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मध्य प्रदेश
अग्निवीर भर्ती में फर्जीवाड़ा, ग्वालियर में यूपी के 13 अभ्यर्थी पकड़े
Ashish verma
8 Oct 2026 8:08 PM IST

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ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर में भारतीय सेना की अग्निवीर भर्ती प्रक्रिया के दौरान बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। सेना में भर्ती होने की चाह में उत्तर प्रदेश के 13 अभ्यर्थियों ने कथित तौर पर अपनी पहचान ही बदल डाली। इन युवकों ने भर्ती के लिए निर्धारित अधिकतम आयु सीमा पार होने के बाद फर्जी मार्कशीट और आधार कार्ड तैयार कराए। इतना ही नहीं, दस्तावेजों में अपना नाम, जन्मतिथि और पता तक बदल दिया। इसके बाद नई पहचान के आधार पर आवेदन करके भर्ती प्रक्रिया में शामिल होने ग्वालियर पहुंच गए। हालांकि बायोमेट्रिक जांच के दौरान उनकी चालाकी पकड़ ली गई। सेना के अधिकारियों ने दस्तावेजों की जांच की तो पूरा मामला सामने आ गया। अब इन अभ्यर्थियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।
आयु सीमा पार होने पर बनाया फर्जी दस्तावेजों का सहारा
जानकारी के अनुसार, पकड़े गए सभी 13 अभ्यर्थी उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इनमें पांच युवक आगरा जिले के बताए जा रहे हैं। ये अभ्यर्थी पहले भी भारतीय सेना की अग्निवीर भर्ती प्रक्रिया में हिस्सा ले चुके थे, लेकिन भर्ती नहीं हो पाए थे।
इस बार उनकी उम्र अग्निवीर भर्ती के लिए निर्धारित 22 वर्ष की अधिकतम सीमा से ज्यादा हो चुकी थी। इसके बावजूद सेना में भर्ती होने के उद्देश्य से उन्होंने कथित तौर पर नए दस्तावेज तैयार करा लिए। इन दस्तावेजों में उनकी वास्तविक जन्मतिथि के साथ नाम और पता भी बदला गया था।
इसके बाद अभ्यर्थियों ने इन्हीं दस्तावेजों का इस्तेमाल करके अग्निवीर भर्ती के लिए आवेदन किया। उन्हें उम्मीद थी कि बदली हुई पहचान के आधार पर वे भर्ती प्रक्रिया में शामिल हो सकेंगे, लेकिन तकनीकी जांच में उनकी पुरानी पहचान सामने आ गई।
फिंगरप्रिंट स्कैन होते ही खुल गया पूरा राज
ग्वालियर में अग्निवीर भर्ती के लिए शारीरिक परीक्षा आयोजित की जा रही थी। इस दौरान अभ्यर्थियों की पहचान सुनिश्चित करने के लिए बायोमेट्रिक परीक्षण किया गया।जब इन 13 युवकों के फिंगरप्रिंट मशीन में स्कैन किए गए तो उनका मिलान सेना के सिस्टम में पहले से उपलब्ध रिकॉर्ड से नहीं हुआ। इस गड़बड़ी के सामने आते ही सेना के अधिकारियों को दस्तावेजों और पहचान को लेकर संदेह हुआ।
इसके बाद अभ्यर्थियों द्वारा जमा की गई मार्कशीट और अन्य दस्तावेजों की जांच की गई। ऑनलाइन रिकॉर्ड से मिलान करने पर मार्कशीट में फर्जीवाड़ा सामने आया। जांच में पता चला कि अभ्यर्थियों ने पुरानी पहचान छिपाकर नई जानकारी के आधार पर आवेदन किया था।
पहले भी भर्ती प्रक्रिया में हो चुके थे शामिल
इस फर्जीवाड़े का खुलासा होने में सेना के पुराने डिजिटल रिकॉर्ड ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। दरअसल, संबंधित अभ्यर्थी पहले भी अग्निवीर भर्ती प्रक्रिया में हिस्सा ले चुके थे।उस समय उनके नाम और पहचान से संबंधित जानकारी सेना की आधिकारिक भर्ती वेबसाइट पर दर्ज हो गई थी। ऐसे में जब वे बदले हुए नाम और दस्तावेजों के साथ दोबारा भर्ती में पहुंचे, तो बायोमेट्रिक परीक्षण के दौरान उनका पुराना रिकॉर्ड सामने आ गया।
फिंगरप्रिंट एक महत्वपूर्ण पहचान संबंधी साक्ष्य होता है। दस्तावेजों में नाम या जन्मतिथि बदलने के बावजूद बायोमेट्रिक रिकॉर्ड के जरिए व्यक्ति की पिछली पहचान का पता लगाया जा सकता है।इसी तकनीकी व्यवस्था के कारण इन अभ्यर्थियों द्वारा प्रस्तुत जानकारी में गड़बड़ी सामने आई।
पूछताछ में अभ्यर्थियों ने बताई वजह
