मध्य प्रदेश

इंदौर की सफाई व्यवस्था पर संकट, कर्मचारियों की 5 दिन की हड़ताल शुरू

Kavita2
6 Oct 2026 10:42 AM IST
इंदौर की सफाई व्यवस्था पर संकट, कर्मचारियों की 5 दिन की हड़ताल शुरू
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इंदौर। देशभर में अपनी सफाई व्यवस्था के लिए पहचान बना चुके इंदौर के सामने अब बड़ा संकट खड़ा हो गया है। नगर निगम के सफाई कर्मचारियों ने अपनी लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर सोमवार से पांच दिन की हड़ताल शुरू कर दी है। कर्मचारी संगठनों ने साफ चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो मंगलवार से शहर में सफाई का काम पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा।

हड़ताल के पहले दिन सैकड़ों सफाई कर्मचारी इंदौर नगर निगम मुख्यालय पर जुटे। कर्मचारियों ने अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी की और निगम कमिश्नर कार्यालय के बाहर दो घंटे से ज्यादा समय तक धरना दिया। प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि नगर निगम कमिश्नर स्वयं बाहर आकर उनका ज्ञापन स्वीकार करें, लेकिन काफी इंतजार के बावजूद कोई वरिष्ठ अधिकारी उनसे मिलने नहीं पहुंचा।

अधिकारियों के बाहर नहीं आने से प्रदर्शनकारियों में नाराजगी और बढ़ गई। कर्मचारियों का कहना था कि वे लंबे समय से अपनी समस्याएं और मांगें प्रशासन के सामने रख रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है। यही कारण है कि उन्हें हड़ताल जैसा कदम उठाना पड़ा।

विरोध प्रदर्शन के दौरान महिला सफाई कर्मचारियों ने भी अनोखे तरीके से अपना गुस्सा जाहिर किया। कई महिला कर्मचारियों ने अपनी चूड़ियां उतारकर अधिकारियों के कमरों के गेट के बाहर फेंक दीं। इसे उन्होंने सांकेतिक विरोध बताया और कहा कि अगर प्रशासन उनकी बात नहीं सुनता तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

कर्मचारी संगठनों का कहना है कि उनकी मांगें नई नहीं हैं। वे लंबे समय से सेवा शर्तों, वेतन, स्थायीकरण, पदोन्नति, सुरक्षा और अन्य सुविधाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर अधिकारियों से बातचीत करते रहे हैं। बावजूद इसके कोई स्थायी समाधान नहीं निकला। यूनियन नेताओं ने आरोप लगाया कि हर बार केवल आश्वासन मिलता है, लेकिन जमीन पर कार्रवाई नहीं होती।

हड़ताल के कारण शहर की सफाई व्यवस्था पर सीधा असर पड़ने की आशंका है। इंदौर नगर निगम की सफाई व्यवस्था रोजाना हजारों कर्मचारियों की मेहनत पर निर्भर है। अगर मंगलवार से पूरी तरह काम बंद होता है तो कचरा उठाने, सड़कों की सफाई, सार्वजनिक स्थानों की सफाई और कचरा संग्रहण व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

इंदौर पिछले कई वर्षों से स्वच्छता के मामले में देश के अग्रणी शहरों में शामिल रहा है। शहर की सफाई व्यवस्था और कचरा प्रबंधन को राष्ट्रीय स्तर पर मॉडल के तौर पर देखा जाता है। ऐसे में सफाई कर्मचारियों की हड़ताल ने नगर निगम प्रशासन के लिए भी चुनौती बढ़ा दी है।

शहर के विभिन्न वार्डों में रोजाना डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण होता है। इसके अलावा मुख्य सड़कों, बाजार क्षेत्रों, सार्वजनिक स्थानों और कॉलोनियों में नियमित सफाई की जाती है। कर्मचारियों की अनुपस्थिति से अगर यह व्यवस्था बाधित होती है तो कुछ ही दिनों में शहर में कचरा जमा होने की स्थिति बन सकती है।

प्रदर्शनकारी कर्मचारियों ने साफ कर दिया है कि उनका आंदोलन केवल प्रतीकात्मक नहीं है। पांच दिन की हड़ताल का फैसला पहले ही लिया जा चुका है और जरूरत पड़ने पर इसे और आगे बढ़ाया जा सकता है। यूनियनों का कहना है कि जब तक प्रशासन उनकी मांगों पर लिखित और ठोस आश्वासन नहीं देता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

नगर निगम मुख्यालय पर प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने प्रशासन के रवैये पर भी नाराजगी जताई। उनका कहना था कि इतने बड़े पैमाने पर कर्मचारी मुख्यालय पर पहुंचे, फिर भी कोई वरिष्ठ अधिकारी बातचीत के लिए सामने नहीं आया। इससे कर्मचारियों में यह संदेश गया कि उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा।

महिला कर्मचारियों के सांकेतिक विरोध ने पूरे प्रदर्शन का ध्यान अपनी ओर खींचा। चूड़ियां उतारकर फेंकने को उन्होंने प्रशासन की निष्क्रियता के खिलाफ विरोध का प्रतीक बताया। महिलाओं का कहना था कि सफाई व्यवस्था संभालने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण है, लेकिन उनकी समस्याओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा।

हड़ताल का असर केवल नगर निगम पर नहीं बल्कि आम नागरिकों पर भी पड़ सकता है। बाजार, कॉलोनियां, सार्वजनिक स्थल और व्यावसायिक क्षेत्र अगर नियमित सफाई से वंचित रहते हैं तो कचरा जमा होने, दुर्गंध फैलने और स्वच्छता संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं।

त्योहारी और सामान्य गतिविधियों के बीच शहर में रोजाना बड़ी मात्रा में कचरा निकलता है। ऐसे में सफाई का काम पूरी तरह बंद होना स्वास्थ्य और स्वच्छता दोनों के लिहाज से चुनौती बन सकता है। यही कारण है कि प्रशासन पर जल्द से जल्द बातचीत शुरू करने का दबाव बढ़ गया है।

कर्मचारी संगठनों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि मंगलवार से सफाई व्यवस्था पूरी तरह ठप की जा सकती है। यदि ऐसा होता है तो डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण और सड़क सफाई जैसी सेवाएं सबसे पहले प्रभावित होंगी।

वहीं नगर निगम प्रशासन की ओर से हड़ताल और कर्मचारियों की मांगों पर विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने का इंतजार है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि पांच दिन की हड़ताल के दौरान वैकल्पिक सफाई व्यवस्था किस तरह संचालित की जाएगी।

इंदौर की स्वच्छता पहचान को देखते हुए प्रशासन और कर्मचारियों के बीच जल्द बातचीत होना जरूरी माना जा रहा है। शहर की सफाई व्यवस्था बनाए रखने के लिए दोनों पक्षों के बीच समाधान निकलना आवश्यक है।

फिलहाल सफाई कर्मचारियों ने अपना आंदोलन शुरू कर दिया है और शहर की नजर अब नगर निगम प्रशासन के अगले कदम पर है। अगर मंगलवार से सफाई का काम पूरी तरह बंद होता है तो इंदौर की स्वच्छता व्यवस्था के सामने यह हाल के वर्षों की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बन सकती है।

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