मध्य प्रदेश

रवींद्र भवन में सजा कला का संसार, 70+ कलाकारों की कलाकृतियां प्रदर्शित

Kavita2
24 Aug 2026 3:13 PM IST
रवींद्र भवन में सजा कला का संसार, 70+ कलाकारों की कलाकृतियां प्रदर्शित
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भोपाल। राजधानी भोपाल के रवींद्र भवन की ललित कला गैलरी इन दिनों देशभर के कलाकारों की रचनात्मकता और कल्पनाशीलता का केंद्र बनी हुई है। यहां आयोजित ‘कलाज्ञ आर्ट एग्जिबिशन-थर्ड आर्क 2026’ में देश के अलग-अलग हिस्सों से आए 70 से अधिक कलाकारों ने अपनी विविध कलाकृतियों को प्रदर्शित किया है। प्रदर्शनी में अलग-अलग शैलियों, विषयों और रंग संयोजनों के जरिए कलाकारों ने अपनी कला प्रतिभा को दर्शाया है।

प्रदर्शनी में पारंपरिक कला से लेकर आधुनिक अभिव्यक्ति तक कई रंग देखने को मिल रहे हैं। कलाकारों की रचनाओं में प्रकृति, लोक संस्कृति, मानवीय भावनाओं और रोजमर्रा के जीवन के विभिन्न पहलुओं को अलग-अलग अंदाज में प्रस्तुत किया गया है। कला प्रेमियों के लिए यह प्रदर्शनी रचनात्मकता के विविध रूपों को करीब से देखने और समझने का अवसर उपलब्ध करा रही है।

70 से अधिक कलाकारों की भागीदारी

‘कलाज्ञ आर्ट एग्जिबिशन-थर्ड आर्क 2026’ में देशभर के 70 से अधिक कलाकारों ने हिस्सा लिया है। सभी कलाकारों ने अपनी-अपनी शैली और दृष्टिकोण के अनुसार कलाकृतियां प्रदर्शित की हैं।

प्रदर्शनी की खासियत यह है कि यहां कलाकारों की रचनाओं में एकरूपता के बजाय विविधता दिखाई देती है। कहीं रंगों के माध्यम से भावनाओं को व्यक्त किया गया है तो कहीं लोक कला और पारंपरिक शैलियों का प्रभाव दिखाई देता है। कुछ कलाकृतियों में आधुनिक जीवन की झलक है तो कुछ रचनाएं दर्शकों को भारतीय संस्कृति और परंपराओं से जोड़ती हैं।

ममता सक्सेना की 100 से अधिक कलाकृतियां

प्रदर्शनी में भोपाल की कलाकार ममता सक्सेना की कला भी विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। उन्होंने यहां 100 से अधिक कलाकृतियां प्रदर्शित की हैं। उनकी रचनाओं में लोक कला का प्रभाव, कहानी कहने की शैली और सहज कल्पना का खूबसूरत मेल देखने को मिलता है।

ममता सक्सेना की कला यात्रा इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने कला की कोई औपचारिक ट्रेनिंग नहीं ली है। इसके बावजूद उन्होंने अपनी रचनात्मकता और निरंतर अभ्यास के जरिए कला के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है।

सक्सेना बताती हैं कि शिक्षा के स्तर पर उन्होंने MBA किया है। वह पुलिस अधिकारी अमित सक्सेना की पत्नी हैं और दो बच्चों की मां हैं। उनका जीवन संयुक्त परिवार की जिम्मेदारियों और व्यस्तताओं से भरा हुआ है, लेकिन इन सबके बीच रंग और कैनवास उनके लिए अपनी भावनाओं को व्यक्त करने का माध्यम बने रहे।

कोविड काल में शुरू हुआ कला का सफर

ममता सक्सेना के मुताबिक, उनकी कला यात्रा को एक नई दिशा कोविड काल के दौरान मिली। महामारी के दौर में जब जीवन की रफ्तार कुछ धीमी हुई और उन्हें कुछ शांत पल मिले, तब उन्होंने ब्रश और कैनवास को अपने जीवन का हिस्सा बनाया।

शुरुआत में यह केवल खाली समय में की जाने वाली गतिविधि थी, लेकिन धीरे-धीरे यही काम उनके लिए जुनून बन गया। उन्होंने बताया कि ब्रश हाथ में लेने के दौरान उन्हें मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा महसूस होती थी।

