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मध्य प्रदेश
मिलावटखोरों पर शिकंजा, 1.32 करोड़ का सामान नष्ट, 21 लाइसेंस सस्पेंड और 150 केस दर्ज
Rajeshwari Nishad
6 Nov 2026 4:23 PM IST

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भोपाल। दीपावली से पहले मध्य प्रदेश में खाद्य पदार्थों में मिलावट रोकने के लिए खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने बड़ा अभियान चलाया है। प्रदेशभर में एक महीने तक की गई छापेमारी और जांच के दौरान 35 हजार किलो से अधिक संदिग्ध खाद्य सामग्री जब्त की गई है। इसकी अनुमानित कीमत करीब 1 करोड़ 32 लाख रुपये बताई गई है। अभियान के तहत खाद्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करने वाले प्रतिष्ठानों के 21 लाइसेंस और पंजीयन निलंबित किए गए हैं, जबकि 150 प्रकरण दर्ज कर अदालतों में पेश किए गए हैं। इस कार्रवाई से त्योहार के दौरान खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।
जानकारी के मुताबिक, मुख्यमंत्री के निर्देश पर खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने 1 अक्टूबर से 1 नवंबर 2026 तक प्रदेश के विभिन्न जिलों में विशेष अभियान चलाया। इस दौरान मिठाई की दुकानों, डेयरियों, खाद्य सामग्री बनाने वाली इकाइयों, गोदामों और अन्य प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया गया। अधिकारियों ने दूध, मावा, पनीर, घी, खाद्य तेल, मिठाई, नमकीन और अन्य उत्पादों की गुणवत्ता जांचने के लिए नमूने एकत्र किए। जहां खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन की आशंका सामने आई, वहां सामग्री जब्त कर आवश्यक कार्रवाई की गई।
विभागीय आंकड़ों के अनुसार, अभियान के दौरान कुल 35,181 किलोग्राम खाद्य सामग्री जब्त की गई। इसके अलावा 2,243 नियामक नमूने और 2,607 निगरानी नमूने लिए गए। इस तरह करीब 4,850 नमूने एकत्र किए गए। वहीं, चलित खाद्य प्रयोगशालाओं के माध्यम से 6,107 नमूनों की जांच की गई। विभाग के आंकड़ों में नियमित, निगरानी और मोबाइल प्रयोगशाला की जांच को मिलाकर कुल 10,957 नमूने दर्ज हैं।अधिकारियों के मुताबिक, त्योहारों के दौरान मिठाइयों और डेयरी उत्पादों की मांग अचानक बढ़ जाती है। इसी का फायदा उठाकर कुछ कारोबारी गुणवत्ता से समझौता करते हैं। कम लागत में अधिक उत्पादन और मुनाफा कमाने के प्रयास में घटिया कच्चे माल या नियमों के विपरीत तैयार सामग्री के इस्तेमाल की आशंका रहती है। ऐसे उत्पाद लोगों की सेहत के लिए नुकसानदायक साबित हो सकते हैं। इसी कारण विभाग ने दीपावली से पहले निगरानी बढ़ाने का निर्णय लिया।
राजधानी भोपाल में भी खाद्य सुरक्षा विभाग की टीमों ने कार्रवाई की। यहां करीब 700 किलो संदिग्ध पनीर जब्त किया गया, जिसकी कीमत लगभग तीन लाख रुपये बताई गई है। त्योहार के दौरान पनीर की मांग होटलों, रेस्टोरेंट और मिठाई दुकानों में अधिक रहती है। ऐसे में बड़ी मात्रा में पनीर की जब्ती ने उसकी आपूर्ति और गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े किए हैं।ग्वालियर में लगभग 6.80 क्विंटल मावा जब्त किया गया। वहीं, भिंड जिले में अलग-अलग कार्रवाइयों के दौरान करीब 3,800 किलो मावा पकड़ा गया। मावा दीपावली पर बनने वाली बर्फी, पेड़ा और अन्य मिठाइयों का प्रमुख घटक है। इसकी अधिक मांग के कारण खाद्य सुरक्षा विभाग ने विशेष रूप से मावा तैयार करने और बेचने वाले प्रतिष्ठानों की जांच की।
