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इंदौर। एयरपोर्ट और रेलवे स्टेशनों पर सुरक्षा जांच सख्त होने के बाद ड्रग तस्करों द्वारा कम निगरानी वाले परिवहन साधनों का इस्तेमाल किए जाने का मामला सामने आया है। जांच एजेंसियों की नजर अब शहरों और राज्यों के बीच चलने वाली स्लीपर बसों पर है। मध्य प्रदेश का भोपाल-इंदौर कॉरिडोर भी जांच के दायरे में आया है। डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (DRI) ने हाल ही में इंदौर में एक कथित ड्रग नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए एक नाइजीरियाई महिला के पास से करीब 1.19 करोड़ रुपये मूल्य के नशीले पदार्थ जब्त किए हैं।
जब्त नशीले पदार्थों में एम्फेटामाइन, MDMA और प्रीमियम गांजा शामिल बताया गया है। शुरुआती जांच में अंतरराज्यीय स्लीपर बसों के जरिए ड्रग्स को एक शहर से दूसरे शहर तक पहुंचाने की बात सामने आने के बाद एजेंसियां इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और संभावित रूट की जांच कर रही हैं।
भोपाल-इंदौर कॉरिडोर जांच के दायरे में
जांच एजेंसियों के मुताबिक एयरपोर्ट और रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों तथा सामान की नियमित सुरक्षा जांच होती है। बैगेज स्कैनर, मेटल डिटेक्टर और निगरानी व्यवस्था के कारण प्रतिबंधित वस्तुओं के साथ यात्रा करने पर पकड़े जाने का खतरा ज्यादा रहता है।
ऐसे में ड्रग तस्कर कथित तौर पर उन परिवहन साधनों की तरफ रुख कर रहे हैं, जहां यात्रियों के सामान की जांच अपेक्षाकृत सीमित होती है।
इंदौर और भोपाल के बीच बड़ी संख्या में निजी और अंतरराज्यीय बसें चलती हैं। इस कारण अब इस कॉरिडोर पर जांच एजेंसियों की नजर बढ़ गई है।
स्लीपर बसों का इस्तेमाल क्यों?
लंबी दूरी की स्लीपर बसों में यात्रियों को अपने साथ बैग और अन्य सामान ले जाने की सुविधा होती है। कई बसों में सामान नीचे बने लगेज कंपार्टमेंट में रखा जाता है, जबकि छोटे बैग यात्री अपने साथ स्लीपर सीट तक ले जाते हैं।
रेलवे स्टेशनों और हवाई अड्डों के विपरीत बस टर्मिनलों पर प्रत्येक यात्री के सामान की अनिवार्य स्कैनिंग की व्यवस्था आमतौर पर नहीं होती।
जांच एजेंसियों को आशंका है कि इसी कमी का फायदा उठाकर ड्रग तस्कर नशीले पदार्थों को एक शहर से दूसरे शहर तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं।
नाइजीरियाई महिला से बड़ी बरामदगी
DRI की हालिया कार्रवाई में एक नाइजीरियाई महिला को पकड़े जाने की जानकारी सामने आई है। उसके पास से एम्फेटामाइन, MDMA और प्रीमियम गांजा बरामद किया गया।
जब्त किए गए नशीले पदार्थों की अनुमानित कीमत करीब 1.19 करोड़ रुपये बताई गई है।
एक ही व्यक्ति के पास अलग-अलग तरह के नशीले पदार्थ मिलने के बाद जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि महिला किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा थी या नहीं।
इसके साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि नशीले पदार्थ कहां से लाए गए थे और इन्हें किसे सौंपा जाना था।
नेटवर्क के दूसरे सदस्यों की तलाश
ऐसे मामलों में ड्रग्स ले जाने वाले व्यक्ति के अलावा सप्लायर और खरीदार की पहचान करना जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है।
DRI की जांच में महिला के संपर्कों, यात्रा के रास्ते और उससे जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की पड़ताल की जा सकती है। मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड भी नेटवर्क तक पहुंचने में महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।
एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर सकती हैं कि इसी तरीके से पहले कितनी बार नशीले पदार्थों की खेप पहुंचाई गई।
एम्फेटामाइन और MDMA की तस्करी पर चिंता
एम्फेटामाइन और MDMA सिंथेटिक ड्रग्स की श्रेणी में आते हैं। इनकी अवैध खरीद-बिक्री और तस्करी पर कानून के तहत सख्त कार्रवाई का प्रावधान है।
