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मध्य प्रदेश में मत्स्य पालन को मिलेगा उद्योग का दर्जा, CM मोहन यादव का बड़ा ऐलान

भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार ने मत्स्य पालन क्षेत्र को उद्योग के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को भोपाल में आयोजित राष्ट्रीय मत्स्य निवेशक एवं निर्यातक सम्मेलन-2026 में कहा कि प्रदेश सरकार मत्स्य पालन को खाद्य प्रसंस्करण और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) से जोड़कर आर्थिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बनाना चाहती है। सरकार की योजना इस क्षेत्र को उद्योग के समान प्रोत्साहन और सुविधाएं उपलब्ध कराने की है, जिससे मत्स्य पालकों की आय बढ़ाने के साथ निवेश, निर्यात और रोजगार के नए अवसर पैदा किए जा सकें।
भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में आयोजित सम्मेलन में मुख्यमंत्री ने मत्स्य पालन के क्षेत्र में निजी निवेश आकर्षित करने और निर्यात की संभावनाएं
मत्स्य पालन को उद्योग के रूप में विकसित करेगी सरकार
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश में उपलब्ध जल संसाधनों का बेहतर उपयोग करके मत्स्य पालन को राज्य की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया जा सकता है। इसके लिए सरकार उत्पादन बढ़ाने के साथ आधुनिक तकनीक, प्रसंस्करण और विपणन सुविधाओं के विस्तार पर ध्यान दे रही है।
उन्होंने कहा कि मत्स्य पालन को केवल पारंपरिक आजीविका तक सीमित रखने के बजाय व्यावसायिक गतिविधि के रूप में विकसित करने की आवश्यकता है। इससे मत्स्य पालकों को बड़े बाजारों तक पहुंचने का अवसर मिलेगा और उनकी आमदनी बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
सरकार मत्स्य पालन को खाद्य प्रसंस्करण उद्योग और एमएसएमई क्षेत्र से जोड़ने की दिशा में काम करेगी। इससे मछली उत्पादन से जुड़े छोटे उद्यमियों को भी औद्योगिक विकास की योजनाओं का लाभ दिलाने की संभावनाएं बढ़ेंगी।
हालांकि, उद्योग का औपचारिक दर्जा देने और उससे संबंधित प्रोत्साहनों के लिए विस्तृत सरकारी आदेश तथा पात्रता संबंधी नियम महत्वपूर्ण होंगे।
मुख्यमंत्री ने जारी की नई निवेश एवं निर्यात मार्गदर्शिका
सम्मेलन के दौरान मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मध्य प्रदेश मत्स्य निवेश एवं निर्यात दिशानिर्देश-2026 जारी किए। इस पहल का उद्देश्य मत्स्य पालन के विभिन्न क्षेत्रों में निवेश को प्रोत्साहित करना है।
मार्गदर्शिका में मछली के बीज और आहार के उत्पादन, जलाशयों में मत्स्य पालन, प्रसंस्करण इकाइयों, कोल्ड स्टोरेज, परिवहन और निर्यात बाजारों तक पहुंच बढ़ाने पर जोर दिया गया है।
इसके माध्यम से निजी निवेशकों और उद्यमियों को मत्स्य क्षेत्र की संभावनाओं की जानकारी उपलब्ध कराने की योजना है।
केंद्र सरकार के मत्स्य पालन विभाग के अनुसार, इस सम्मेलन का प्रमुख उद्देश्य उत्पादन को प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और निर्यात से जोड़कर मत्स्य पालकों को बेहतर आर्थिक अवसर उपलब्ध कराना है।
राष्ट्रीय सम्मेलन में केंद्रीय मंत्री भी हुए शामिल
राष्ट्रीय मत्स्य निवेशक एवं निर्यातक सम्मेलन में केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह और केंद्रीय राज्य मंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल भी शामिल हुए।
कार्यक्रम में मध्य प्रदेश सरकार के मत्स्य कल्याण एवं मत्स्य विकास विभाग के मंत्री नारायण सिंह पंवार सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, निवेशक, निर्यातक और मत्स्य पालन क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
सम्मेलन का आयोजन केंद्र और मध्य प्रदेश सरकार के मत्स्य पालन विभागों के संयुक्त प्रयास से किया गया।
इसमें मत्स्य क्षेत्र के उद्यमियों, स्टार्टअप, वित्तीय संस्थानों और अनुसंधान संगठनों के बीच सहयोग बढ़ाने के अवसरों पर चर्चा की गई।
चार लाख हेक्टेयर से अधिक जल क्षेत्र में संभावनाएं
