मध्य प्रदेश

वन्य जीवों पर संकट: गर्मी के मौसम में प्यास बुझाने वन्यप्राणियों के सामने खड़ा हुआ संकट

Gulabi Jagat
19 April 2025 6:27 PM IST
वन्य जीवों पर संकट: गर्मी के मौसम में प्यास बुझाने वन्यप्राणियों के सामने खड़ा हुआ संकट
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Raisen। अप्रैल के महीने में पड़ रही भीषण गर्मी के मौसम में इंसान पानी के लिए दर- दर भटकने के मजबूर हैं तो जंगल में निवास करने वाले वन्यप्राणियों के सामने क्या स्थिति बनती होगी आप खुद ही समझ सकते हैं। वही जब जंगल में मौजूद पोखर, झिरियां सूख जाए तो बेजुबान वन्यप्राणी कैसे अपनी प्यास बुझाएंगे अंदाजा लगाना मुश्किल है। ऐसी स्थिति क्षेत्र में देखी जा सकती है।
सामान्य वन मण्डल रायसेन के पूर्व वनरेंज के अमरावद सांचेत तौर अंधेर याकूबपुर कानपोहरा सिरसौदा नरवर तिकोदा सहित पश्चमी वनरेंज के राजीवनगर पीपल खिरिया सेहतगंज रतनपुर बुद्धा गोपीसुर सतकुंडा नयापुरा अगरिया बिलार खोह, खरबई ,दीवानगंज छातई वनविकास निगम और वन विभाग के जंगल में प्राकृतिक जल स्रोत के सूखने से वन्य प्राणी पानी के लिए भटकने लगे हैं। वन्य प्राणी अब भूखे प्यासे रहवासी बस्तियों की तरफ रुख करने लगे हैं।वन महकमे के अधिकारी इन सब बातों से फिलहाल बेखबर हैं।पिछले साल की तरह इस साल भी यह वन्यप्राणी भटकते हुए रहवासी एरिया की तरफ रूख करने लगे हैं। इससे न सिर्फ वन्यप्राणियों की जान को खतरा है, बल्कि यह आम व्यक्ति और मवेशियों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिम्मेदार अधिकारियों को सुध लेना चाहिए।कमोवेश यही हालत गढ़ी वनरेंज की बनी हुई है।



कारगार साबित नहीं हुआ....
बताया जाता है कि वन विकास निगम और वन विभाग की तरफ स कुछ साल पहले वन्यप्राणियों को पानी उपलब्ध कराने अस्थाई पोखर, टंकी बनाकर टैंकर से पानी संरक्षित करने का प्लान था।लेकिन यह कारगार साबित नहीं हुआ है। कुछ जगह तालाब, स्टॉप डैम का निर्माण हुआ तो काम ठीक से नहीं होने से हकीकत सामने आ गई। इससे जो फायदा मिलना चाहिए था वह नहीं मिल सका।इस संबंध में डीएफओ विजय कुमार और एसडीओ सुधीर पटले गढ़ी रेंजर धिरेन्द्र पांडेय का कहना है कि बजट का अभाव है।
फंड नहीं मिला है....
अफसरों से इस बारे में जब बात की गई तो बताया गया कि वन्यप्राणियों के लिए पानी के इंतजाम करने अलग से कोई फंड नहीं मिला है। पानी डालने के लिए टैंकरों आवश्यकता होती है। इसके चलते जंगल के जानवर प्यास बुझाने के लिए भटक रहे हैं।फिलहाल जंगलों में मौजूद पोखर सूख गए हैं।
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