी सवाल खड़े हुए हैं। प्रशासन किसी भी तरह का जोखिम नहीं लेना चाहता और इसी वजह से मंदिर को जांच पूरी होने तक बंद रखा गया है।

गुप्त गोदावरी धार्मिक और पर्यटन दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां भगवान राम और माता सीता से जुड़ी मान्यताओं के कारण दर्शन के लिए पहुंचते हैं। गुफा के भीतर प्राकृतिक जलधारा और धार्मिक स्थल होने के कारण यहां पूरे साल भक्तों की आवाजाही बनी रहती है।

मंदिर के बंद होने के कारण श्रद्धालुओं को परिसर के बाहर से ही लौटना पड़ रहा है। कई लोग दूर-दूर से यात्रा कर गुप्त गोदावरी पहुंच रहे हैं, लेकिन प्रवेश बंद होने की जानकारी मिलने के बाद उन्हें निराशा का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय दुकानदारों और धार्मिक गतिविधियों से जुड़े लोगों पर भी मंदिर बंद रहने का असर दिखाई दे रहा है।

जिला प्रशासन के अधिकारियों ने घटना के बाद कहा था कि गुफा की स्थिति की जांच के लिए विशेषज्ञों की टीम बुलाई जाएगी। टीम यह देखेगी कि पत्थर गिरने का मुख्य कारण क्या था और गुफा के अंदर मौजूद अन्य चट्टानों से किसी तरह का खतरा तो नहीं है। इसके बाद ही श्रद्धालुओं के लिए मंदिर दोबारा खोलने का निर्णय लिया जाएगा।

हालांकि घटना के चार दिन बाद भी जांच टीम के पहुंचने को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होने से श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों में सवाल बढ़ रहे हैं। लोग यह जानना चाहते हैं कि विशेषज्ञों की टीम कब पहुंचेगी और मंदिर को सुरक्षित घोषित करने की प्रक्रिया में कितना समय लगेगा।

बारिश के दौरान पहाड़ी और गुफा वाले इलाकों में पानी का रिसाव सामान्य रूप से बढ़ जाता है। लगातार नमी और चट्टानों के बीच पानी जाने से कमजोर हिस्सों के टूटने या खिसकने का खतरा पैदा हो सकता है। गुप्त गोदावरी की गुफाओं की प्राकृतिक संरचना को देखते हुए प्रशासन विशेष सावधानी बरत रहा है।

मंदिर प्रशासन और स्थानीय अधिकारी भी गुफा के आसपास की स्थिति पर नजर रख रहे हैं। प्रवेश द्वार के पास श्रद्धालुओं को रोकने के लिए व्यवस्था की गई है। लोगों को गुफा के भीतर जाने की अनुमति नहीं दी जा रही है, क्योंकि जब तक विशेषज्ञ निरीक्षण पूरा नहीं कर लेते तब तक सुरक्षा की गारंटी देना मुश्किल माना जा रहा है।

गुफा के अंदर गिरे पत्थरों का आकार और उनके गिरने की जगह भी जांच का अहम हिस्सा होगी। विशेष रूप से शिव मंदिर के पास पत्थर गिरने की जानकारी के बाद वहां की चट्टानों की संरचना और ऊपर मौजूद हिस्सों की स्थिरता की जांच जरूरी हो गई है।

विशेषज्ञ टीम के आने के बाद संभवतः गुफा की चट्टानों, दरारों, पानी के रिसाव और कमजोर हिस्सों का निरीक्षण किया जाएगा। जहां जरूरत होगी वहां सुरक्षा के उपाय सुझाए जा सकते हैं। इसके बाद ही यह तय होगा कि पूरे मंदिर को एक साथ खोला जाए या कुछ हिस्सों में प्रवेश सीमित रखा जाए।

गुप्त गोदावरी में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने के कारण प्रशासन के लिए सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता बनी हुई है। यदि बिना जांच के मंदिर खोल दिया जाता है और किसी अन्य पत्थर के गिरने की घटना होती है तो गंभीर हादसा हो सकता है। इसी वजह से मंदिर बंद रखने का फैसला फिलहाल जारी है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि मंदिर बंद रहने से धार्मिक पर्यटन पर भी असर पड़ा है। आसपास की दुकानें, प्रसाद विक्रेता, छोटे होटल और वाहन चालक श्रद्धालुओं की आवाजाही पर निर्भर रहते हैं। मंदिर बंद होने के कारण उनके कारोबार पर भी प्रभाव पड़ रहा है।

श्रद्धालुओं की मांग है कि जांच प्रक्रिया जल्द पूरी की जाए और मंदिर की सुरक्षा सुनिश्चित करने के बाद दर्शन व्यवस्था बहाल की जाए। लोगों का कहना है कि यदि मंदिर खोलने में समय लगने वाला है तो प्रशासन को स्पष्ट जानकारी जारी करनी चाहिए, ताकि बाहर से आने वाले श्रद्धालु अपनी यात्रा की योजना उसी हिसाब से बना सकें।

फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता गुफा के भीतर किसी भी संभावित खतरे का आकलन करना है। विशेषज्ञ टीम की रिपोर्ट आने के बाद ही मंदिर को दोबारा खोलने को लेकर फैसला होगा। तब तक गुप्त गोदावरी मंदिर की पहली गुफा में श्रद्धालुओं का प्रवेश बंद रहेगा और सुरक्षा व्यवस्था जारी रहेगी।

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