मध्य प्रदेश

पांच हजार की रिश्वत मांगने का आरोप, दो हजार लेते कथित वीडियो ने छतरपुर में मचाई हलचल

Kavita2
28 Oct 2026 2:32 PM IST
पांच हजार की रिश्वत मांगने का आरोप, दो हजार लेते कथित वीडियो ने छतरपुर में मचाई हलचल
x

छतरपुर। मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने वाला मामला सामने आया है। सिविल लाइंस थाने में पदस्थ सहायक उपनिरीक्षक (ASI) सीताराम पर एक व्यक्ति से मामला निपटाने के बदले रिश्वत मांगने और पैसे लेने का आरोप लगा है। सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें कथित तौर पर एएसआई को दो हजार रुपये लेते हुए दिखाया गया है। शिकायतकर्ता भवानीदीन प्रजापति का आरोप है कि अधिकारी ने उनसे पांच हजार रुपये की मांग की थी। मामला एक रिश्तेदार के साथ 22 हजार रुपये के लेनदेन से जुड़ा है। भवानीदीन का कहना है कि संबंधित रकम वापस करने और शिकायत वापस लेने का आवेदन दिए जाने के बावजूद उन्हें लगातार परेशान किया जा रहा था। वीडियो सामने आने के बाद पुलिस विभाग की कार्यशैली और भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, वीडियो की प्रामाणिकता और रिश्वत लेने के आरोप की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

सिविल लाइंस थाने में रिश्वत लेने का वीडियो वायरल

छतरपुर के सिविल लाइंस पुलिस थाने से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है।

इस वीडियो में कथित तौर पर एक पुलिस अधिकारी को रुपये लेते हुए दिखाया गया है।

वीडियो में दिखाई देने वाले व्यक्ति की पहचान सहायक उपनिरीक्षक सीताराम के रूप में बताई जा रही है।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि मामले को समाप्त कराने के बदले उनसे रिश्वत मांगी गई थी।

इसके बाद कथित रूप से दो हजार रुपये दिए जाने का वीडियो सामने आया।

वीडियो वायरल होने के बाद स्थानीय स्तर पर घटना को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

हालांकि, वीडियो कब रिकॉर्ड किया गया और उसमें दिखाई दे रहा लेनदेन किस उद्देश्य से हुआ, यह स्वतंत्र जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।

22 हजार रुपये के लेनदेन से शुरू हुआ विवाद

इस मामले की शुरुआत 22 हजार रुपये के एक वित्तीय लेनदेन से हुई थी।

शिकायतकर्ता भवानीदीन प्रजापति छतरपुर जिले के गौरिहार थाना क्षेत्र के कुटी गांव के निवासी बताए गए हैं।

जानकारी के अनुसार, भवानीदीन का अपने एक रिश्तेदार के साथ पैसों को लेकर विवाद चल रहा था।

रिश्तेदार का आरोप था कि उसने भवानीदीन को 22 हजार रुपये दिए थे, लेकिन निर्धारित समय पर रकम वापस नहीं की गई।

इसी विवाद को लेकर रिश्तेदार ने सिविल लाइंस पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई थी।

शिकायत मिलने के बाद पुलिस स्तर पर मामले से जुड़ी प्रक्रिया शुरू हुई।

भवानीदीन का कहना है कि बाद में उन्होंने संबंधित राशि वापस कर दी थी।

रुपये लौटाने के बाद भी परेशान करने का आरोप

भवानीदीन प्रजापति के अनुसार, रिश्तेदार से चल रहे विवाद को समाप्त करने के लिए उन्होंने पूरे 22 हजार रुपये वापस कर दिए थे।

इसके बाद संबंधित शिकायत वापस लेने के लिए आवेदन भी दिया गया।

उनका आरोप है कि पैसे लौटाए जाने और शिकायत वापस लेने की प्रक्रिया शुरू होने के बावजूद एएसआई सीताराम उन्हें परेशान करते रहे।

भवानीदीन का कहना है कि मामले को समाप्त करने के बदले उनसे अतिरिक्त पैसे मांगे गए।

उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारी ने मामले को निपटाने के लिए पांच हजार रुपये देने की बात कही।

शिकायतकर्ता के अनुसार, इसी कथित मांग के बाद विवाद बढ़ा।

हालांकि, पुलिस अधिकारी का पक्ष सामने नहीं आने के कारण आरोपों पर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।

पांच हजार की मांग, दो हजार लेने का आरोप

शिकायतकर्ता का दावा है कि एएसआई सीताराम ने मामले को निपटाने के लिए पांच हजार रुपये की मांग की थी।

इसके बाद दो हजार रुपये दिए जाने की घटना का कथित वीडियो सामने आया।

इस वीडियो को रिश्वतखोरी के आरोप से जोड़कर सोशल मीडिया पर साझा किया जा रहा है।

शिकायतकर्ता का कहना है कि जब मूल रकम वापस की जा चुकी थी और शिकायत वापस लेने का आवेदन भी दिया गया था, तब अतिरिक्त पैसे मांगने का कोई औचित्य नहीं था।

हालांकि, वीडियो में कथित रूप से दिए गए दो हजार रुपये रिश्वत ही थे या नहीं, इसकी पुष्टि सक्षम जांच एजेंसी को करनी होगी।

फिलहाल संबंधित अधिकारी के खिलाफ रिश्वतखोरी का अपराध सिद्ध नहीं हुआ है।

वीडियो ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल

इस घटना ने पुलिस थानों में शिकायतों के निस्तारण की प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं।

