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उज्जैन में क्षिप्रा आरती को लेकर विवाद गहराया SKPS ने शुरू किया जल सत्याग्रह

उज्जैन। महाकालेश्वर मंदिर प्रबंधन समिति (MTMC) और श्री क्षेत्र पांडा समिति (SKPS) के बीच क्षिप्रा नदी की आरती को लेकर चल रहा 11 साल पुराना विवाद एक बार फिर गहरा गया है। राम घाट पर आरती को लेकर दोनों पक्षों के बीच मतभेद शनिवार को उस समय खुलकर सामने आ गया, जब SKPS ने पुलिस बल के इस्तेमाल के विरोध में क्षिप्रा नदी में जल सत्याग्रह शुरू कर दिया। शाम करीब चार बजे शुरू हुए इस सत्याग्रह के दौरान समिति के सदस्यों ने नदी में खड़े होकर अपना विरोध दर्ज कराया।
SKPS का कहना है कि राम घाट पर पिछले करीब 11 वर्षों से शाम 6.30 बजे क्षिप्रा आरती की परंपरा चली आ रही है। समिति का दावा है कि इसी परंपरा के तहत नियमित रूप से आरती आयोजित की जाती रही है। दूसरी ओर, MTMC की ओर से भी आरती आयोजित करने की तैयारी किए जाने के बाद शनिवार को राम घाट पर स्थिति तनावपूर्ण हो गई।
आरती को लेकर आमने-सामने आए दोनों पक्ष
जानकारी के अनुसार, महाकालेश्वर मंदिर प्रबंधन समिति ने 5 अगस्त को महाकाल पुलिस थाने और प्रशासन को पत्र भेजकर क्षिप्रा आरती के लिए सुरक्षा व्यवस्था और आवश्यक सामान उपलब्ध कराने की मांग की थी। इसके बाद शनिवार को MTMC के सदस्य महाकाल मंदिर के बटुकों के साथ शाम करीब पांच बजे राम घाट पहुंचे।
MTMC के सदस्यों और बटुकों के घाट पर पहुंचते ही SKPS के सदस्यों ने उन्हें आरती करने से रोक दिया। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच काफी देर तक गतिरोध बना रहा। मौके पर मौजूद लोगों और प्रशासन के लिए भी स्थिति को संभालना चुनौतीपूर्ण रहा।
SKPS के सदस्यों का कहना था कि राम घाट पर वर्षों से चली आ रही आरती की परंपरा को किसी नए तरीके से बदलने की कोशिश नहीं की जानी चाहिए। समिति ने पुलिस बल की मौजूदगी को लेकर भी आपत्ति जताई और इसी के विरोध में जल सत्याग्रह शुरू करने का निर्णय लिया।
दूसरी जगह की गई आरती
राम घाट पर SKPS सदस्यों द्वारा रोक दिए जाने के बाद MTMC के बटुकों ने उसी घाट पर दूसरी जगह आरती की। इस तरह शनिवार को एक ही राम घाट पर अलग-अलग स्थानों पर आरती आयोजित की गई।
घटना के दौरान दोनों पक्ष अपनी-अपनी धार्मिक परंपरा और अधिकार को लेकर अड़े रहे। इससे क्षिप्रा आरती को लेकर पहले से चला आ रहा विवाद और अधिक चर्चा में आ गया है।
11 साल पुरानी परंपरा का SKPS ने दिया हवाला
SKPS ने अपने विरोध के दौरान कहा कि राम घाट पर शाम 6.30 बजे होने वाली क्षिप्रा आरती पिछले 11 वर्षों से चली आ रही है। समिति के अनुसार, इस आरती से श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों की धार्मिक आस्था जुड़ी हुई है।
समिति का कहना है कि लंबे समय से चली आ रही परंपरा के बीच किसी अन्य संस्था की ओर से उसी स्थान पर अलग व्यवस्था के तहत आरती आयोजित करने का प्रयास उचित नहीं है। इसी मुद्दे को लेकर समिति ने अपना विरोध दर्ज कराया।
SKPS का आरोप है कि आरती के आयोजन के लिए पुलिस बल का इस्तेमाल किया जा रहा था। समिति ने इसी के विरोध में शनिवार शाम चार बजे से जल सत्याग्रह शुरू किया। सदस्यों ने क्षिप्रा नदी में खड़े होकर अपना विरोध जताया और अपनी मांगों की ओर प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया।
MTMC ने सुरक्षा और सामान के लिए भेजा था पत्र
दूसरी ओर, महाकालेश्वर मंदिर प्रबंधन समिति की ओर से 5 अगस्त को महाकाल पुलिस स्टेशन और प्रशासन को पत्र भेजे जाने की जानकारी सामने आई है। पत्र में आरती के आयोजन के लिए सुरक्षा व्यवस्था और आवश्यक सामान उपलब्ध कराने की मांग की गई थी।
इसके बाद MTMC के सदस्य बटुकों के साथ राम घाट पहुंचे। समिति की ओर से आरती आयोजित करने की तैयारी की गई थी। हालांकि, SKPS सदस्यों के विरोध के कारण उन्हें उसी स्थान पर आरती करने में बाधा का सामना करना पड़ा।
बाद में बटुकों ने राम घाट पर ही दूसरे स्थान पर आरती की। इससे यह स्पष्ट हो गया कि दोनों पक्ष इस धार्मिक आयोजन को लेकर अपने-अपने दावे पर कायम हैं।
प्रशासन के सामने चुनौती
क्षिप्रा आरती को लेकर दोनों समितियों के बीच बढ़ता विवाद प्रशासन के लिए भी चुनौती बन गया है। राम घाट उज्जैन के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है और यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में किसी भी तरह के विवाद से कानून व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका रहती है।
प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि धार्मिक आस्था से जुड़े इस मामले का समाधान बातचीत और सहमति के माध्यम से निकाला जाए। दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से चले आ रहे मतभेद को देखते हुए तत्काल समाधान आसान नहीं माना जा रहा है।
विवाद सुलझाने की जरूरत
क्षिप्रा आरती से जुड़ा विवाद अब केवल दो समितियों के बीच अधिकार का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि इससे श्रद्धालुओं की आस्था भी जुड़ी हुई है। ऐसे में प्रशासन और मंदिर प्रबंधन के लिए जरूरी होगा कि दोनों पक्षों से बातचीत कर ऐसा रास्ता निकाला जाए जिससे धार्मिक परंपरा भी बनी रहे और किसी तरह का टकराव भी न हो।
शनिवार को राम घाट पर हुए घटनाक्रम ने यह संकेत दिया है कि विवाद अभी खत्म नहीं हुआ है। एक तरफ SKPS ने जल सत्याग्रह के जरिए अपना विरोध दर्ज कराया, वहीं दूसरी ओर MTMC के बटुकों ने दूसरी जगह आरती कर अपना कार्यक्रम जारी रखा।
अब निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई और दोनों समितियों के बीच होने वाली संभावित बातचीत पर टिकी हैं। यदि समय रहते विवाद का समाधान नहीं निकला तो आने वाले दिनों में भी राम घाट पर क्षिप्रा आरती को लेकर तनाव की स्थिति बनी रह सकती है।





