मध्य प्रदेश

बढ़ती बीमारियों और पोल्ट्री उत्पादों पर संदेह के बीच देसी भोजन की ओर झुकाव

Gulabi Jagat
16 April 2025 6:58 PM IST
बढ़ती बीमारियों और पोल्ट्री उत्पादों पर संदेह के बीच देसी भोजन की ओर झुकाव
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Raisen। आधुनिक युग में तेजी सेबढ़ती बीमारियों और पोल्ट्री उत्पादों पर संदेह के बीच देशी फ़ूड की तरफ युवाओं का झुकाव बढ़ रहा है।
देसी जिम ट्रेनर भी कर रहे देसी डाइट का प्रचार.....
रायसेन शहर समेत जिलेभर के कई जिम ट्रेनर अब देसी डाइट को प्रमोट कर रहे हैं। जिम कोच फैजान खान कहते हैं, हमने खुद देखा है कि लोग अंडे और चिकन से एलर्जी या गैस्ट्रिक परेशानी का शिकार हो रहे हैं। इसलिए अब हम उन्हें बताते हैं कि चना, मूंग, उबला सोयाबीन, पनीर और हरी सब्जियां भी शानदार प्रोटीन स्रोत हैं। उन्होंने बताया, चना प्रोटीन के साथ-साथ फाइबर भी देता है, जो मेटाबॉलिज्म को तेज करता है। मूंग दाल और पनीर जैसे आइटम आसानी से पचते हैं और देसी शरीर के लिए उपयुक्त हैं।
बिना नॉनवेज खाए भी बना सकते हैं शानदार मसल्स.....
एक जिम संचालक विक्का पाल बताते हैं कि देसी में तो पोषण और स्वाद भी है।दालों, सब्जियों और चने के व्यंजनों में न सिर्फ पोषण है, बल्कि स्वाद भी भरपूर है। आज की जनरेशन देसी चीजों को मॉडर्न टविष्ट देकर बना रही है। जैसे- चने का हुम्मस, मूंग दाल चीला, पनीर शेक और सोया टिक्की।
बॉलीवुड के फिटनेस आइकन जॉन अब्राहम हमेशा से शाकाहारी रहे हैं। उन्होंने साबित किया है कि बिना नॉनवेज खाए भी शानदार मसल्स बनाए जा सकते हैं। आज की युवा पीढ़ी उन्हें अपना रोल मॉडल मान रही है।रायसेन के एक जिम में ट्रेनिंग ले रहे युवक राजीव धाकड़ कहते हैं, अगर जॉन जैसा शख्स बिना चिकन-अंडे के इतना फिट रह सकता है, तो हम क्यों नहीं?
एक वक्त था जब जिम जाने वाले युवा दिन की शुरुआत अंडे से और शाम का खाना चिकन से करते थे। पिछले कुछ समय से बर्ड फ्लू और पोल्ट्री उत्पादों से जुड़ी स्वास्थ्य चिंताओं ने इस तस्वीर को बदल दिया है। अब वही युवा देसी थाली में मौजूद दाल, चना, पनीर और हरी सब्जियों में प्रोटीन की मात्रा भरपूर होता है।
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