मध्य प्रदेश में नदियों, तालाबों और बड़े जलाशयों के रूप में व्यापक जल संसाधन उपलब्ध हैं। केंद्र सरकार के अनुसार, राज्य में लगभग 4.50 लाख हेक्टेयर जल क्षेत्र है, जिसका मत्स्य पालन के लिए उपयोग किया जा सकता है।
राज्य के जल संसाधनों को देखते हुए आधुनिक मत्स्य पालन तकनीकों के विस्तार की पर्याप्त संभावनाएं हैं।
सरकार का प्रयास है कि जलाशयों में मत्स्य उत्पादन बढ़ाने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी तैयार किए जाएं।
इसके लिए केज कल्चर जैसी तकनीकों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इस तकनीक में जलाशयों के भीतर विशेष पिंजरों की सहायता से नियंत्रित वातावरण में मछली पालन किया जाता है।
निजी निवेश और निर्यात बढ़ाने पर विशेष जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि मत्स्य पालन क्षेत्र में निवेश बढ़ाने के लिए उत्पादन से लेकर बाजार तक की पूरी व्यवस्था को मजबूत करना जरूरी है।
सम्मेलन में मछली प्रसंस्करण इकाइयों, शीत भंडारण सुविधाओं और परिवहन व्यवस्था के विकास पर चर्चा की गई।
मत्स्य उत्पादन के बाद उचित भंडारण और बाजार तक समय पर पहुंच नहीं होने से उत्पादकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। ऐसे में कोल्ड चेन और परिवहन सुविधाओं का विकास महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
नई मार्गदर्शिका के माध्यम से निवेशकों को मछली पालन से जुड़े विभिन्न व्यवसायों में अवसर उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।
मत्स्य पालकों की आय बढ़ाने की तैयारी
राज्य सरकार की इस पहल का एक प्रमुख उद्देश्य छोटे मत्स्य पालकों की आय में वृद्धि करना है। ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में परिवार तालाबों और जलाशयों में मत्स्य पालन से आजीविका अर्जित करते हैं।
आधुनिक तकनीक, गुणवत्तापूर्ण मछली बीज, बेहतर आहार और प्रशिक्षण सुविधाओं की उपलब्धता से उत्पादन क्षमता बढ़ाई जा सकती है।
इसके अलावा मत्स्य पालकों को बाजारों और खरीदारों से सीधे जोड़ने की व्यवस्था विकसित करने पर भी जोर दिया गया है।
सम्मेलन में खरीदार-विक्रेता संवाद के माध्यम से स्थानीय उत्पादकों, निवेशकों और निर्यातकों के बीच संपर्क स्थापित करने के अवसर उपलब्ध कराए गए।
इससे मत्स्य पालकों को अपने उत्पादों के लिए नए बाजार खोजने में सहायता मिलने की उम्मीद है।
देश में मत्स्य उत्पादन और निर्यात में बढ़ोतरी
केंद्र सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में देश का कुल मत्स्य उत्पादन 197.75 लाख टन रहा। इसमें अंतर्देशीय मत्स्य पालन का योगदान 151.60 लाख टन था।
वहीं, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का समुद्री उत्पाद निर्यात 73,890 करोड़ रुपये दर्ज किया गया।
ये आंकड़े देश की अर्थव्यवस्था में मत्स्य पालन और इससे जुड़े कारोबार के बढ़ते महत्व को दर्शाते हैं।
मध्य प्रदेश जैसे अंतर्देशीय राज्यों के लिए आधुनिक प्रसंस्करण सुविधाएं और निर्यात बाजारों से संपर्क बढ़ाना आर्थिक विकास के नए अवसर पैदा कर सकता है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने का लक्ष्य
मध्य प्रदेश सरकार का मानना है कि मत्स्य पालन क्षेत्र का विस्तार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में सहायक हो सकता है।
इसके जरिए मछली उत्पादन, प्रसंस्करण, पैकेजिंग, भंडारण और परिवहन जैसे विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार के अवसर विकसित किए जा सकते हैं।
साथ ही, छोटे उद्यमियों और स्वयं सहायता समूहों को मत्स्य पालन से संबंधित व्यवसायों से जोड़ने की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार जल संसाधनों का बेहतर उपयोग करने और मत्स्य पालन को आर्थिक विकास का प्रमुख आधार बनाने की दिशा में लगातार प्रयास कर रही है।
सरकार की नई पहल से मत्स्य क्षेत्र में निवेश और निर्यात बढ़ने की उम्मीद है। हालांकि, इसका वास्तविक लाभ नई नीति के क्रियान्वयन, बुनियादी सुविधाओं के विकास और मत्स्य पालकों तक योजनाओं की पहुंच पर निर्भर करेगा।





