
Kerala केरल: राजीव गांधी सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी (BRIC-RGCB) की उन्नत रिसर्च सुविधाओं ने इबोला संक्रमण के फैलाव को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। राज्य के मंत्री के. मुरलीधरन ने यह जानकारी अक्कुलम स्थित आरजीसीबी कैंपस के दौरे के दौरान दी।
मंत्री ने कहा कि यह संस्थान राज्य के स्वास्थ्य क्षेत्र की मजबूत रीढ़ बनकर उभरा है और ‘हेल्दी केरल’ के लक्ष्य को हासिल करने में इसकी तकनीकी क्षमता अहम योगदान दे रही है। उन्होंने बताया कि संदिग्ध इबोला मामलों में कोझिकोड से सैंपल लाए जाने के मात्र 12 घंटे के भीतर आरजीसीबी में टेस्टिंग पूरी कर ली गई।
मंत्री के अनुसार, यह भी उल्लेखनीय है कि पुणे स्थित प्रयोगशाला से अंतिम रिपोर्ट आने से लगभग चार घंटे पहले ही आरजीसीबी ने सैंपल के नेगेटिव होने की प्रारंभिक पुष्टि कर दी थी। इससे न केवल त्वरित निर्णय लेने में मदद मिली, बल्कि संभावित खतरे को समय रहते नियंत्रित करने में भी बड़ी भूमिका निभाई।
आरजीसीबी के अधिकारियों ने बताया कि संस्थान में मौजूद अत्याधुनिक उपकरण और प्रशिक्षित वैज्ञानिक टीम संक्रामक रोगों की तेज और सटीक जांच करने में सक्षम है। यह सुविधा आपातकालीन स्वास्थ्य स्थितियों में राज्य को एक मजबूत तकनीकी आधार प्रदान करती है।
कैंपस दौरे के दौरान मंत्री ने विभिन्न प्रयोगशालाओं का निरीक्षण किया और वैज्ञानिकों से संवाद किया। उन्होंने संस्थान के शोध कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि यह केंद्र न केवल राज्य बल्कि देश के लिए भी महत्वपूर्ण वैज्ञानिक योगदान दे रहा है।
इस दौरान आरजीसीबी की निदेशक डॉ. बीना पिल्लई ने बताया कि संस्थान कैंसर रिसर्च के क्षेत्र में भी सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि कोचीन कैंसर रिसर्च सेंटर सहित कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के साथ मिलकर संयुक्त शोध परियोजनाएं चलाई जा रही हैं।
वहीं LMMD में वायरोलॉजी (ग्रेड-1) के प्रमुख डॉ. आर. राधाकृष्णन ने आरजीसीबी में विकसित किए गए संक्रामक रोग परीक्षण सिस्टम के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह प्रणाली तेजी से बदलते स्वास्थ्य खतरों का सामना करने में बेहद उपयोगी साबित हो रही है।
अधिकारियों के अनुसार, आरजीसीबी का मुख्य उद्देश्य न केवल बीमारियों की पहचान करना है, बल्कि उनके फैलाव को रोकने के लिए वैज्ञानिक समाधान विकसित करना भी है। इसके लिए लगातार नई तकनीकों और शोध पद्धतियों पर काम किया जा रहा है।
राज्य सरकार का मानना है कि इस तरह की संस्थाएं भविष्य में महामारी और अन्य स्वास्थ्य आपात स्थितियों से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।





