मध्य प्रदेश

छतरपुर विस्थापितों का संघर्ष जारी, 11 दिन से भूख हड़ताल पर बैठे लोग

Saba Naaz
17 July 2026 3:57 PM IST
छतरपुर विस्थापितों का संघर्ष जारी, 11 दिन से भूख हड़ताल पर बैठे लोग
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छतरपुर। मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में केन-बेतवा लिंक परियोजना समेत अन्य विकास परियोजनाओं से प्रभावित और विस्थापित हुए लोगों का आंदोलन लगातार जारी है। विस्थापितों के पुनर्वास में कथित भ्रष्टाचार और उचित मुआवजे की मांग को लेकर जय किसान संगठन के बैनर तले चल रहा ‘चिता आंदोलन’ अब तेज होता जा रहा है। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर की भूख हड़ताल बुधवार को 11वें दिन भी जारी रही।

आंदोलनकारियों का कहना है कि जब तक विस्थापित परिवारों को न्याय, उचित मुआवजा और बेहतर पुनर्वास व्यवस्था नहीं मिलती, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। लगातार अनशन के कारण अमित भटनागर के स्वास्थ्य को लेकर भी चिंता बढ़ने लगी है। आंदोलन से जुड़े लोगों के अनुसार, 11 दिनों की भूख हड़ताल के दौरान उनका वजन करीब छह किलोग्राम तक कम हो गया है।

अमित भटनागर के समर्थन में प्रभावित परिवारों ने भी विरोध का अनोखा तरीका अपनाया। आंदोलन स्थल पर मौजूद करीब 500 विस्थापित परिवारों ने बुधवार को चूल्हा नहीं जलाया। इसके चलते बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को भी भोजन नहीं मिला। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यह कदम सरकार और प्रशासन का ध्यान उनकी समस्याओं की ओर आकर्षित करने के लिए उठाया गया है।

विस्थापित ग्रामीणों का आरोप है कि केन-बेतवा लिंक परियोजना, एनटीपीसी, मझगांव, रूंज और नैगुवा जैसी परियोजनाओं में पुनर्वास प्रक्रिया के दौरान भारी अनियमितताएं हुई हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले चार वर्षों से वे अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया।

प्रभावित लोगों ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने न तो सही तरीके से ग्राम सभाएं आयोजित कीं और न ही पारदर्शी तरीके से सर्वे कराया गया। इसके अलावा जनसुनवाई और ग्रामीणों की आपत्तियों पर भी उचित कार्रवाई नहीं की गई।

विस्थापितों का सबसे बड़ा आरोप मुआवजा वितरण को लेकर है। ग्रामीणों का कहना है कि जिन परिवारों की जमीन वास्तव में परियोजनाओं के कारण प्रभावित हुई, उन्हें पर्याप्त मुआवजा नहीं मिला। वहीं, कुछ ऐसे लोगों को भी लाभ पहुंचाने का आरोप लगाया गया है, जो पात्र नहीं थे। आंदोलनकारियों ने पुनर्वास प्रक्रिया में भ्रष्टाचार की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।

प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में जमीन के बदले जमीन देना, पात्रता तय करने की अंतिम तिथि बढ़ाकर वर्ष 2026 करना, मुआवजा और पुनर्वास में कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच कराना और केन-बेतवा परियोजना के प्रभावों पर सार्वजनिक चर्चा कराना शामिल है।

आंदोलन को अब राजनीतिक और सामाजिक समर्थन भी मिलने लगा है। समाजवादी पार्टी के कई पदाधिकारी आंदोलन स्थल पर पहुंचे और विस्थापितों की मांगों का समर्थन किया। सपा जिला अध्यक्ष कपूर सिंह यादव, महिला सभा की प्रदेश अध्यक्ष रानी रैकवार, प्रदेश महासचिव विनोद पटेल और जिला उपाध्यक्ष महेंद्र यादव सहित अन्य नेताओं ने प्रदर्शनकारियों से मुलाकात की।

इसके अलावा गांधीवादी विचारक और गांधी स्मारक निधि के अध्यक्ष संतोष कुमार द्विवेदी ने भी आंदोलन स्थल पहुंचकर ग्रामीणों का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि जल, जंगल और जमीन जैसे अधिकारों के लिए शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाना नागरिकों का अधिकार है।

गांधी स्मारक निधि की सचिव दयावंती बहन ने भी आंदोलन के अहिंसक तरीके की सराहना की। वहीं शहडोल से पहुंचे लोक कलाकार इस्त्याक भाई ने जनगीत प्रस्तुत कर प्रदर्शनकारियों का उत्साह बढ़ाया। कई अन्य वक्ताओं ने भी प्रशासन से जल्द समाधान निकालने की अपील की।

फिलहाल छतरपुर में विस्थापितों का ‘चिता आंदोलन’ जारी है और आंदोलनकारी अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं। अब प्रशासन और सरकार की ओर से उठाए जाने वाले कदमों पर सभी की नजरें टिकी हैं।

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