
Kerala केरल: लगातार ट्रेनिंग, कठिन अभ्यास और मजबूत इच्छाशक्ति के दम पर मंजेरी की रहने वाली सुहरा चेरुक्कप्पल्ली ने दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट को फतह कर लिया है। इस उपलब्धि के साथ वह एवरेस्ट की चोटी पर पहुंचने वाली तीसरी मलयाली महिला बन गई हैं, जिससे पूरे केरल में गर्व का माहौल है।
चालीस वर्षीय सुहरा ने अपनी इस ऐतिहासिक सफलता का श्रेय वर्षों की मेहनत, निरंतर प्रशिक्षण और पर्वतारोहण के अनुभवों से मिले आत्मविश्वास को दिया है। उन्होंने बताया कि एवरेस्ट पर चढ़ाई का सफर आसान नहीं था, लेकिन मानसिक मजबूती और सही मार्गदर्शन ने उन्हें लक्ष्य तक पहुंचने में मदद की।
सुहरा चेरुक्कप्पल्ली ने यह उपलब्धि हासिल करने के बाद मलप्पुरम प्रेस क्लब के ‘मीट द प्रेस’ कार्यक्रम में अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि पर्वतारोहण केवल शारीरिक ताकत का नहीं बल्कि मानसिक दृढ़ता का भी परीक्षण है। कठिन परिस्थितियों में खुद को संभालना और लगातार आगे बढ़ते रहना ही सफलता की कुंजी है।
उन्होंने बताया कि एवरेस्ट अभियान के दौरान कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा, जिसमें बेहद कम तापमान, ऑक्सीजन की कमी और कठिन रास्ते शामिल थे। लेकिन वर्षों की ट्रेनिंग ने उन्हें हर परिस्थिति के लिए तैयार किया था। सुहरा ने कहा कि उनका सपना हमेशा से था कि वह दुनिया की सबसे ऊंची चोटी तक पहुंचे और इस सपने को उन्होंने साकार कर लिया।
उनकी इस उपलब्धि से न केवल उनके परिवार और गांव में खुशी का माहौल है, बल्कि केरल के पर्वतारोहण समुदाय में भी उत्साह बढ़ा है। सुहरा की सफलता को युवा महिलाओं के लिए प्रेरणा के रूप में देखा जा रहा है, जो कठिन क्षेत्रों में आगे बढ़ने का सपना देखती हैं।
सुहरा ने यह भी बताया कि उनका अगला लक्ष्य केवल यहीं तक सीमित नहीं है। वह अब दुनिया के अन्य महाद्वीपों की ऊंची चोटियों पर भी चढ़ाई करने की योजना बना रही हैं। उनका कहना है कि वह पर्वतारोहण को एक सतत यात्रा के रूप में देखती हैं और आगे भी नए कीर्तिमान स्थापित करना चाहती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि सुहरा जैसी उपलब्धियां भारत में एडवेंचर स्पोर्ट्स और महिला पर्वतारोहियों को नई दिशा देती हैं। उनकी सफलता यह साबित करती है कि दृढ़ संकल्प और मेहनत के बल पर किसी भी कठिन लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।
सुहरा की यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत है और यह संदेश देती है कि सपनों को पूरा करने के लिए उम्र या परिस्थितियां बाधा नहीं बनतीं, बल्कि लगन और मेहनत ही असली ताकत होती है।





