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मध्य प्रदेश में वेलफेयर बोर्ड और SGSITS के बीच 5 साल का MoU, तकनीकी विकास को मिलेगा बढ़ावा

Madhya Pradesh मध्य प्रदेश : मध्य प्रदेश में लेबर डिपार्टमेंट के तहत काम करने वाले मध्य प्रदेश अनऑर्गनाइज्ड रूरल/अर्बन वर्कर्स वेलफेयर बोर्ड और प्रसिद्ध श्री गोविंदराम सेकसरिया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस (SGSITS) के बीच पांच साल के मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) पर आधिकारिक रूप से हस्ताक्षर किए गए हैं। इस समझौते को राज्य में तकनीकी विकास और शिक्षा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
इस समझौते का मुख्य उद्देश्य टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट को बढ़ावा देना और इंजीनियरिंग तथा टेक्नोलॉजी के छात्रों के लिए नए अवसर तैयार करना है। इसके माध्यम से छात्रों को शोध, नवाचार और तकनीकी प्रशिक्षण के बेहतर अवसर मिलेंगे, जिससे उनकी व्यावहारिक क्षमता को मजबूती मिलेगी।
इस औपचारिक समझौते पर वेलफेयर बोर्ड के सचिव रघु राजन और SGSITS के डायरेक्टर प्रोफेसर नितेश पुरोहित ने हस्ताक्षर किए। दोनों संस्थानों ने इस साझेदारी को राज्य में तकनीकी और शैक्षणिक प्रगति की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया।
इस पांच वर्षीय सहयोग का उद्देश्य मजबूत डिजिटल इनोवेशन, गहन अकादमिक रिसर्च, तकनीकी सहायता और संरचनात्मक क्षमता निर्माण के माध्यम से राज्य में सार्वजनिक कल्याण प्रयासों को मजबूत करना है। इसके तहत विभिन्न परियोजनाओं और कार्यक्रमों के माध्यम से तकनीकी समाधान विकसित किए जाएंगे, जो सीधे तौर पर आम जनता के हित में होंगे।
वेलफेयर बोर्ड के अधिकारियों ने बताया कि इस साझेदारी से ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के श्रमिकों के लिए भी तकनीक आधारित योजनाओं को बेहतर तरीके से लागू करने में मदद मिलेगी। साथ ही, डिजिटल तकनीक के उपयोग से सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ेगी।
SGSITS की ओर से कहा गया कि इस समझौते से छात्रों को वास्तविक समस्याओं पर काम करने और इंडस्ट्री आधारित प्रोजेक्ट्स में भाग लेने का अवसर मिलेगा। इससे छात्रों की स्किल्स में सुधार होगा और उन्हें रोजगार के बेहतर अवसर मिलेंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह MoU राज्य में शिक्षा, तकनीक और सामाजिक विकास के बीच एक मजबूत सेतु का काम करेगा। इससे न केवल शैक्षणिक संस्थानों को लाभ मिलेगा, बल्कि सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में भी सहायता मिलेगी।
इस सहयोग के तहत आने वाले वर्षों में कई संयुक्त शोध परियोजनाएं, प्रशिक्षण कार्यक्रम और तकनीकी कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी। इससे राज्य में डिजिटल परिवर्तन की गति तेज होने की उम्मीद है।





