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मध्य प्रदेश
AI ने पकड़ा 250 करोड़ का घोटाला, 392 कर्मचारी पर कार्रवाई
Rajeshwari Nishad
25 Oct 2026 10:32 PM IST

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भोपाल। मध्य प्रदेश के नगरीय निकायों में गवर्नमेंट ई-मार्केट प्लेस (GeM) पोर्टल के माध्यम से वस्तुओं की खरीद में वित्तीय अनियमितताओं का मामला सामने आया है। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए राज्य शासन ने सख्त रुख अपनाया है। नगरीय प्रशासन विभाग ने खरीद प्रक्रिया में अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार पाए गए अधिकारियों, कर्मचारियों, ठेकेदारों और आपूर्तिकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई की है। विभाग की ओर से कुल 392 संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध कार्रवाई किए जाने की जानकारी सामने आई है। वहीं, लोकायुक्त संगठन की विशेष स्थापना पुलिस ने भी मामले की जांच शुरू कर दी है। पूरे प्रदेश में हुई खरीदारी और उससे जुड़ी संभावित गड़बड़ियों का विस्तृत आकलन कराने के लिए शासन स्तर पर भी जांच शुरू कराई जा रही है।
GeM पोर्टल से खरीद में वित्तीय अनियमितताओं का मामला
मध्य प्रदेश के विभिन्न नगरीय निकायों में सरकारी खरीद के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले GeM पोर्टल के माध्यम से वस्तुओं की खरीदी में वित्तीय अनियमितताओं की बात सामने आई है। सरकारी विभागों और संस्थानों में वस्तुओं तथा सेवाओं की खरीद को व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से इस पोर्टल का उपयोग किया जाता है।
हालांकि, मध्य प्रदेश के नगरीय निकायों में इसी व्यवस्था के तहत की गई खरीद में अनियमितताओं का मामला सामने आने के बाद शासन ने कार्रवाई शुरू की है। यह मामला सरकारी धन के उपयोग और खरीद प्रक्रिया में वित्तीय नियमों के पालन से जुड़ा हुआ है।
नगरीय प्रशासन विभाग ने इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों, कर्मचारियों के साथ-साथ ठेकेदारों और आपूर्तिकर्ताओं के विरुद्ध भी कार्रवाई की है। इससे स्पष्ट है कि विभागीय स्तर पर खरीद प्रक्रिया से जुड़े विभिन्न पक्षों की भूमिका को कार्रवाई के दायरे में लिया गया है।
392 अधिकारियों-कर्मचारियों और अन्य संबंधित लोगों पर कार्रवाई
नगरीय प्रशासन विभाग की ओर से कुल 392 अधिकारियों, कर्मचारियों, ठेकेदारों और आपूर्तिकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई किए जाने की जानकारी दी गई है। यह कार्रवाई GeM पोर्टल के माध्यम से की गई खरीद में वित्तीय अनियमितताओं से संबंधित है।
हालांकि, उपलब्ध जानकारी में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि इन 392 लोगों में कितने सरकारी अधिकारी, कितने कर्मचारी और कितने ठेकेदार या आपूर्तिकर्ता शामिल हैं। इसी तरह इनके खिलाफ की गई कार्रवाई का अलग-अलग विवरण भी सामने नहीं आया है।
यह भी स्पष्ट नहीं है कि संबंधित लोगों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई, आर्थिक दंड या अन्य किस प्रकार के कदम उठाए गए हैं। ऐसे में कार्रवाई के स्वरूप को लेकर अतिरिक्त दावा करना उचित नहीं होगा।
फिलहाल, नगरीय प्रशासन विभाग की ओर से बड़े स्तर पर कार्रवाई किए जाने से यह मामला प्रशासनिक स्तर पर महत्वपूर्ण हो गया है।
लोकायुक्त की विशेष स्थापना पुलिस ने शुरू की जांच
वित्तीय अनियमितताओं के इस मामले में लोकायुक्त संगठन की विशेष स्थापना पुलिस ने भी जांच शुरू कर दी है। लोकायुक्त की जांच शुरू होने से अब मामले से जुड़े वित्तीय लेनदेन और खरीद प्रक्रिया के विभिन्न पहलुओं की पड़ताल होने की संभावना है।
