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मध्य प्रदेश में कमर्शियल LPG सिलेंडर महंगा, रीवा में कीमत 3066 रुपये पहुंची

भोपाल। मध्य प्रदेश में 1 अक्टूबर से कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी लागू हो गई है। राज्य के अलग-अलग शहरों में 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल सिलेंडर के दाम करीब 62.50 रुपये से 65 रुपये तक बढ़े हैं। नई दरों के बाद होटल, रेस्टोरेंट, ढाबा, कैटरिंग और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का खर्च बढ़ने की संभावना है। प्रदेश में रीवा सबसे महंगा जिला बन गया है, जहां कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत 3066 रुपये तक पहुंच गई है। वहीं घरेलू उपयोग वाले 14.2 किलोग्राम एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
तेल मार्केटिंग कंपनियों ने 1 अक्टूबर से देशभर में कमर्शियल एलपीजी की कीमतों में संशोधन किया है। अलग-अलग शहरों में बढ़ोतरी की राशि अलग है और कुछ शहरों में यह 70 रुपये से भी अधिक दर्ज की गई है। दिल्ली में 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमत 62.50 रुपये बढ़कर 2810 रुपये हो गई, जबकि अन्य शहरों में भी बढ़ी हुई दरें लागू हुई हैं। घरेलू एलपीजी की कीमतें फिलहाल स्थिर रखी गई हैं।
मध्य प्रदेश में संशोधित दरों के अनुसार भोपाल में 19 किलो वाला कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर अब 2815 रुपये में मिलेगा। इंदौर में इसकी कीमत 2919 रुपये हो गई है। जबलपुर में नया दाम 3030 रुपये और ग्वालियर में 3037 रुपये तय हुआ है।
उज्जैन में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत 2980 रुपये हो गई है। वहीं रीवा में इसकी कीमत 3066 रुपये पहुंच गई है, जो राज्य के प्रमुख शहरों में सबसे अधिक है।
कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में हुई बढ़ोतरी का सीधा असर उन कारोबारों पर पड़ेगा, जहां प्रतिदिन बड़ी मात्रा में एलपीजी का इस्तेमाल होता है। होटल, रेस्टोरेंट, कैफे, मिठाई दुकान, ढाबा और कैटरिंग व्यवसाय इस श्रेणी में आते हैं।
इन प्रतिष्ठानों में खाना बनाने के लिए एक महीने में कई सिलेंडरों की खपत होती है। ऐसे में प्रत्येक सिलेंडर पर 60 रुपये से अधिक की बढ़ोतरी भी कुल मासिक खर्च पर असर डाल सकती है।
विशेष रूप से बड़े होटल और रेस्टोरेंट, जहां रोजाना कई कमर्शियल सिलेंडर इस्तेमाल होते हैं, उनके लिए लागत में बढ़ोतरी और ज्यादा हो सकती है।
कैटरिंग व्यवसाय पर भी इसका असर पड़ने की आशंका है। आगामी त्योहार और शादी-विवाह के सीजन में खाना बनाने के लिए एलपीजी की खपत सामान्य दिनों की तुलना में अधिक होती है।
ऐसे में कमर्शियल गैस सिलेंडर महंगा होने से कैटरर्स की लागत बढ़ सकती है। इसका प्रभाव आने वाले समय में आयोजन के पैकेज और भोजन की कीमतों पर भी दिखाई दे सकता है।
हालांकि घरेलू उपभोक्ताओं के लिए राहत की बात यह है कि 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं हुआ है। इसका मतलब है कि घरों में इस्तेमाल होने वाली रसोई गैस की कीमत 1 अक्टूबर को यथावत बनी हुई है।
कमर्शियल और घरेलू सिलेंडर की कीमतें अलग-अलग तय होती हैं। कमर्शियल सिलेंडर का इस्तेमाल मुख्य रूप से व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में किया जाता है, जबकि घरेलू सिलेंडर घरों में खाना बनाने के लिए उपयोग होता है।
मध्य प्रदेश के कई जिलों में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत अब तीन हजार रुपये के पार पहुंच गई है। रीवा के अलावा सिंगरौली, सतना, नरसिंहपुर, कटनी और पन्ना जैसे जिलों में भी दाम तीन हजार रुपये से अधिक बताए गए हैं।
