बिहार

बिहार में नई उद्योग नीति लागू, 7000 उद्यमियों को मिली राशि

Ratna Netam
8 Oct 2026 7:59 PM IST
बिहार में नई उद्योग नीति लागू, 7000 उद्यमियों को मिली राशि
x
पटना। बिहार में औद्योगिक विकास को गति देने और युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण पहल की है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गुरुवार, 8 अक्टूबर को पटना के बापू सभागार में आयोजित कार्यक्रम के दौरान 'बिहार एमएसएमई नीति-2026' का शुभारंभ किया। इसके साथ ही मुख्यमंत्री उद्यमी योजना के तहत 7,000 से अधिक लाभार्थियों के बैंक खातों में विभिन्न किस्तों की राशि हस्तांतरित की गई। इस अवसर पर सरकार ने बिहार में निर्मित उत्पादों को सरकारी खरीद में प्राथमिकता देने की नीति पर भी जोर दिया। इसका उद्देश्य स्थानीय उद्योगों को प्रोत्साहित करना, रोजगार के नए अवसर तैयार करना और राज्य की अर्थव्यवस्था में छोटे तथा मध्यम उद्यमों की भागीदारी बढ़ाना है।
पटना के बापू सभागार में उद्योग विभाग की ओर से मुख्यमंत्री उद्यमी योजना के लाभार्थियों के लिए एक दिवसीय उन्मुखीकरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस दौरान वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए चयनित लाभार्थियों को सांकेतिक चेक प्रदान किए गए। इसके अतिरिक्त योजना की पहली, दूसरी और तीसरी किस्त प्राप्त करने वाले 7,000 से अधिक लाभार्थियों के खातों में राशि भेजी गई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार सरकार राज्य में उद्योगों का विस्तार करने और उद्यमियों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि युवाओं को केवल नौकरी तलाशने वाला नहीं, बल्कि रोजगार देने वाला बनाने की आवश्यकता है। इसके लिए छोटे, लघु और मध्यम उद्योगों को बढ़ावा दिया जा रहा है।
सम्राट चौधरी ने घोषणा की कि राज्य सरकार का लक्ष्य बिहार के एक करोड़ परिवारों को उद्यमिता से जोड़कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। उन्होंने कहा कि सरकार ऐसा वातावरण तैयार करना चाहती है, जिसमें युवाओं को अपना व्यवसाय स्थापित करने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर विकसित करने में सहायता मिल सके।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने 'बिहार परचेज प्रेफरेंस पॉलिसी' का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकारी खरीद में बिहार में तैयार होने वाले उत्पादों को प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने बताया कि इस व्यवस्था के माध्यम से राज्य के उद्यमियों को सरकारी खरीद में भाग लेने के अधिक अवसर उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, परचेज प्रेफरेंस व्यवस्था के तहत बिहार में निर्मित उत्पादों की 25 से 40 प्रतिशत तक सरकारी खरीद करने का प्रावधान रखा गया है। सरकार का उद्देश्य स्थानीय विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा देना और राज्य में बनने वाले सामान की मांग को मजबूत करना है।
उन्होंने कहा कि सरकारी ई-मार्केटप्लेस यानी GeM पोर्टल के माध्यम से सरकारी खरीद को व्यवस्थित करने की दिशा में काम किया जा रहा है। इसके लिए आवश्यक व्यवस्था और नीलामी प्रक्रिया का भी प्रावधान किया गया है। सरकार चाहती है कि स्थानीय उद्यमी अपने उत्पादों को सरकारी खरीद व्यवस्था से जोड़ सकें।