जांच के दौरान संबंधित खरीद प्रक्रिया में नियमों का पालन हुआ या नहीं, सरकारी धन का उपयोग किस तरह किया गया और खरीद से जुड़े अधिकारियों तथा अन्य पक्षों की क्या भूमिका रही, जैसे सवाल महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
हालांकि, लोकायुक्त की जांच में अब तक क्या तथ्य सामने आए हैं, इसकी आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है। इसलिए किसी व्यक्ति या संस्था के खिलाफ अतिरिक्त आरोप लगाना या जांच के संभावित परिणामों को लेकर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
लोकायुक्त की जांच आगे बढ़ने के बाद ही मामले से जुड़े तथ्यों और संभावित जिम्मेदारियों की स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।
पूरे प्रदेश में गड़बड़ियों का होगा विस्तृत आकलन
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य शासन पूरे प्रदेश में GeM पोर्टल के माध्यम से हुई खरीद में अनियमितताओं का विस्तृत आकलन कराने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए शासन स्तर से भी जांच शुरू कराई जा रही है।
इस जांच का उद्देश्य प्रदेश के नगरीय निकायों में खरीद प्रक्रिया से जुड़ी गड़बड़ियों की व्यापक स्थिति का पता लगाना है। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि अनियमितताओं का दायरा कितना बड़ा है और किन-किन स्तरों पर वित्तीय नियमों के पालन में कमी सामने आई है।
प्रदेशव्यापी आकलन के दौरान विभिन्न नगरीय निकायों में की गई खरीद से संबंधित रिकॉर्ड महत्वपूर्ण हो सकते हैं। खरीद की प्रक्रिया, भुगतान और संबंधित दस्तावेजों की समीक्षा से अनियमितताओं की प्रकृति समझने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, शासन स्तर पर होने वाली जांच की समयसीमा, जांच दल की संरचना और किन नगरीय निकायों को पहले जांच के दायरे में लिया जाएगा, इसकी विस्तृत जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
सरकारी खरीद में पारदर्शिता पर उठे सवाल
GeM पोर्टल का उपयोग सरकारी खरीद प्रक्रिया को सरल, प्रतिस्पर्धी और पारदर्शी बनाने के लिए किया जाता है। इस व्यवस्था के माध्यम से सरकारी संस्थान निर्धारित प्रक्रियाओं के अनुसार वस्तुओं और सेवाओं की खरीद कर सकते हैं।
मध्य प्रदेश के नगरीय निकायों में इस पोर्टल से खरीद के दौरान वित्तीय अनियमितताओं का मामला सामने आने से सरकारी खरीद की निगरानी और नियमों के पालन को लेकर सवाल खड़े हुए हैं।
सरकारी खरीद में वित्तीय नियमों का पालन जरूरी है, क्योंकि इसमें सार्वजनिक धन का उपयोग किया जाता है। किसी भी स्तर पर अनियमितता सामने आने पर संबंधित रिकॉर्ड और जिम्मेदारियों की जांच आवश्यक हो जाती है।
नगरीय प्रशासन विभाग की कार्रवाई और लोकायुक्त की जांच इसी संदर्भ में महत्वपूर्ण मानी जा सकती है। हालांकि, वित्तीय अनियमितताओं से सरकारी खजाने को कुल कितनी राशि का नुकसान हुआ है, इसका आंकड़ा उपलब्ध जानकारी में नहीं दिया गया है।
जांच के बाद स्पष्ट होगी अनियमितताओं की पूरी स्थिति
मध्य प्रदेश में GeM पोर्टल के माध्यम से खरीद में सामने आई वित्तीय अनियमितताओं को लेकर शासन ने कार्रवाई और जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ाई है। एक तरफ नगरीय प्रशासन विभाग ने 392 अधिकारियों-कर्मचारियों, ठेकेदारों और आपूर्तिकर्ताओं के विरुद्ध कार्रवाई की है, वहीं दूसरी ओर लोकायुक्त संगठन की विशेष स्थापना पुलिस मामले की जांच कर रही है।
इसके साथ ही पूरे प्रदेश में गड़बड़ियों का विस्तृत आकलन कराने के लिए शासन स्तर से भी जांच शुरू कराई जा रही है। इन प्रक्रियाओं के बाद ही अनियमितताओं के वास्तविक दायरे, संबंधित जिम्मेदारियों और वित्तीय प्रभाव की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
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