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मध्य प्रदेश
रतलाम में कुत्ते का खूनी हमला, 3 साल की बच्ची ने तोड़ा दम
Rajeshwari Nishad
22 Oct 2026 11:46 PM IST

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रतलाम। मध्य प्रदेश के रतलाम जिले से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। जिला मुख्यालय से करीब 15 किलोमीटर दूर पलसोड़ी गांव में गुरुवार, 22 अक्टूबर 2026 की शाम आवारा कुत्ते ने घर के आंगन में खेल रही तीन वर्षीय मासूम बच्ची पर हमला कर दिया। हमले में बच्ची के सिर और शरीर के अन्य हिस्सों पर गंभीर चोटें आईं। परिजन उसे उपचार के लिए अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन उसकी जान नहीं बचाई जा सकी। मृतका की पहचान मनीषा भाभर के रूप में हुई है। घटना के समय बच्ची के दादा-दादी खेत पर काम करने गए हुए थे, जबकि उसके माता-पिता मजदूरी के सिलसिले में राजस्थान के अजमेर में थे। इस घटना ने पूरे गांव को स्तब्ध कर दिया है।
घर के आंगन में अकेली खेल रही थी मासूम
जानकारी के अनुसार, पलसोड़ी गांव निवासी तीन वर्षीय मनीषा भाभर गुरुवार शाम अपने घर के आंगन में खेल रही थी। परिवार के अन्य सदस्य उस समय अपने कामकाज में व्यस्त थे।
बच्ची के दादा-दादी खेत पर गए हुए थे। वहीं, उसके माता-पिता रोजगार के सिलसिले में अजमेर में रहकर मजदूरी कर रहे हैं।इसी दौरान एक आवारा कुत्ता घर के आंगन में पहुंच गया और उसने बच्ची पर अचानक हमला कर दिया।
हमला इतना गंभीर था कि मासूम को बचने का मौका नहीं मिला। कुत्ते ने उसके सिर और शरीर के अन्य हिस्सों को गंभीर रूप से घायल कर दिया।बच्ची की उम्र महज तीन साल होने के कारण वह अपना बचाव भी नहीं कर सकी।
सिर और शरीर पर आईं गंभीर चोटें
कुत्ते के हमले में मनीषा को गंभीर चोटें आईं। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, उसके सिर और पेट के हिस्से में घाव होने की बात सामने आई है। एक प्रकाशित रिपोर्ट में सिर और पीठ पर गंभीर चोटों का उल्लेख किया गया है।
इस हमले ने बच्ची की जान को गंभीर खतरे में डाल दिया।घटना की जानकारी मिलने के बाद परिजनों और ग्रामीणों ने बच्ची की मदद करने का प्रयास किया। उसकी स्थिति को देखते हुए तुरंत अस्पताल ले जाने की व्यवस्था की गई।हालांकि, हमले के दौरान कुत्ते की संख्या, बच्ची को बचाने के प्रयास और घटनाक्रम के अन्य विवरणों की पूरी आधिकारिक पुष्टि अभी उपलब्ध नहीं है।
अस्पताल पहुंचने से पहले ही तोड़ा दम
गंभीर रूप से घायल मनीषा को उपचार के लिए रतलाम जिला अस्पताल ले जाया गया।लेकिन चोटें इतनी गंभीर थीं कि बच्ची की जान नहीं बचाई जा सकी। प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, उसने जिला अस्पताल पहुंचने से पहले ही दम तोड़ दिया था।तीन साल की मासूम की मौत की खबर मिलते ही परिवार में मातम पसर गया।जिस घर के आंगन में कुछ देर पहले बच्ची खेल रही थी, वहां उसकी मौत की खबर से शोक का माहौल बन गया।घटना ने आसपास के लोगों को भी झकझोर दिया है।
अजमेर में मजदूरी करते हैं माता-पिता
मृतका मनीषा के माता-पिता रोजगार के लिए राजस्थान के अजमेर गए हुए थे।परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए दोनों मजदूरी करते हैं। इस दौरान मनीषा गांव में अपने दादा-दादी के पास रह रही थी।घटना के समय बुजुर्ग दंपति खेत पर काम करने गए हुए थे।बच्ची की अचानक हुई मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। रोजगार की तलाश में घर से दूर गए माता-पिता के लिए यह खबर बेहद दुखद है।मनीषा की उम्र महज तीन साल थी और उसकी पूरी जिंदगी अभी बाकी थी।
