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मध्य प्रदेश
सनातन और हिंदुत्व पर छिड़ी जंग, दिग्विजय सिंह का बड़ा बयान
Ratna Netam
6 Nov 2026 3:41 PM IST

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भोपाल। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने हिंदुत्व और सनातन धर्म को लेकर एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी (BJP), राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और विश्व हिंदू परिषद (VHP) पर तीखा निशाना साधा है। उन्होंने हिंदुत्व को नफरत फैलाने वाली विचारधारा बताने संबंधी अपनी टिप्पणी का बचाव करते हुए कहा कि सनातन धर्म और राजनीतिक हिंदुत्व को एक समान नहीं माना जा सकता। उनके अनुसार, सनातन धर्म का मूल संदेश प्रेम, सद्भाव, सहिष्णुता और पूरे विश्व के कल्याण की भावना है। दिग्विजय सिंह के इस बयान के बाद मध्य प्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है और भाजपा नेताओं ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।दिग्विजय सिंह इन दिनों उज्जैन से अयोध्या तक लगभग 1,000 किलोमीटर की 'सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा' निकाल रहे हैं। इसी यात्रा के दौरान उन्होंने गुना और राघौगढ़ में पत्रकारों तथा आम लोगों को संबोधित करते हुए हिंदुत्व की अवधारणा पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा और उससे जुड़े संगठन सनातन धर्म को अपने राजनीतिक नजरिए से प्रस्तुत कर रहे हैं। कांग्रेस नेता ने स्पष्ट किया कि वह सनातन धर्म में विश्वास रखते हैं, लेकिन हिंदुत्व की उस राजनीतिक व्याख्या के विरोधी हैं, जिसे वह समाज में विभाजन पैदा करने वाली मानते हैं।
दिग्विजय सिंह ने अपने बयान में कहा कि सनातन धर्म सभी धर्मों का सम्मान करने और पूरी दुनिया को एक परिवार मानने की शिक्षा देता है। उन्होंने आरएसएस और विश्व हिंदू परिषद पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि ये संगठन धार्मिक पहचान का इस्तेमाल राजनीतिक उद्देश्यों के लिए करते हैं। उन्होंने हिंदुत्व को नफरत फैलाने से जोड़ते हुए कहा कि धार्मिक आस्था और राजनीतिक विचारधारा के बीच अंतर समझना जरूरी है।कांग्रेस नेता ने दावा किया कि सनातन धर्म की वास्तविक भावना मानवता, करुणा और भाईचारे में निहित है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में 'वसुधैव कुटुंबकम्' का विचार पूरी दुनिया को एक परिवार मानने का संदेश देता है। उनके अनुसार, सनातन धर्म का उद्देश्य किसी दूसरे धर्म या समुदाय के प्रति शत्रुता पैदा करना नहीं, बल्कि सभी के कल्याण की कामना करना है।दिग्विजय सिंह ने इससे पहले शाजापुर में भी हिंदुत्व और सनातन धर्म को अलग-अलग बताया था। उन्होंने दावा किया था कि हिंदुत्व की राजनीतिक अवधारणा को विनायक दामोदर सावरकर ने आगे बढ़ाया। उनका कहना था कि हजारों वर्ष पुरानी सनातन परंपरा को आधुनिक राजनीतिक विचारधारा के साथ जोड़ना उचित नहीं है। हालांकि, हिंदुत्व और सनातन धर्म के ऐतिहासिक तथा वैचारिक संबंधों को लेकर विभिन्न राजनीतिक और धार्मिक संगठनों की अलग-अलग व्याख्याएं हैं।
दिग्विजय सिंह के बयान पर भाजपा ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री विश्वास सारंग ने कांग्रेस नेता पर हिंदू धर्म और सनातन परंपरा को बदनाम करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि दिग्विजय सिंह की यात्रा समाज को जोड़ने के बजाय विभाजन पैदा करने वाली है। सारंग ने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता लगातार ऐसे बयान दे रहे हैं, जिनसे हिंदू समाज की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंच सकती है।भाजपा नेता ने दिग्विजय सिंह की टिप्पणियों को राजनीतिक लाभ हासिल करने की कोशिश बताया। उन्होंने सवाल उठाया कि कांग्रेस नेता किस आधार पर हिंदुत्व और सनातन धर्म की व्याख्या कर रहे हैं। सारंग के अनुसार, हिंदुत्व भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराओं से जुड़ा हुआ है तथा इसे नफरत से जोड़ना गलत है।मध्य प्रदेश भाजपा के मीडिया प्रभारी बृज गोपाल लोया ने भी दिग्विजय सिंह के बयान की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता लगातार हिंदुत्व के खिलाफ टिप्पणियां कर रहे हैं। भाजपा का कहना है कि हिंदू परंपराओं और धार्मिक प्रतीकों को राजनीतिक विवाद का विषय बनाना उचित नहीं है। पार्टी नेताओं ने दिग्विजय सिंह से अपने बयानों पर पुनर्विचार करने की मांग की है।
दूसरी ओर, दिग्विजय सिंह अपनी 'सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा' को धार्मिक और सामाजिक जागरूकता से जुड़ा अभियान बता रहे हैं। उन्होंने यात्रा के दो प्रमुख उद्देश्य बताए हैं। पहला, लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक संस्थाओं की रक्षा के लिए लोगों को जागरूक करना और दूसरा, सनातन धर्म की अपनी व्याख्या को जनता के सामने रखना।यात्रा के दौरान दिग्विजय सिंह अपने गृह नगर राघौगढ़ भी पहुंचे। यहां उनके बेटे और कांग्रेस विधायक जयवर्धन सिंह सहित परिवार के अन्य सदस्यों ने उनका स्वागत किया। इस अवसर पर आयोजित सभा में उन्होंने धार्मिक सहिष्णुता, लोकतंत्र और सामाजिक सद्भाव जैसे मुद्दों पर अपने विचार रखे।उन्होंने राम मंदिर आंदोलन और मंदिर निर्माण के लिए एकत्र किए गए चंदे से जुड़े पुराने सवाल भी उठाए। दिग्विजय सिंह ने महंत लालदास का उल्लेख करते हुए राम मंदिर से संबंधित वित्तीय पारदर्शिता पर सवाल किए। हालांकि, उनके इन आरोपों और बताए गए आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।राजनीतिक विश्लेषण के लिहाज से दिग्विजय सिंह का यह बयान
महत्वपूर्ण है, क्योंकि मध्य प्रदेश में धर्म और हिंदुत्व लंबे समय से राजनीतिक विमर्श के प्रमुख विषय रहे हैं। भाजपा हिंदुत्व को अपनी वैचारिक पहचान से जोड़ती है, जबकि कांग्रेस के भीतर धार्मिक आस्था और राजनीतिक हिंदुत्व के बीच अंतर को लेकर विभिन्न नेताओं की अलग-अलग राय सामने आती रही है।दिग्विजय सिंह के ताजा बयान ने इसी वैचारिक बहस को दोबारा तेज कर दिया है। जहां कांग्रेस नेता अपनी टिप्पणी को सनातन धर्म की मूल भावना की व्याख्या बता रहे हैं, वहीं भाजपा इसे हिंदू आस्था पर हमला करार दे रही है।फिलहाल दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। दिग्विजय सिंह अपनी यात्रा के माध्यम से जनता तक अपना संदेश पहुंचाने में जुटे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में उनके बयानों और भाजपा की प्रतिक्रियाओं से प्रदेश की राजनीति में हिंदुत्व बनाम सनातन धर्म की बहस और तेज होने की संभावना है।
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