दस्तावेजों में गड़बड़ी सामने आने के बाद सेना के अधिकारियों ने संबंधित अभ्यर्थियों से पूछताछ की। पूछताछ के दौरान युवकों ने बताया कि उनकी उम्र अग्निवीर भर्ती की निर्धारित सीमा से अधिक हो गई थी।
इसी कारण उन्होंने भर्ती में शामिल होने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार कराने का रास्ता चुना। उन्होंने नए दस्तावेजों के आधार पर दोबारा आवेदन किया था।अधिकारियों के सामने अभ्यर्थियों की पिछली भर्ती से जुड़ी जानकारी भी मौजूद थी। ऐसे में उनकी ओर से प्रस्तुत की गई नई पहचान और पुराने रिकॉर्ड में अंतर स्पष्ट हो गया।फर्जी दस्तावेज जब्त, ब्लैकलिस्ट करने की कार्रवाई
ग्वालियर स्थित सेना भर्ती कार्यालय के निदेशक कर्नल पंकज कुमार ने बताया कि फर्जीवाड़ा करने वाले अभ्यर्थियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।सेना के अधिकारियों ने संबंधित अभ्यर्थियों के फर्जी दस्तावेज जब्त कर लिए हैं। इसके साथ ही उनके फिंगरप्रिंट रिकॉर्ड भी सुरक्षित रखे गए हैं।
अधिकारियों के अनुसार, इन अभ्यर्थियों के नाम भारतीय सेना की आधिकारिक भर्ती वेबसाइट पर ब्लैकलिस्ट किए जाएंगे। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वे भविष्य में किसी भी सैन्य भर्ती प्रक्रिया में दोबारा हिस्सा नहीं ले सकें।हालांकि अभ्यर्थियों की पुलिस गिरफ्तारी या उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज होने की पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं की गई है।
अग्निवीर भर्ती में दस्तावेजों की जांच बेहद महत्वपूर्ण
भारतीय सेना की अग्निवीर भर्ती प्रक्रिया में अभ्यर्थियों की पहचान, आयु और शैक्षणिक योग्यता का सत्यापन महत्वपूर्ण होता है। भर्ती में शामिल होने के लिए निर्धारित पात्रता शर्तों को पूरा करना अनिवार्य है।
अभ्यर्थियों को आवेदन करते समय अपनी सही व्यक्तिगत जानकारी दर्ज करनी होती है। शैक्षणिक प्रमाणपत्र, पहचान पत्र और अन्य आवश्यक दस्तावेजों में किसी भी तरह की जानबूझकर की गई हेराफेरी गंभीर मामला है।इस घटना ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि भर्ती प्रक्रियाओं में डिजिटल रिकॉर्ड और बायोमेट्रिक जांच की महत्वपूर्ण भूमिका है।
फर्जीवाड़े से योग्य अभ्यर्थियों के अवसर हो सकते हैं प्रभावित
सेना जैसी महत्वपूर्ण संस्था में भर्ती के दौरान दस्तावेजों की विश्वसनीयता बेहद जरूरी है। यदि कोई उम्मीदवार गलत पहचान या फर्जी शैक्षणिक प्रमाणपत्र के आधार पर चयन प्रक्रिया में शामिल होता है, तो इससे भर्ती की निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है।
ऐसी गतिविधियां निर्धारित नियमों का पालन करने वाले योग्य अभ्यर्थियों के अवसरों पर भी असर डाल सकती हैं। इसलिए भर्ती अधिकारियों द्वारा दस्तावेजों और पहचान का सत्यापन किया जाता है।ग्वालियर में सामने आए इस मामले में भी तकनीकी जांच के कारण पहचान संबंधी फर्जीवाड़ा पकड़ा गया।
भर्ती में शामिल होने वाले युवाओं के लिए चेतावनी
ग्वालियर की इस घटना ने सेना भर्ती की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए महत्वपूर्ण संदेश दिया है। भर्ती प्रक्रिया में निर्धारित आयु सीमा और अन्य पात्रता शर्तों का पालन करना आवश्यक है।फर्जी दस्तावेजों के आधार पर आवेदन करने से न केवल वर्तमान भर्ती में उम्मीदवारी समाप्त हो सकती है, बल्कि भविष्य के अवसरों से भी वंचित होना पड़ सकता है।
फिलहाल सेना के अधिकारियों ने सभी 13 अभ्यर्थियों के फर्जी दस्तावेज जब्त कर उनके बायोमेट्रिक रिकॉर्ड सुरक्षित कर लिए हैं। साथ ही उन्हें भविष्य की सैन्य भर्ती प्रक्रियाओं से प्रतिबंधित करने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है
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