आम नागरिक किसी वित्तीय विवाद, मारपीट, धमकी या अन्य समस्या के समाधान के लिए पुलिस के पास पहुंचते हैं।

ऐसे मामलों में पुलिस से निष्पक्ष और कानून के अनुसार कार्रवाई की अपेक्षा की जाती है।

यदि शिकायत के निस्तारण के बदले पैसे मांगने का आरोप सामने आता है, तो उससे पुलिस व्यवस्था के प्रति लोगों का भरोसा प्रभावित हो सकता है।

इसी कारण रिश्वतखोरी के आरोपों की निष्पक्ष जांच महत्वपूर्ण होती है।

छतरपुर के इस मामले में भी वीडियो, शिकायतकर्ता के बयान और संबंधित दस्तावेजों की जांच से वास्तविक परिस्थितियां स्पष्ट हो सकती हैं।

वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से शिकायत की तैयारी

प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, भवानीदीन प्रजापति ने इस मामले को वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के सामने उठाने की बात कही है।

उन्होंने आरोप लगाया कि संबंधित पुलिस कर्मचारी ने उनके साथ अनुचित व्यवहार किया।

शिकायतकर्ता अब मामले की निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई चाहते हैं।

हालांकि, बुधवार, 28 अक्टूबर तक उपलब्ध रिपोर्ट में पुलिस विभाग की ओर से आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।

इसलिए यह स्पष्ट नहीं है कि संबंधित एएसआई के खिलाफ विभागीय जांच शुरू हुई है या नहीं।

किसी अधिकारी को निलंबित किए जाने, गिरफ्तार किए जाने या उसके खिलाफ भ्रष्टाचार का मुकदमा दर्ज होने की भी पुष्टि नहीं हुई है।

क्या रिश्वत मांगना भी अपराध है?

भारत में किसी सरकारी कर्मचारी द्वारा अपने आधिकारिक कार्य के बदले अवैध आर्थिक लाभ मांगना या स्वीकार करना गंभीर कानूनी मामला हो सकता है।

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत लोक सेवक द्वारा अनुचित लाभ प्राप्त करने से जुड़े मामलों में कार्रवाई का प्रावधान है।

यदि कोई सरकारी कर्मचारी अपने पद का उपयोग करके शिकायत निपटाने, कार्रवाई रोकने या किसी अन्य सरकारी कार्य के बदले पैसे मांगता है, तो परिस्थितियों और साक्ष्यों के आधार पर भ्रष्टाचार संबंधी जांच की जा सकती है।

हालांकि, किसी व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के लिए उपलब्ध तथ्यों का सत्यापन जरूरी होता है।

केवल सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने से किसी अधिकारी को दोषी नहीं माना जा सकता।

वायरल वीडियो की जांच क्यों जरूरी?

इस मामले में सोशल मीडिया पर सामने आया वीडियो महत्वपूर्ण साक्ष्य हो सकता है।

लेकिन जांच के दौरान वीडियो का मूल स्रोत, रिकॉर्डिंग की तारीख, स्थान और परिस्थितियों की पुष्टि करना जरूरी होगा।

इसके अलावा वीडियो में दिखाए गए पैसे के लेनदेन का उद्देश्य भी स्पष्ट करना होगा।

जांच अधिकारी शिकायतकर्ता और संबंधित पुलिसकर्मी के बयान दर्ज कर सकते हैं।

रिश्तेदार के साथ हुए 22 हजार रुपये के लेनदेन और शिकायत वापस लेने के आवेदन से जुड़े दस्तावेज भी महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

यदि डिजिटल साक्ष्यों और अन्य जानकारी से रिश्वत मांगने या लेने की पुष्टि होती है, तो संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई संभव है।

शिकायत निस्तारण में पारदर्शिता की जरूरत

छतरपुर की इस घटना ने पुलिस थानों में शिकायतों के समाधान की पारदर्शिता को लेकर चर्चा बढ़ा दी है।

किसी वित्तीय विवाद में दोनों पक्ष आपसी सहमति से रकम लौटाने या समझौता करने का निर्णय ले सकते हैं।

हालांकि, शिकायत वापस लेने या किसी मामले को बंद करने की प्रक्रिया संबंधित कानूनों के अनुसार ही पूरी होती है।

इस प्रक्रिया में सरकारी कर्मचारी द्वारा किसी प्रकार की अवैध रकम मांगना स्वीकार्य नहीं है।

ऐसी परिस्थितियों में शिकायतकर्ता को निर्धारित प्रशासनिक या कानूनी माध्यमों से शिकायत दर्ज कराने का अधिकार है।

पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी संबंधित आरोपों की जांच कर सकते हैं।

अब पुलिस की आधिकारिक प्रतिक्रिया पर नजर

छतरपुर के सिविल लाइंस थाने से जुड़ा यह मामला सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के कारण चर्चा में आ गया है।

भवानीदीन प्रजापति ने एएसआई सीताराम पर पांच हजार रुपये की मांग करने और दो हजार रुपये लेने का आरोप लगाया है।

दूसरी ओर, संबंधित पुलिस अधिकारी या विभाग की ओर से अभी विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं है।

ऐसे में आगे की जांच से ही पता चलेगा कि वीडियो में दिखाया गया घटनाक्रम किस परिस्थिति में हुआ और शिकायतकर्ता के आरोप कितने सही हैं।

फिलहाल यह रिश्वतखोरी का आरोप है, न कि जांच में साबित हुआ अपराध।

Next Story