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जबलपुर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग और आय से अधिक संपत्ति के चर्चित मामले में पूर्व क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) कॉन्स्टेबल सौरभ शर्मा को बड़ी राहत देते हुए जमानत प्रदान कर दी है। मंगलवार को हाई कोर्ट की जबलपुर खंडपीठ ने उनकी तीसरी जमानत याचिका स्वीकार कर ली। न्यायालय के इस फैसले के बाद लंबे समय से चल रहे इस मामले में सौरभ शर्मा को महत्वपूर्ण कानूनी राहत मिली है।
यह आदेश मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की जबलपुर बेंच के न्यायमूर्ति अजय कुमार निरंकारी ने पारित किया। अदालत ने मामले में दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। बाद में न्यायालय ने सौरभ शर्मा की तीसरी जमानत अर्जी मंजूर करते हुए उन्हें सशर्त जमानत देने का आदेश जारी किया।
सौरभ शर्मा का नाम मनी लॉन्ड्रिंग और आय से अधिक संपत्ति के मामले में सामने आने के बाद जांच एजेंसियों ने उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू की थी। उन पर आरोप है कि उन्होंने अपनी ज्ञात आय के स्रोतों से कहीं अधिक संपत्ति अर्जित की और वित्तीय लेन-देन में अनियमितताएं कीं। इसी मामले में उनके खिलाफ विभिन्न जांच एजेंसियां जांच कर रही हैं।
इससे पहले सौरभ शर्मा ने दो बार जमानत के लिए अदालत का रुख किया था, लेकिन उन्हें राहत नहीं मिल सकी थी। तीसरी बार दाखिल की गई जमानत याचिका पर विस्तृत सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने उन्हें जमानत देने का फैसला सुनाया।
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने अदालत के समक्ष कई कानूनी और तथ्यात्मक तर्क रखे। उन्होंने कहा कि जांच में सहयोग किया गया है और लंबे समय तक न्यायिक हिरासत में रहने के कारण जमानत दी जानी चाहिए। वहीं, दूसरी ओर जांच एजेंसियों की ओर से जमानत का विरोध करते हुए मामले की गंभीरता का हवाला दिया गया।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने पहले अपना फैसला सुरक्षित रखा। बाद में न्यायमूर्ति अजय कुमार निरंकारी की एकल पीठ ने आदेश जारी करते हुए सौरभ शर्मा की जमानत याचिका स्वीकार कर ली।
यह मामला पिछले कुछ समय से मध्य प्रदेश में काफी चर्चा का विषय रहा है। जांच एजेंसियों ने आरोप लगाया था कि सौरभ शर्मा के पास उनकी वैध आय से कहीं अधिक संपत्ति मौजूद है। इसके अलावा उन पर मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े आरोप भी लगाए गए, जिनकी जांच प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) सहित संबंधित एजेंसियों द्वारा की जा रही है।
आय से अधिक संपत्ति के मामलों में जांच एजेंसियां आमतौर पर आरोपी की चल और अचल संपत्तियों, बैंक खातों, निवेश, वित्तीय लेन-देन और अन्य दस्तावेजों की विस्तृत जांच करती हैं। इसी प्रक्रिया के तहत इस मामले में भी विभिन्न पहलुओं की जांच जारी है।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि जमानत मिलने का अर्थ यह नहीं होता कि आरोपी आरोपों से मुक्त हो गया है। जमानत केवल मुकदमे के दौरान आरोपी को निर्धारित शर्तों के साथ रिहा किए जाने की कानूनी प्रक्रिया है। मामले की सुनवाई और जांच आगे भी जारी रहेगी तथा अंतिम निर्णय साक्ष्यों और अदालत में प्रस्तुत तथ्यों के आधार पर होगा।
हाई कोर्ट के आदेश के बाद सौरभ शर्मा को निर्धारित शर्तों का पालन करना होगा। यदि वे अदालत द्वारा तय शर्तों का उल्लंघन करते हैं तो जमानत निरस्त भी की जा सकती है। अदालत ने अपने आदेश में संबंधित कानूनी प्रावधानों के अनुरूप आवश्यक शर्तें लागू की हैं।
इस मामले पर प्रदेशभर में लंबे समय से नजर बनी हुई थी क्योंकि यह कथित आर्थिक अनियमितताओं और आय से अधिक संपत्ति से जुड़े प्रमुख मामलों में शामिल है। हाई कोर्ट द्वारा जमानत दिए जाने के बाद अब आगे की न्यायिक प्रक्रिया पर सभी की निगाहें टिकी हैं।
फिलहाल जांच एजेंसियां अपनी जांच जारी रखेंगी और आरोपपत्र, साक्ष्य तथा अन्य कानूनी प्रक्रियाओं के आधार पर मामले की सुनवाई आगे बढ़ेगी। वहीं, सौरभ शर्मा को हाई कोर्ट से मिली इस राहत के बाद उनके पक्ष ने फैसले का स्वागत किया है, जबकि मामले में अंतिम निर्णय अदालत की आगामी सुनवाई के बाद ही सामने आएगा।





