मध्य प्रदेश

नीति आयोग के CEO बने अनुराग जैन, केंद्र में बढ़ा मध्य प्रदेश कैडर का प्रभाव

Kavita2
18 Aug 2026 11:11 AM IST
नीति आयोग के CEO बने अनुराग जैन, केंद्र में बढ़ा मध्य प्रदेश कैडर का प्रभाव
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भोपाल। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव अनुराग जैन ने सोमवार को नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के रूप में कार्यभार संभाल लिया। इस महत्वपूर्ण नियुक्ति के साथ केंद्र सरकार के शीर्ष प्रशासनिक पदों पर मध्य प्रदेश कैडर के अधिकारियों की मौजूदगी और मजबूत हो गई है। अनुराग जैन मध्य प्रदेश कैडर के पहले ऐसे भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी हैं, जिन्हें नीति आयोग के CEO की जिम्मेदारी मिली है।

नीति आयोग केंद्र सरकार के नीति निर्माण और राज्यों के साथ विकास संबंधी समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे में इसके मुख्य कार्यकारी अधिकारी के पद पर मध्य प्रदेश कैडर के वरिष्ठ अधिकारी की नियुक्ति को प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जैन के पास राज्य और केंद्र दोनों स्तरों पर काम करने का लंबा अनुभव है, जिसका फायदा उन्हें नई जिम्मेदारी निभाने में मिल सकता है।

अनुराग जैन मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव के रूप में भी जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। अपने प्रशासनिक करियर में उन्होंने कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया है। केंद्र सरकार में भी विभिन्न जिम्मेदारियों के दौरान उन्होंने बुनियादी ढांचे, उद्योग, निवेश और नीतिगत मामलों से जुड़े विभागों में काम किया है। यही कारण है कि नीति आयोग के CEO के रूप में उनकी नियुक्ति को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

जैन की नियुक्ति ऐसे समय में हुई है, जब मध्य प्रदेश कैडर के कई वरिष्ठ अधिकारी पहले से केंद्र सरकार के महत्वपूर्ण विभागों में जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं। केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और विभागों में सचिव स्तर पर मध्य प्रदेश कैडर के अधिकारियों की मौजूदगी ने राज्य के प्रशासनिक कैडर को राष्ट्रीय स्तर पर प्रमुख स्थान दिलाया है।

हाल ही में केंद्र सरकार ने 1993 बैच की आईएएस अधिकारी दीप्ति गौर मुखर्जी को उच्च शिक्षा विभाग का सचिव नियुक्त किया है। इस नियुक्ति के बाद केंद्र के महत्वपूर्ण विभागों में मध्य प्रदेश कैडर की भागीदारी और बढ़ी है। उच्च शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में सचिव की जिम्मेदारी मिलने से राष्ट्रीय शिक्षा नीति और उच्च शिक्षण संस्थानों से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर उनकी भूमिका अहम रहने वाली है।

अनुराग जैन की नई जिम्मेदारी के बाद मध्य प्रदेश के प्रशासनिक हलकों में भी चर्चा तेज है। राज्य के अधिकारियों के लिए इसे एक बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। नीति आयोग का CEO केंद्र और राज्यों के बीच विकास संबंधी योजनाओं, आर्थिक सुधारों और विभिन्न नीतिगत कार्यक्रमों के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

नीति आयोग की जिम्मेदारी केवल योजनाएं तैयार करने तक सीमित नहीं है। यह देश की दीर्घकालिक विकास रणनीतियों पर काम करने के साथ राज्यों को विकास प्रक्रिया में भागीदार बनाने का काम भी करता है। स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, बुनियादी ढांचा, ऊर्जा, तकनीक और आर्थिक सुधार जैसे क्षेत्रों में आयोग की भूमिका महत्वपूर्ण रहती है। ऐसे में जैन के सामने कई बड़ी जिम्मेदारियां होंगी।

मध्य प्रदेश में काम करने के दौरान जैन को राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था के साथ ग्रामीण और शहरी विकास से जुड़ी चुनौतियों का भी अनुभव रहा है। इसके अलावा केंद्र में काम करने के कारण वह राष्ट्रीय स्तर पर नीति निर्माण और परियोजनाओं के क्रियान्वयन की प्रक्रिया से भी परिचित हैं। राज्य और केंद्र दोनों स्तरों का अनुभव नीति आयोग में उनके लिए उपयोगी साबित हो सकता है।

मध्य प्रदेश कैडर के अधिकारियों का केंद्र सरकार में बढ़ता प्रतिनिधित्व राज्य के प्रशासनिक ढांचे के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वरिष्ठ अधिकारियों का केंद्र के महत्वपूर्ण पदों तक पहुंचना न केवल उनके व्यक्तिगत प्रशासनिक अनुभव को दर्शाता है, बल्कि कैडर की राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती भूमिका की ओर भी संकेत करता है।

अब अनुराग जैन के सामने नीति आयोग की विभिन्न प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने की चुनौती होगी। केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के साथ विकसित भारत के लक्ष्य से जुड़ी योजनाओं को गति देना भी उनकी जिम्मेदारियों में शामिल रहेगा। राज्यों की अलग-अलग विकास जरूरतों को राष्ट्रीय प्राथमिकताओं से जोड़ने में नीति आयोग महत्वपूर्ण मंच की भूमिका निभाता है।

अनुराग जैन के नीति आयोग CEO बनने और दीप्ति गौर मुखर्जी को उच्च शिक्षा विभाग का सचिव बनाए जाने के बाद एक बार फिर मध्य प्रदेश कैडर चर्चा में है। आने वाले समय में इन अधिकारियों की भूमिका केंद्र सरकार की कई महत्वपूर्ण नीतियों और कार्यक्रमों के क्रियान्वयन में दिखाई देगी। जैन की नियुक्ति को मध्य प्रदेश कैडर के लिए बड़ी प्रशासनिक उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।

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