मुरैना जिले में भी विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 3,000 किलो सोर्बिटोल जब्त किया। इसके अलावा लगभग 1,860 किलो मावा और मिल्क केक भी पकड़ा गया। हालांकि सोर्बिटोल का निर्धारित खाद्य उत्पादों में नियमों के अनुसार इस्तेमाल किया जा सकता है। इसलिए किसी सामग्री की जब्ती का अर्थ अपने आप में उसका मिलावटी साबित होना नहीं है। इसकी गुणवत्ता और वैध उपयोग का अंतिम निर्धारण संबंधित जांच के आधार पर किया जाएगा।धार जिले में लगभग 1,520 किलो रिफाइंड तेल जब्त किया गया। शिवपुरी में घी के एक बैच में सीसा मिलने की रिपोर्ट के आधार पर उसकी बिक्री पर प्रतिबंध लगाया गया। नर्मदापुरम में भी घी के छह ब्रांड से संबंधित बैचों पर प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किए गए। विभागीय कार्रवाई उत्पादों के संबंधित बैचों से जुड़ी है, इसलिए इसे उन कंपनियों के सभी उत्पादों पर प्रतिबंध नहीं माना जाना चाहिए।
मंदसौर में संदिग्ध मिलावटी दूध तैयार करने वाली डेयरी को सील किया गया। वहीं, सतना में मिठाई तैयार करने वाली दो इकाइयों के खिलाफ कार्रवाई हुई। छिंदवाड़ा में भी नियमों के उल्लंघन को लेकर दो रेस्टोरेंट सील किए जाने की जानकारी सामने आई है। इन कार्रवाइयों से स्पष्ट है कि विभाग की निगरानी केवल मिठाई की दुकानों तक सीमित नहीं रही, बल्कि खाद्य उत्पादन और आपूर्ति से जुड़े विभिन्न स्तरों तक पहुंची।खाद्य एवं औषधि प्रशासन के नियंत्रक मनोज पुष्प के अनुसार, विशेष अभियान में संदिग्ध सामग्री जब्त करने के साथ उसके नमूने जांच के लिए प्रयोगशालाओं में भेजे गए हैं। नियमों का उल्लंघन मिलने पर संबंधित प्रतिष्ठानों के खिलाफ प्रकरण दर्ज करने और लाइसेंस निलंबित करने की कार्रवाई की गई है। विभाग की ओर से उपभोक्ताओं को भी सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
विशेषज्ञों के अनुसार, मिलावटी या खराब खाद्य पदार्थों का सेवन करने से पेट दर्द, उल्टी, दस्त और खाद्य विषाक्तता जैसी समस्याएं हो सकती हैं। कुछ हानिकारक पदार्थ लंबे समय में स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाल सकते हैं। इसलिए त्योहारों पर मिठाइयों की खरीदारी करते समय केवल रंग, खुशबू और आकर्षक सजावट देखकर गुणवत्ता का अनुमान लगाना उचित नहीं है।खाद्य सुरक्षा विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि वे साफ-सुथरी और लाइसेंस प्राप्त दुकानों से ही खाद्य सामग्री खरीदें। पैक किए गए उत्पादों पर निर्माण तिथि, उपयोग की अंतिम तारीख, बैच नंबर और एफएसएसएआई लाइसेंस संख्या जरूर देखें। जिन पैकेटों पर तारीख मिटाई गई हो या दोबारा लेबल चिपकाया गया हो, उन्हें खरीदने से बचें। खरीदारी का बिल भी सुरक्षित रखें।
किसी खाद्य सामग्री की गुणवत्ता पर संदेह होने पर संबंधित जिले के खाद्य सुरक्षा अधिकारी से शिकायत की जा सकती है। उपभोक्ता फूड सेफ्टी कनेक्ट ऐप या हेल्पलाइन नंबर 1800-11-2100 के माध्यम से भी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।दीपावली से पहले मध्य प्रदेश में हुई इस व्यापक कार्रवाई ने खाद्य सुरक्षा को लेकर सतर्कता की आवश्यकता को रेखांकित किया है। हालांकि जब्त की गई सभी सामग्री को प्रयोगशाला जांच के अंतिम परिणाम से पहले मिलावटी घोषित करना उचित नहीं होगा। विभाग के सामने अब चुनौती संदिग्ध नमूनों की समयबद्ध जांच कराने, दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने और आम लोगों तक सुरक्षित खाद्य सामग्री पहुंचाने की है।
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