गांव में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता
इस दर्दनाक घटना के बाद गांव में छोटे बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।ग्रामीण क्षेत्रों में घरों के आंगन और आसपास की खुली जगहों पर बच्चे खेलते रहते हैं। ऐसे में आक्रामक आवारा कुत्तों की मौजूदगी गंभीर खतरा पैदा कर सकती है।
विशेष रूप से छोटे बच्चे अचानक होने वाले पशुओं के हमलों से खुद को सुरक्षित रखने में सक्षम नहीं होते।इस घटना ने आवारा कुत्तों के प्रबंधन और बच्चों की सुरक्षा से जुड़े उपायों की आवश्यकता को एक बार फिर सामने रखा है।हालांकि, स्थानीय प्रशासन की ओर से इस घटना के बाद किसी विशेष अभियान या कार्रवाई की आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं हुई है।
आवारा कुत्तों के हमले बन रहे चिंता का विषय
देश के विभिन्न हिस्सों से आवारा कुत्तों के हमलों की घटनाएं सामने आती रही हैं।इन घटनाओं में विशेष रूप से छोटे बच्चों और बुजुर्गों को गंभीर चोटें आने का खतरा रहता है।कुत्तों के हमले में गहरे घाव, अत्यधिक रक्तस्राव और संक्रमण जैसी समस्याएं हो सकती हैं।इसके अलावा कुत्ते के काटने से रेबीज संक्रमण का खतरा भी रहता है। हालांकि, मनीषा की मौत का संबंध तत्काल हमले से लगी गंभीर चोटों से बताया गया है, न कि रेबीज से।ऐसे में आवारा कुत्तों की संख्या का मानवीय और वैज्ञानिक प्रबंधन, नियमित टीकाकरण तथा सार्वजनिक जागरूकता महत्वपूर्ण हैं।
बच्चों की सुरक्षा के लिए जरूरी सावधानियां
पशुओं के हमले से बचाव के लिए परिवारों को कुछ महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखना चाहिए।छोटे बच्चों को ऐसे स्थानों पर अकेला छोड़ने से बचना चाहिए, जहां आक्रामक या अपरिचित कुत्तों की आवाजाही हो सकती है।
इसके अलावा बच्चों को यह सिखाना जरूरी है कि वे अनजान कुत्तों के पास न जाएं और उन्हें परेशान न करें।यदि किसी क्षेत्र में कोई कुत्ता लगातार आक्रामक व्यवहार करता है, तो उसकी जानकारी स्थानीय निकाय या संबंधित पशु नियंत्रण विभाग को दी जानी चाहिए।कुत्तों के प्रति हिंसा करने के बजाय प्रशिक्षित कर्मचारियों की सहायता से सुरक्षित और मानवीय तरीके से स्थिति संभालना जरूरी है।
कुत्ते के काटने पर तुरंत क्या करें?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, कुत्ते के काटने या खरोंच लगने पर घाव को तुरंत साबुन और बहते पानी से लगभग 15 मिनट तक धोना चाहिए।इसके बाद जल्द से जल्द स्वास्थ्य केंद्र पहुंचकर चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।डॉक्टर घाव की गंभीरता के आधार पर एंटी-रेबीज वैक्सीन, रेबीज इम्युनोग्लोबुलिन और टिटनेस से संबंधित उपचार की आवश्यकता का निर्णय लेते हैं।
यदि चोट गहरी हो या रक्तस्राव अधिक हो रहा हो, तो तत्काल आपातकालीन चिकित्सा सहायता लेना आवश्यक है।घरेलू उपचार के भरोसे चिकित्सकीय मदद लेने में देरी नहीं करनी चाहिए।
मासूम की मौत से शोक में डूबा परिवार
पलसोड़ी गांव में तीन वर्षीय मनीषा की मौत ने उसके परिवार को गहरा दुख पहुंचाया है।घर के आंगन में खेलते समय अचानक हुए कुत्ते के हमले ने परिवार की खुशियां छीन लीं।यह घटना केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बच्चों की सुरक्षा तथा आवारा पशुओं के प्रबंधन को लेकर गंभीर सवाल भी उठाती है।स्थानीय स्तर पर पशु नियंत्रण, टीकाकरण और समय पर शिकायत निवारण की प्रभावी व्यवस्था से ऐसी घटनाओं का जोखिम कम करने में मदद मिल सकती है।
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