मध्य प्रदेश

इंदौर में क्राइम ब्रांच की फर्जी पहचान बनाकर 7 लाख की लूट

Kavita2
9 Aug 2026 9:49 AM IST
इंदौर में क्राइम ब्रांच की फर्जी पहचान बनाकर 7 लाख की लूट
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इंदौर। शहर के पलसिया इलाके में क्राइम ब्रांच की फर्जी पहचान बनाकर एक व्यक्ति से कथित तौर पर 7 लाख रुपये लूटने का मामला सामने आया है। पुलिस के अनुसार, वारदात को छह लोगों के एक समूह ने अंजाम दिया। आरोपियों ने पहले USDT ट्रेडिंग डील के नाम पर शिकायतकर्ता से संपर्क किया और उसे नकदी लेकर मिलने के लिए बुलाया। इसके बाद पैसे गिनने के बहाने उसे सुनसान स्थान पर ले जाकर कथित रूप से लूट की गई।

पुलिस का दावा है कि मामले में सभी छह संदिग्धों को वारदात के करीब 36 घंटे के भीतर गिरफ्तार कर लिया गया। हैरानी की बात यह है कि आरोपियों में से एक ने कथित तौर पर खुद को वकील बताया था। पुलिस अब सभी आरोपियों से पूछताछ कर वारदात में उनकी भूमिका और आपराधिक पृष्ठभूमि की जानकारी जुटा रही है।

कैफे में बनाई लूट की योजना

पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने वारदात की योजना बंगाली स्क्वायर के पास स्थित एक कैफे में बनाई थी। इसके बाद शिकायतकर्ता को निशाना बनाने के लिए USDT ट्रेडिंग डील का सहारा लिया गया। आरोपियों ने कथित तौर पर शिकायतकर्ता को भरोसा दिलाया कि वे उसे USDT उपलब्ध कराने वाले हैं और इसके बदले नकद रकम लेकर सौदा किया जा सकता है।

शिकायतकर्ता अभय तिवारी से लगभग 7 लाख रुपये की USDT डील के बहाने संपर्क किया गया था। बातचीत के बाद उन्हें नकदी लेकर साकेत स्क्वायर के पास मिलने के लिए बुलाया गया। शिकायतकर्ता जब बताए गए स्थान पर पहुंचे तो आरोपियों ने कथित तौर पर उनसे मुलाकात की और लेन-देन की प्रक्रिया शुरू करने का बहाना बनाया।

पैसे गिनने के बहाने सुनसान जगह ले गए

पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने शिकायतकर्ता को रकम गिनने के बहाने एक अपेक्षाकृत सुनसान स्थान की ओर ले जाने की योजना बनाई। वहां पहुंचने के बाद आरोपियों ने कथित तौर पर अपनी असली मंशा जाहिर की और क्राइम ब्रांच की फर्जी पहचान का इस्तेमाल करते हुए शिकायतकर्ता को डराया-धमकाया।

आरोप है कि संदिग्धों ने खुद को क्राइम ब्रांच से जुड़ा बताकर शिकायतकर्ता पर दबाव बनाया और उसके पास मौजूद करीब 7 लाख रुपये अपने कब्जे में ले लिए। वारदात के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए।

घटना के बाद शिकायतकर्ता ने पुलिस से संपर्क किया और पूरे मामले की जानकारी दी। शिकायत के आधार पर पुलिस ने जांच शुरू की और आरोपियों की पहचान करने के लिए उपलब्ध सुरागों को खंगालना शुरू किया।

36 घंटे में संदिग्ध गिरफ्तार

DCP (जोन-3) अभिषेक रंजन ने बताया कि पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच तेज की। पुलिस टीम ने तकनीकी जानकारी और अन्य उपलब्ध सुरागों के आधार पर संदिग्धों तक पहुंचने का प्रयास किया। पुलिस का दावा है कि घटना के करीब 36 घंटे के भीतर छह संदिग्धों को गिरफ्तार कर लिया गया।

गिरफ्तारी के बाद पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर रही है। पूछताछ में यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि पूरी योजना किसने बनाई थी, शिकायतकर्ता की जानकारी आरोपियों तक कैसे पहुंची और वारदात में प्रत्येक व्यक्ति की क्या भूमिका थी।

खुद को वकील बताने वाला आरोपी भी शामिल

मामले में एक आरोपी द्वारा खुद को वकील बताए जाने की बात भी सामने आई है। पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है कि आरोपी वास्तव में कानूनी पेशे से जुड़ा है या उसने वारदात के दौरान खुद को वकील बताकर शिकायतकर्ता पर प्रभाव जमाने की कोशिश की।

पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि आरोपियों ने क्राइम ब्रांच की फर्जी पहचान का इस्तेमाल पहले भी किसी अन्य व्यक्ति को डराने या ठगी करने के लिए किया था या नहीं। यदि पूछताछ में ऐसे मामलों की जानकारी सामने आती है तो पुलिस उन घटनाओं से भी आरोपियों के संबंधों की जांच कर सकती है।

USDT डील को बनाया हथियार

इस वारदात में USDT ट्रेडिंग डील को कथित तौर पर लालच और भरोसा पैदा करने के माध्यम के रूप में इस्तेमाल किया गया। क्रिप्टोकरेंसी से जुड़ी डील के नाम पर शिकायतकर्ता को नकदी लेकर बुलाया गया। इसके बाद उसे ऐसी जगह ले जाया गया जहां आरोपियों को कथित रूप से वारदात को अंजाम देने में आसानी हो।

पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि आरोपियों को USDT ट्रेडिंग और डिजिटल करेंसी से संबंधित कितनी जानकारी थी। यह भी पता लगाया जा रहा है कि क्या आरोपियों ने पहले से किसी ऐसे व्यक्ति की तलाश की थी जो बड़ी रकम के साथ लेन-देन करने वाला हो।

पुलिस कर रही नेटवर्क की जांच

छह आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस अब पूरे नेटवर्क की जांच में जुटी है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि आरोपियों ने शिकायतकर्ता को किस माध्यम से संपर्क किया और उसके पास बड़ी मात्रा में नकदी होने की जानकारी उन्हें कैसे मिली।

जांच में यह भी देखा जा रहा है कि आरोपियों ने वारदात के लिए पहले से किसी वाहन, स्थान या फर्जी पहचान से जुड़े दस्तावेजों का इस्तेमाल किया था या नहीं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।

फर्जी पुलिस पहचान को लेकर पुलिस सतर्क

इस घटना ने फर्जी पुलिस पहचान बनाकर अपराध करने के मामलों को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है। अपराधी यदि पुलिस या क्राइम ब्रांच का नाम लेकर किसी व्यक्ति को डराते हैं तो पीड़ित अक्सर दबाव में आ सकता है। ऐसे मामलों में पुलिस की पहचान और कार्रवाई के अधिकार को लेकर आम लोगों में जागरूकता जरूरी है।

पुलिस ने मामले में छह संदिग्धों को गिरफ्तार कर लिया है और उनसे पूछताछ जारी है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि लूट की रकम का क्या हुआ और इस वारदात के पीछे कितने लोगों का नेटवर्क सक्रिय था।

फिलहाल पलसिया क्षेत्र की इस घटना में USDT डील, क्राइम ब्रांच की फर्जी पहचान और 7 लाख रुपये की कथित लूट ने पुलिस के सामने कई सवाल खड़े किए हैं। 36 घंटे के भीतर आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद अब पुलिस का अगला फोकस मामले की पूरी साजिश का खुलासा करने और आरोपियों के संभावित अन्य आपराधिक मामलों से संबंधों की जांच पर है।

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