ऐसे नशीले पदार्थों की बरामदगी के मामलों में एजेंसियां उनके स्रोत का पता लगाने की कोशिश करती हैं। यह जांचना भी महत्वपूर्ण होता है कि ड्रग्स देश के भीतर तैयार किए गए या किसी अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के माध्यम से पहुंचाए गए।
नाइजीरियाई महिला की गिरफ्तारी के बाद इस मामले में अंतरराष्ट्रीय संपर्कों की संभावना की भी जांच की जा सकती है, हालांकि जांच पूरी होने तक किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की मौजूदगी को स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता।
प्रीमियम गांजा भी हुआ जब्त
महिला के पास से सिंथेटिक ड्रग्स के साथ प्रीमियम गांजा मिलने की भी जानकारी है। इससे एजेंसियों के सामने एक से अधिक तरह के नशीले पदार्थों की सप्लाई से जुड़े नेटवर्क की संभावना की जांच का सवाल खड़ा हुआ है।
अलग-अलग प्रकार के ड्रग्स की बरामदगी से यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि इन्हें किन ग्राहकों तक पहुंचाया जाना था।
जांच एजेंसियां जब्त पदार्थों की मात्रा और उनकी वास्तविक प्रकृति की पुष्टि के लिए फोरेंसिक जांच भी करा सकती हैं।
बस ऑपरेटरों के लिए भी चुनौती
अंतरराज्यीय बसों का इस्तेमाल कथित रूप से ड्रग तस्करी में होने की जानकारी सामने आने के बाद बस ऑपरेटरों के लिए भी सतर्कता बढ़ाने की जरूरत सामने आई है।
लंबी दूरी की बसों में रोजाना सैकड़ों यात्री यात्रा करते हैं। ऐसे में प्रत्येक यात्री और सामान की पहचान रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
टिकट बुकिंग के दौरान सही पहचान की जानकारी, संदिग्ध सामान की सूचना और बस स्टाफ को जागरूक करने जैसे कदम निगरानी व्यवस्था को बेहतर करने में मदद कर सकते हैं।
एयरपोर्ट और रेलवे स्टेशन से बचने की कोशिश
जांच एजेंसियों के मुताबिक एयरपोर्ट और प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर CCTV कैमरे, सुरक्षा बल, बैगेज स्कैनर और अन्य निगरानी व्यवस्था मौजूद रहती है।
इन स्थानों पर संदिग्ध गतिविधि पकड़े जाने की संभावना ज्यादा होती है। इसके विपरीत निजी बसों और छोटे बस स्टॉप पर सुरक्षा व्यवस्था हर जगह समान नहीं होती।
यही वजह है कि कम निगरानी वाले रास्ते तस्करों के लिए आकर्षक विकल्प बन सकते हैं।
मध्य प्रदेश में नेटवर्क की कड़ियां तलाश रही एजेंसियां
इंदौर में हुई कार्रवाई के बाद जांच का दायरा केवल एक आरोपी तक सीमित रहने की संभावना कम है। एजेंसियां इस बात की जांच कर रही हैं कि नशीले पदार्थ किस स्थान से आए और मध्य प्रदेश में किन लोगों तक पहुंचाए जाने थे।
भोपाल-इंदौर कॉरिडोर पर विशेष ध्यान इसलिए भी है क्योंकि दोनों शहरों के बीच सड़क मार्ग से बड़ी संख्या में लोग नियमित यात्रा करते हैं।
यदि जांच में अन्य शहरों से संपर्क सामने आते हैं तो कार्रवाई का दायरा और बढ़ सकता है।
बस यात्रियों की सुरक्षा भी महत्वपूर्ण
ड्रग तस्करी के लिए सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल सामान्य यात्रियों के लिए भी चिंता का विषय है। किसी यात्री के सामान का गलत तरीके से इस्तेमाल होने या अनजान पैकेट ले जाने जैसी परिस्थितियां कानूनी परेशानी पैदा कर सकती हैं।
यात्रियों को किसी अजनबी का सामान या पैकेट अपने साथ ले जाने से बचना चाहिए। संदिग्ध सामान दिखाई देने पर बस स्टाफ या संबंधित अधिकारियों को सूचना देना बेहतर होता है।
जांच से खुल सकती हैं और कड़ियां
DRI की कार्रवाई में करीब 1.19 करोड़ रुपये के एम्फेटामाइन, MDMA और प्रीमियम गांजे की बरामदगी के बाद अब इस कथित नेटवर्क की अन्य कड़ियों की तलाश महत्वपूर्ण हो गई है।
जांच एजेंसियों का फोकस यह पता लगाने पर रहेगा कि क्या स्लीपर बसों के जरिए लंबे समय से नशीले पदार्थों की सप्लाई की जा रही थी और इस नेटवर्क में कितने लोग शामिल हैं।
फिलहाल इंदौर की कार्रवाई ने सार्वजनिक परिवहन के एक ऐसे हिस्से की ओर ध्यान खींचा है जहां सुरक्षा जांच एयरपोर्ट और रेलवे स्टेशनों की तुलना में सीमित रहती है। भोपाल-इंदौर कॉरिडोर के जांच के दायरे में आने के बाद आने वाले दिनों में अंतरराज्यीय बसों और उनके यात्रियों के सामान पर निगरानी बढ़ सकती है।