रीवा में 3066 रुपये का नया दाम होने से यह प्रदेश में सबसे महंगे कमर्शियल एलपीजी वाले जिलों में शीर्ष पर पहुंच गया है।
सिंगरौली में कीमत 3064 रुपये, सतना और नरसिंहपुर में 3063.50 रुपये, कटनी में 3062.50 रुपये और पन्ना में 3061 रुपये तक पहुंची है।
इससे यह स्पष्ट है कि प्रदेश के अलग-अलग जिलों में परिवहन और वितरण से जुड़े अंतर के कारण कमर्शियल एलपीजी की कीमतों में भी अंतर है।
होटल और रेस्टोरेंट कारोबार पहले से ही खाद्य सामग्री, बिजली, कर्मचारियों के वेतन और अन्य परिचालन खर्चों का सामना कर रहे हैं। गैस की कीमतों में बढ़ोतरी उनके लिए एक और अतिरिक्त खर्च बन सकती है।
छोटे दुकानदारों पर इसका असर अपेक्षाकृत ज्यादा हो सकता है, क्योंकि उनके कारोबार का मार्जिन सीमित होता है। यदि कमर्शियल गैस के दाम लगातार बढ़ते हैं तो छोटे व्यवसायों के लिए खर्च संभालना मुश्किल हो सकता है।
मिठाई और नमकीन बनाने वाले प्रतिष्ठानों में भी गैस की खपत अधिक होती है। त्योहारों के दौरान उत्पादन बढ़ने के कारण सिलेंडर की जरूरत भी बढ़ती है।
ऐसे समय में कीमतों में बढ़ोतरी से उत्पादन लागत में वृद्धि हो सकती है।
कमर्शियल एलपीजी के दामों में संशोधन हर महीने किया जाता है। तेल मार्केटिंग कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार की परिस्थितियों, एलपीजी के वैश्विक भाव और मुद्रा विनिमय दर सहित कई कारकों को ध्यान में रखकर दरें तय करती हैं।
सितंबर में भी कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी हुई थी। अक्टूबर की शुरुआत में एक बार फिर कीमत बढ़ने से व्यापारियों की चिंता बढ़ सकती है।
व्यावसायिक उपभोक्ताओं के लिए लगातार बढ़ती लागत का असर लंबे समय में उनके उत्पाद और सेवाओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है।
हालांकि किसी भी प्रतिष्ठान द्वारा कीमत बढ़ाने का फैसला उसके अपने खर्च, प्रतिस्पर्धा और बाजार की स्थिति पर निर्भर करेगा।
मध्य प्रदेश में नई दरों के बाद भोपाल और आसपास के कुछ क्षेत्रों में कीमतें अभी तीन हजार रुपये से नीचे हैं, जबकि कई अन्य जिलों में यह सीमा पार हो चुकी है।
भोपाल में 2815 रुपये और इंदौर में 2919 रुपये का दाम प्रदेश के कई अन्य शहरों की तुलना में कम है।
इसके विपरीत जबलपुर, ग्वालियर और रीवा में कमर्शियल एलपीजी का दाम तीन हजार रुपये से ऊपर है।
नई दरों के लागू होने के बाद कारोबारियों को अब अपने मासिक खर्च का नया आकलन करना पड़ेगा।
विशेष रूप से ऐसे कारोबार, जहां गैस का इस्तेमाल लगातार होता है, वहां छोटी बढ़ोतरी भी महीने के अंत तक बड़ी रकम में बदल सकती है।
त्योहारी सीजन को देखते हुए यह बढ़ोतरी समय के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। आने वाले दिनों में होटल, रेस्टोरेंट और कैटरिंग कारोबार में मांग बढ़ने की संभावना रहती है।
ऐसे में बढ़ी हुई एलपीजी कीमतों का वास्तविक असर अक्टूबर और उसके बाद के महीनों में और स्पष्ट हो सकता है।
फिलहाल घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं को राहत मिली हुई है, क्योंकि उनके सिलेंडर की कीमत में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
वहीं कमर्शियल उपभोक्ताओं के लिए 1 अक्टूबर से बढ़ी हुई दरें प्रभावी हो गई हैं।
मध्य प्रदेश में 62.50 रुपये से 65 रुपये तक की बढ़ोतरी के बाद अब कारोबारियों की नजर अगली मासिक समीक्षा पर रहेगी। फिलहाल रीवा 3066 रुपये प्रति कमर्शियल सिलेंडर के साथ प्रदेश में सबसे महंगा जिला बना हुआ है, जबकि होटल, रेस्टोरेंट और कैटरिंग व्यवसाय इस बढ़ोतरी से बढ़ती परिचालन लागत का सामना करेंगे।





