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मध्य प्रदेश
शाजापुर में CM मोहन यादव ने लिया कृष्णमृग रेस्क्यू अभियान का जायजा
Ratna Netam
28 Oct 2026 2:40 PM IST

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शाजापुर : 28 अक्टूबर 2026। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को शाजापुर जिले में चलाए जा रहे कृष्णमृग (ब्लैकबक) और नीलगाय रेस्क्यू अभियान का निरीक्षण किया। मुख्यमंत्री ने रंथभंवर गांव पहुंचकर अभियान के दूसरे चरण की प्रगति का जायजा लिया और वन विभाग के अधिकारियों से विस्तृत जानकारी प्राप्त की। इस दौरान उन्होंने बताया कि राज्य सरकार की विशेष पहल के तहत अब तक 1,236 से अधिक कृष्णमृगों और सैकड़ों नीलगायों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य वन्यजीवों का संरक्षण करने के साथ किसानों की फसलों को नुकसान से बचाना है।
दक्षिण अफ्रीकी तकनीक से किया जा रहा हिरणों का रेस्क्यू
मध्य प्रदेश सरकार ने वन्यजीवों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए दक्षिण अफ्रीका की प्रसिद्ध बोमा पद्धति को अपनाया है। इस तकनीक के माध्यम से कृष्णमृगों और नीलगायों को बिना नुकसान पहुंचाए विशेष बाड़ों में एकत्रित किया जाता है। इसके बाद उन्हें सुरक्षित वाहनों के जरिए राष्ट्रीय उद्यानों और संरक्षित वन क्षेत्रों में स्थानांतरित किया जाता है।इस अभियान में दक्षिण अफ्रीका के वन्यजीव विशेषज्ञों की टीम तकनीकी सहयोग प्रदान कर रही है। मुख्यमंत्री ने विशेषज्ञों से बातचीत कर रेस्क्यू प्रक्रिया की बारीकियों को समझा। उन्होंने वन विभाग के कर्मचारियों और अभियान में शामिल अधिकारियों के प्रयासों की सराहना भी की।
किसानों की फसलों को बचाने के लिए सरकार की बड़ी पहल
शाजापुर सहित मालवा क्षेत्र के कई इलाकों में कृष्णमृगों और नीलगायों के कारण किसानों को फसलों के नुकसान की समस्या का सामना करना पड़ता है। बड़ी संख्या में वन्यजीव खेतों में पहुंचकर खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे किसानों को आर्थिक परेशानियां होती हैंइस समस्या का समाधान निकालने के लिए राज्य सरकार ने पिछले वर्ष विशेष वन्यजीव स्थानांतरण अभियान शुरू किया था। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि सरकार का उद्देश्य किसानों के हितों और वन्यजीवों के संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करना है।उन्होंने बताया कि वन्यजीवों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने से जहां किसानों को राहत मिलेगी, वहीं इन प्राणियों को संरक्षित क्षेत्रों में बेहतर प्राकृतिक आवास उपलब्ध हो सकेगा।
1236 से ज्यादा कृष्णमृगों का रेस्क्यू, सैकड़ों नीलगाय भी सुरक्षित
मुख्यमंत्री ने अभियान की उपलब्धियों की जानकारी देते हुए बताया कि अब तक 1,236 से अधिक कृष्णमृगों को सुरक्षित पकड़ा गया है। इसके अलावा सैकड़ों नीलगायों को भी स्थानांतरित किया गया है।रेस्क्यू किए गए कृष्णमृगों को कूनो राष्ट्रीय उद्यान, गांधीसागर, श्योपुर के वन क्षेत्रों और वीरांगना दुर्गावती संरक्षित क्षेत्र सहित विभिन्न स्थानों पर छोड़ा गया है।इस अभियान में वन विभाग की विशेष टीम, पशु चिकित्सक, प्रशिक्षित कर्मचारी और दक्षिण अफ्रीकी विशेषज्ञ मिलकर काम कर रहे हैं। वन्यजीवों को पकड़ने से लेकर उनके परिवहन तक विशेष सावधानी बरती जा रही है।वन्यजीवों को सुरक्षित तरीके से पकड़ने के लिए आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है। बोमा पद्धति में विशेष प्रकार के घेरों और मार्गों का निर्माण किया जाता है, जिनकी सहायता से जानवरों को निर्धारित स्थान की ओर बढ़ाया जाता है।इस प्रक्रिया में हेलीकॉप्टर की मदद भी ली जा रही है। पकड़े गए वन्यजीवों के परिवहन के लिए 11 ट्रकों की व्यवस्था की गई है।मुख्यमंत्री मोहन यादव के अनुसार, दक्षिण एशिया में हेलीकॉप्टर के सहयोग से बोमा पद्धति का इस तरह उपयोग करना एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने उम्मीद जताई कि मध्य प्रदेश का यह प्रयोग भविष्य में अन्य राज्यों के लिए भी उपयोगी साबित होगा।
अभियान के दूसरे चरण में 2000 कृष्णमृगों के स्थानांतरण का लक्ष्य
वन विभाग की ओर से चलाए जा रहे इस अभियान के दूसरे चरण में 2,000 कृष्णमृगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, नौ अक्टूबर से शुरू हुए अभियान के तहत रेस्क्यू कार्य लगातार जारी है। शाजापुर के बाड़ीगांव में सोमवार और मंगलवार को कुल 280 वन्यजीवों को सुरक्षित पकड़ा गया।अभियान 31 अक्टूबर तक चलाने की योजना है। वन विभाग द्वारा रेस्क्यू स्थल पर वन्यजीवों की सुरक्षा, निगरानी और परिवहन संबंधी व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से ली अभियान की जानकारी
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रंथभंवर में बनाए गए विशेष मचान से रेस्क्यू अभियान का अवलोकन किया। उन्होंने अधिकारियों से पूछा कि जानवरों को पकड़ने और स्थानांतरित करने के दौरान किन तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है।अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को अभियान की प्रगति, तकनीकी व्यवस्थाओं और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए उठाए जा रहे कदमों की जानकारी दी।इस दौरान जिला प्रशासन और वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने अभियान में शामिल कर्मचारियों के कार्यों की सराहना करते हुए वन्यजीव संरक्षण को प्राथमिकता देने पर जोर दिया।
दूसरे राज्यों के लिए मॉडल बन सकता है मध्य प्रदेश का अभियान
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश में चलाया जा रहा यह अभियान मानव और वन्यजीवों के बीच बढ़ते संघर्ष को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।उन्होंने उम्मीद जताई कि इस परियोजना की सफलता को देखते हुए देश के अन्य राज्य भी बोमा पद्धति को अपना सकते हैं। इससे वन्यजीवों को नुकसान पहुंचाए बिना कृषि क्षेत्रों से सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में मदद मिलेगी।विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी वन्यजीव स्थानांतरण अभियान की सफलता के लिए सुरक्षित रेस्क्यू के साथ उपयुक्त प्राकृतिक आवास और स्थानांतरण के बाद निगरानी भी जरूरी होती है।मध्य प्रदेश सरकार की इस पहल से किसानों की फसलों की सुरक्षा और वन्यजीव संरक्षण, दोनों उद्देश्यों को एक साथ पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है। सरकार को उम्मीद है कि अभियान के सकारात्मक परिणाम मिलने पर इसे प्रदेश के अन्य प्रभावित इलाकों में भी लागू किया जा सकेगा।
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