- Home
- /
- राज्य
- /
- मध्य प्रदेश
- /
- Raisen सहित 7 जिलों...
Raisen सहित 7 जिलों में इंजीनियरों का प्रदर्शन: जांच के नाम पर प्रताड़ना का आरोप
Raisen। सोमवार को सुबह से ही मप्र इंजीनियर संगठन के बैनर तले सैकड़ों इंजीनियरों ने सोमवार को जिला मुख्यालय के वीआईपी सर्किट हाउस में विरोध प्रदर्शन किया। यह विरोध प्रदर्शन केवल रायसेन तक सीमित नहीं था।बल्कि प्रदेश के 7 प्रमुख जिलों सिवनी, बुरहानपुर, उज्जैन, मुरैना और छतरपुर में भी इंजीनियरों ने कामकाज ठप कर अपना आक्रोश जताया। इस दौरान, उन्होंने नारेबाजी करते हुए जिले में चल रहे कामों की जांच करने जा रहे एक दल के वाहन को भी रोका।
इंजीनियरों ने प्रदेश सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि वे दिन-रात धरातल पर पसीना बहाते हैं।लेकिन सरकार उनकी ईमानदारी पर सवाल उठाती है। संगठन के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि सरकार खराब काम करने वाले ठेकेदारों से 'शॉर्टकट' कर लेती है।जबकि लापरवाही का सारा ठीकरा इंजीनियरों पर फोड़ा जाता है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि एक ही काम की बार-बार जांच कराकर इंजीनियरों को अनावश्यक दबाव में रखा जा रहा है। इसके अलावा, प्रदेश में 600 से अधिक इंजीनियरों के पद खाली पड़े हैं। स्टाफ की कमी और मॉनिटरिंग के लिए वाहनों की अनुपलब्धता के बावजूद उनसे शत-प्रतिशत परिणाम की उम्मीद की जाती है।मामले को शांत करने के लिए एमपीआरडीसी और अन्य विभागों के चीफ इंजीनियर मौके पर पहुंचे। एमपीआरडीसी के चीफ इंजीनियर राकेश जैन, वीके सूत्रकार ने मीडिया से चर्चा में कहा कि जांच करना एक नियमित प्रक्रिया है। ताकि गुणवत्ता बनी रहे। उन्होंने भरोसा दिलाया कि बातचीत के जरिए समस्या का समाधान निकाल लिया जाएगा और इंजीनियरों को हड़ताल पर नहीं जाना चाहिए।
हम गुणवत्ता से नहीं करते समझौता...
इंजीनियर संगठन के प्रतिनिधियों ने अपनी बात दोहराते हुए कहा, "हम गुणवत्ता से समझौता नहीं करते।, लेकिन जांच के नाम पर प्रताड़ना बर्दाश्त नहीं होगी। बिना स्टाफ और बिना गाड़ी के मॉनिटरिंग करना नामुमकिन है।"इस विरोध प्रदर्शन में पीडब्ल्यूडी और एमपीआरडीसी जैसी तमाम निर्माण एजेंसियों के एसडीओ , सहायक इंजीनियर और चीफ इंजीनियर स्तर के अधिकारी शामिल हैं। यदि यह गतिरोध जल्द नहीं सुलझा, तो प्रदेश में चल रहे सड़कों और इमारतों के निर्माण कार्य बुरी तरह प्रभावित हो सकते हैं।





