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Bhopal : नगर निगम ने लागू किया पूरी तरह कैशलेस पार्किंग सिस्टम

Madhya Pradesh मध्य प्रदेश : भोपाल नगर निगम (BMC) ने शहर में डिजिटल गवर्नेंस और स्मार्ट सिटी सुविधाओं को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए अपनी सभी पांच मल्टी-लेवल पार्किंग में पूरी तरह कैशलेस पार्किंग सिस्टम लागू कर दिया है। नई व्यवस्था के तहत अब पार्किंग शुल्क का भुगतान केवल डिजिटल माध्यमों से ही किया जा सकेगा। यदि कोई वाहन चालक नकद भुगतान करने की कोशिश करता है, तो उससे निर्धारित पार्किंग शुल्क के बजाय दोगुना शुल्क वसूला जाएगा।
नगर निगम का दावा है कि इस पहल के साथ भोपाल देश की पहली शहरी स्थानीय निकाय (Urban Local Body) बन गई है, जिसने अपनी मल्टी-लेवल पार्किंग व्यवस्था को पूरी तरह डिजिटल और हाई-टेक प्रणाली में बदल दिया है। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य पार्किंग प्रबंधन को अधिक पारदर्शी, तेज और तकनीक आधारित बनाना है।
नगर निगम अधिकारियों के अनुसार, शहर की सभी पांच मल्टी-लेवल पार्किंग में नई डिजिटल प्रणाली लागू कर दी गई है। अब पार्किंग स्थल पर प्रवेश और निकास की पूरी प्रक्रिया स्वचालित (ऑटोमेटेड) होगी। वाहन चालकों को नकद लेनदेन के बजाय यूपीआई, डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड, नेट बैंकिंग या अन्य स्वीकृत डिजिटल भुगतान माध्यमों का उपयोग करना होगा।
नई व्यवस्था के तहत यदि कोई व्यक्ति नकद भुगतान करना चाहता है, तो उसे सामान्य पार्किंग शुल्क के स्थान पर दोगुना शुल्क देना होगा। नगर निगम का मानना है कि यह कदम लोगों को डिजिटल भुगतान अपनाने के लिए प्रोत्साहित करेगा और नकद लेनदेन में होने वाली अनियमितताओं पर भी रोक लगाएगा।
बीएमसी के अनुसार, नई पार्किंग प्रणाली में आधुनिक तकनीक का उपयोग किया गया है। पार्किंग स्थलों पर कैमरा आधारित ऑटोमैटिक व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम लगाया गया है, जो प्रत्येक वाहन के प्रवेश और निकास का स्वतः रिकॉर्ड तैयार करेगा। इसके साथ ही सभी पार्किंग स्थलों पर बूम बैरियर भी लगाए गए हैं, जिससे बिना पंजीकरण या शुल्क भुगतान के वाहन का प्रवेश और निकास संभव नहीं होगा।
अधिकारियों का कहना है कि कैमरा आधारित यह प्रणाली वाहन के नंबर की पहचान कर उसके आने और जाने का समय स्वतः दर्ज करेगी। इससे पार्किंग शुल्क की गणना भी स्वचालित रूप से होगी और मानव हस्तक्षेप की आवश्यकता काफी कम हो जाएगी। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और पार्किंग संचालन अधिक व्यवस्थित होगा।
नगर निगम के अनुसार, डिजिटल प्रणाली लागू होने से पार्किंग प्रबंधन में कई अन्य लाभ भी मिलेंगे। नकद लेनदेन समाप्त होने से राजस्व संग्रह अधिक पारदर्शी होगा, कर्मचारियों पर नकदी प्रबंधन का बोझ कम होगा और शुल्क वसूली में किसी प्रकार की गड़बड़ी की संभावना भी घटेगी। साथ ही वाहन चालकों को भी बिना नकद रखने की चिंता के तेज और सुविधाजनक सेवा मिलेगी।
स्मार्ट सिटी परियोजनाओं के तहत भोपाल में पहले से ही कई डिजिटल सेवाएं शुरू की जा चुकी हैं। अब मल्टी-लेवल पार्किंग में पूरी तरह कैशलेस व्यवस्था लागू होने से शहर के शहरी प्रबंधन को और अधिक तकनीक आधारित बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल पार्किंग प्रणाली से वाहनों की आवाजाही का बेहतर रिकॉर्ड तैयार होगा, पार्किंग क्षमता का प्रभावी उपयोग संभव होगा और भविष्य में यातायात प्रबंधन की योजना बनाने में भी यह डेटा उपयोगी साबित हो सकता है। इसके अलावा वाहन चोरी या सुरक्षा संबंधी मामलों में भी कैमरा आधारित रिकॉर्डिंग सहायक हो सकती है।
हालांकि कुछ लोगों का मानना है कि ऐसे नागरिक, जो अभी भी डिजिटल भुगतान का नियमित उपयोग नहीं करते, उन्हें शुरुआत में कुछ कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। इस पर नगर निगम का कहना है कि पार्किंग स्थलों पर लोगों को डिजिटल भुगतान की प्रक्रिया समझाने के लिए आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
बीएमसी ने वाहन चालकों से अपील की है कि वे पार्किंग स्थल पर आने से पहले अपने मोबाइल में यूपीआई या अन्य डिजिटल भुगतान विकल्प सक्रिय रखें, ताकि पार्किंग शुल्क का भुगतान आसानी से किया जा सके और अतिरिक्त शुल्क से बचा जा सके।
नगर निगम का कहना है कि यदि यह प्रणाली सफल रहती है, तो भविष्य में शहर के अन्य सार्वजनिक पार्किंग स्थलों पर भी इसी प्रकार की डिजिटल व्यवस्था लागू करने पर विचार किया जाएगा। इससे पूरे शहर में एक समान, पारदर्शी और आधुनिक पार्किंग प्रबंधन प्रणाली विकसित की जा सकेगी।
भोपाल में लागू की गई यह कैशलेस पार्किंग व्यवस्था डिजिटल इंडिया और स्मार्ट सिटी मिशन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। नगर निगम को उम्मीद है कि नागरिकों के सहयोग से यह नई व्यवस्था न केवल पार्किंग प्रबंधन को अधिक कुशल बनाएगी, बल्कि डिजिटल भुगतान की संस्कृति को भी और मजबूत करेगी।