मुख्यमंत्री ने बताया कि बिहार में औद्योगिक निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार सार्वजनिक-निजी भागीदारी यानी पीपीपी मॉडल पर भी काम कर रही है। इस माध्यम से पांच लाख करोड़ रुपये के निवेश का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। सरकार का मानना है कि उद्योगों में निवेश बढ़ने से रोजगार के अवसरों का विस्तार करने में मदद मिलेगी।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने राज्य के सभी जिलों में स्थापित एमएसएमई केंद्रों का भी उद्घाटन किया। इन केंद्रों का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर उद्यमियों को सहायता और मार्गदर्शन उपलब्ध कराना है। इससे नए उद्यम स्थापित करने के इच्छुक लोगों को संबंधित सरकारी योजनाओं और औद्योगिक प्रक्रियाओं के बारे में जानकारी मिल सकेगी।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बिहार एमएसएमई नीति-2026 के साथ मुख्यमंत्री सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग क्लस्टर विकास योजना-2026 और सूक्ष्म एवं लघु उद्यम सुविधा परिषद नियमावली-2026 से संबंधित पुस्तिकाओं का भी विमोचन किया। कार्यक्रम में नई औद्योगिक नीति और मुख्यमंत्री उद्यमी योजना पर आधारित लघु फिल्मों का प्रदर्शन किया गया।
मुख्यमंत्री उद्यमी योजना के माध्यम से राज्य सरकार विभिन्न सामाजिक वर्गों और युवाओं को अपना उद्योग शुरू करने के लिए आर्थिक सहायता प्रदान कर रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि इस योजना के अंतर्गत कुल 45 हजार उद्यमियों को तैयार किया जा रहा है। इसके लिए राज्य सरकार लगभग 3,500 करोड़ रुपये खर्च कर रही है।
उन्होंने जानकारी दी कि इन उद्यमियों में 14 हजार अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग से, 10 हजार अत्यंत पिछड़ा वर्ग से, 9,500 महिला उद्यमी, 9 हजार युवा और 2,500 अल्पसंख्यक वर्ग से संबंधित हैं। सरकार का उद्देश्य विभिन्न वर्गों के लोगों को उद्यमिता के अवसर उपलब्ध कराना है।
कार्यक्रम शुरू होने से पहले मुख्यमंत्री ने उद्यमी योजना के लाभार्थियों द्वारा लगाए गए स्टॉलों का निरीक्षण किया। उन्होंने उद्यमियों से उनके उत्पादों, गुणवत्ता और बाजार में मांग को लेकर जानकारी प्राप्त की। इस दौरान उन्होंने स्थानीय उद्योगों की संभावनाओं और उद्यमियों के सामने मौजूद चुनौतियों को समझने का प्रयास किया।
सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार के विकास के लिए उद्योग, शिक्षा, रोजगार और बुनियादी ढांचे का विस्तार जरूरी है। उन्होंने बताया कि राज्य में 211 डिग्री कॉलेज खोले जा चुके हैं। सरकार अगले वर्ष से इन कॉलेजों में विज्ञान संकाय की पढ़ाई शुरू करने की दिशा में काम करेगी।
कार्यक्रम में राज्य की उद्योग एवं खेल मंत्री श्रेयसी सिंह, अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री मोहम्मद जमा खान, पिछड़ा एवं अत्यंत पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री रमा निषाद और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण मंत्री लखेंद्र कुमार रौशन सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के विकास का वास्तविक उद्देश्य समाज के सभी वर्गों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है। उन्होंने युवाओं और उद्यमियों से सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर अपने उद्योग स्थापित करने तथा राज्य के आर्थिक विकास में योगदान देने की अपील की।
बिहार सरकार की नई एमएसएमई नीति और खरीद प्राथमिकता व्यवस्था से स्थानीय उद्योगों के लिए नए अवसर विकसित करने की योजना है। हालांकि, इन नीतियों का वास्तविक प्रभाव उनके क्रियान्वयन, उद्यमियों की भागीदारी और बाजार में उपलब्ध अवसरों पर निर्भर करेगा।
फिलहाल मुख्यमंत्री उद्यमी योजना के तहत 7,000 से अधिक लाभार्थियों को किस्तों का भुगतान, सभी जिलों में एमएसएमई केंद्रों का उद्घाटन और बिहार एमएसएमई नीति-2026 की शुरुआत राज्य सरकार के औद्योगिक विकास कार्यक्रम के प्रमुख कदम हैं। सरकार ने स्थानीय उत्पादों को सरकारी खरीद में प्राथमिकता देकर बिहार में विनिर्माण और स्वरोजगार को बढ़ावा देने का लक्ष्य रखा है।
Next Story