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नई दिल्ली। दिल्ली के जंतर-मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के खिलाफ शुक्रवार को हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान CPI(M) के कई नेताओं तथा छात्र-युवा कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया। CPI(M) ने भी अपने आधिकारिक बयान में महासचिव एमए बेबी, वरिष्ठ नेता वृंदा करात और कई छात्र-युवा नेताओं को हिरासत में लिए जाने की पुष्टि की है।
केरल के पूर्व मुख्यमंत्री और मौजूदा विपक्ष के नेता पिनाराई विजयन ने इस कार्रवाई की आलोचना की। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए दावा किया कि शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे CPI(M) नेताओं और छात्र-युवा कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेना लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला है। विजयन ने अपने बयान में एमए बेबी और वृंदा करात का भी उल्लेख किया।
विजयन ने कहा, “जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन कर रहे कॉमरेड एमए बेबी, कॉमरेड वृंदा करात और छात्र-युवा कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला है।” उन्होंने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि हाल के कदमों के कारण चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर सवाल पैदा हुए हैं। ये आरोप पिनाराई विजयन और प्रदर्शनकारी नेताओं के राजनीतिक दावे हैं।
जंतर-मंतर के पास शुक्रवार को स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) और डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया (DYFI) से जुड़े कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने और SIR प्रक्रिया को रोकने की मांग कर रहे थे। CPI(M) के महासचिव एमए बेबी और वरिष्ठ नेता वृंदा करात भी इस प्रदर्शन में शामिल हुए।
CPI(M) की ओर से जारी बयान में कहा गया कि एमए बेबी और वृंदा करात के साथ DYFI महासचिव हिमग्नराज भट्टाचार्य, DYFI अध्यक्ष और सांसद एए रहीम, SFI महासचिव सृजन भट्टाचार्य, SFI अध्यक्ष आदर्श एम साजी और SFI संयुक्त सचिव आइशी घोष सहित अन्य नेताओं को हिरासत में लिया गया। पार्टी ने इस कार्रवाई की निंदा करते हुए हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों को रिहा करने की मांग की।
प्रदर्शन के दौरान एमए बेबी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाए और उन्हें पद से हटाने की मांग की। उन्होंने दावा किया कि देश के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में SFI और DYFI के कार्यकर्ता दिल्ली पहुंचे हैं। वहीं वृंदा करात ने भी मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने और SIR प्रक्रिया को तत्काल रोकने की मांग की। ये आरोप और मांगें CPI(M) नेताओं की ओर से की गई हैं।
दूसरी तरफ दिल्ली पुलिस ने कहा कि नई दिल्ली क्षेत्र में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत प्रतिबंध लागू थे और प्रदर्शन के लिए अनुमति नहीं दी गई थी। पुलिस ने सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के मद्देनजर जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में अतिरिक्त बल तैनात किया था। सड़कों पर बैरिकेडिंग भी की गई थी।
इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए पिनाराई विजयन ने चुनाव आयोग की जनता का भरोसा बनाए रखने की क्षमता पर सवाल उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग के कदमों ने चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि यह विजयन का राजनीतिक आरोप है।
CPI(M) ने भी अपने बयान में चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर आरोप लगाए और कहा कि छात्र एवं युवा संगठनों का आंदोलन आगे भी जारी रहेगा। पार्टी ने मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने, SIR को रोकने और हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों की रिहाई की मांग की है।
एमए बेबी ने प्रदर्शन के दौरान कहा कि जब तक मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाया नहीं जाता, छात्र और युवा आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने आने वाले दिनों में भी विरोध कार्यक्रम होने की बात कही। वृंदा करात ने भी SIR को तत्काल रोकने की मांग दोहराई।
जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन में चुनाव आयोग और SIR प्रमुख मुद्दे रहे। छात्र और युवा संगठनों के कार्यकर्ताओं के साथ CPI(M) के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी के कारण प्रदर्शन ने राजनीतिक रूप ले लिया। प्रदर्शनकारियों ने चुनाव आयोग के खिलाफ नारे लगाए और मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग की।
पुलिस की ओर से प्रदर्शन की अनुमति नहीं दिए जाने के बावजूद कार्यकर्ता जंतर-मंतर के आसपास पहुंचे। इसके बाद पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों और नेताओं को हिरासत में लिया। CPI(M) ने इस कार्रवाई को लोकतांत्रिक अधिकारों के खिलाफ बताते हुए इसकी आलोचना की, जबकि पुलिस ने लागू प्रतिबंधों और सुरक्षा व्यवस्था का हवाला दिया।
पिनाराई विजयन की प्रतिक्रिया के बाद इस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक विवाद और बढ़ गया है। उन्होंने एमए बेबी, वृंदा करात और छात्र-युवा कार्यकर्ताओं के खिलाफ हुई पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे लोकतांत्रिक अधिकारों से जोड़ा।
फिलहाल CPI(M) मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने और SIR प्रक्रिया को रोकने की मांग पर कायम है। वहीं शुक्रवार के घटनाक्रम में पार्टी नेतृत्व ने अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिए जाने की पुष्टि की है। जंतर-मंतर पर हुए इस प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई के बाद चुनाव आयोग तथा SIR को लेकर विपक्षी दलों की ओर से जारी विरोध एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है।
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