समय के साथ उन्होंने लगातार चित्र बनाना शुरू किया और अपनी शैली को विकसित किया। आज वह 500 से अधिक कलाकृतियां तैयार कर चुकी हैं।

बिना औपचारिक प्रशिक्षण के बनाई पहचान

ममता सक्सेना की कला यात्रा यह भी बताती है कि रचनात्मकता के लिए हमेशा औपचारिक प्रशिक्षण ही जरूरी नहीं होता। उन्होंने किसी संस्थान से कला की विधिवत शिक्षा नहीं ली, लेकिन अपनी कल्पना, अनुभव और अभ्यास के माध्यम से चित्रकारी को आगे बढ़ाया।

उनकी कलाकृतियों में लोक कला का प्रभाव प्रमुखता से दिखाई देता है। इसके साथ ही वह अपने चित्रों में कहानी कहने की कोशिश करती हैं। उनके अनुसार हर ब्रशस्ट्रोक में उनकी भावनाएं और अनुभव जुड़े होते हैं।

उनकी कला में सहजता और व्यक्तिगत अभिव्यक्ति को खास महत्व दिया गया है। यही वजह है कि उनकी रचनाएं दर्शकों को अलग-अलग स्तर पर आकर्षित करती हैं।

परिवार और कला के बीच संतुलन

ममता सक्सेना ने बताया कि संयुक्त परिवार में रहने के कारण उनकी रोजमर्रा की जिंदगी काफी व्यस्त रहती है। परिवार की जिम्मेदारियों और बच्चों की देखभाल के बीच कला के लिए समय निकालना आसान नहीं होता।

इसके बावजूद उन्होंने चित्रकारी को अपनी जिंदगी का अहम हिस्सा बनाए रखा। उनका कहना है कि कला उनके लिए केवल शौक नहीं है, बल्कि भावनाओं को व्यक्त करने और खुद से जुड़ने का माध्यम भी है।

कोविड के दौरान शुरू हुआ यह सफर अब सैकड़ों कलाकृतियों तक पहुंच चुका है और भोपाल में आयोजित प्रदर्शनी के जरिए उनकी रचनाएं बड़ी संख्या में दर्शकों तक पहुंच रही हैं।

लोक कला और आधुनिक कल्पना का संगम

प्रदर्शनी में प्रदर्शित ममता सक्सेना की रचनाओं में लोक कला के तत्वों के साथ उनकी अपनी कल्पनाशीलता दिखाई देती है। उन्होंने पारंपरिक प्रभावों को अपनी सहज शैली के साथ जोड़कर अलग तरह की कलाकृतियां तैयार की हैं।

प्रदर्शनी में मौजूद अन्य कलाकारों की रचनाओं के साथ उनकी कलाकृतियां भी दर्शकों को कला के अलग-अलग आयामों से परिचित करा रही हैं।

कला प्रेमियों के लिए खास अवसर

रवींद्र भवन की ललित कला गैलरी में आयोजित यह प्रदर्शनी भोपाल के कला प्रेमियों के लिए खास अवसर लेकर आई है। एक ही स्थान पर देश के अलग-अलग हिस्सों के 70 से अधिक कलाकारों की रचनाएं देखने को मिल रही हैं।

प्रदर्शनी में कलाकारों की अलग-अलग शैलियां और विषय दर्शकों को भारतीय कला की विविधता से परिचित करा रहे हैं। वहीं, ममता सक्सेना जैसी कलाकारों की यात्रा यह संदेश भी देती है कि अपनी रचनात्मक प्रतिभा को आगे बढ़ाने के लिए उम्र, पेशा या औपचारिक प्रशिक्षण हमेशा बाधा नहीं बनते।

‘कलाज्ञ आर्ट एग्जिबिशन-थर्ड आर्क 2026’ के माध्यम से भोपाल में कला और कलाकारों के बीच संवाद का एक मंच तैयार हुआ है। यहां प्रदर्शित कलाकृतियां न केवल कलाकारों की प्रतिभा को सामने ला रही हैं, बल्कि दर्शकों को रंगों, भावनाओं और कल्पनाओं की एक अलग दुनिया से भी जोड़ रही हैं।

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