केरल

झाड़-फूंक के बहाने नाबालिग से दुष्कर्म ,आरोप गिरफ्तार

Rajeshwari Nishad
3 Nov 2026 2:43 PM IST
झाड़-फूंक के बहाने नाबालिग से दुष्कर्म ,आरोप गिरफ्तार
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कोल्लम। केरलम के कोल्लम जिले से एक गंभीर मामला सामने आया है। यहां 16 वर्षीय नाबालिग लड़की के कथित यौन शोषण के आरोप में पुलिस ने एक इस्लामिक स्कॉलर, धार्मिक वक्ता और यूट्यूबर को गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान 34 वर्षीय मुहम्मद नियास जौहरी के रूप में हुई है। वह ओचिरा स्थित हबीबिया इस्लामिक अकादमी का निदेशक बताया गया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने प्रार्थना और आध्यात्मिक उपचार के जरिए बीमारी ठीक करने का भरोसा दिलाकर नाबालिग के साथ कई बार कथित यौन शोषण किया। गिरफ्तारी के बाद अकादमी को भी बंद किए जाने की खबर है। मामले में पुलिस यह भी जांच कर रही है कि कहीं अन्य नाबालिग लड़कियां भी आरोपी के कथित शोषण का शिकार तो नहीं हुई हैं।
यह मामला सामने आने के बाद इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है। आरोपी धार्मिक प्रवचन देने के साथ सोशल मीडिया पर भी सक्रिय था और उसके वीडियो विभिन्न प्लेटफॉर्म पर प्रसारित होते थे।
कौन है आरोपी मुहम्मद नियास जौहरी?
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी मुहम्मद नियास जौहरी की उम्र 34 वर्ष है। वह मूल रूप से अलप्पुझा जिले के देविकुलंगरा क्षेत्र का निवासी बताया गया है।जौहरी को एक धार्मिक वक्ता, इस्लामिक स्कॉलर और व्लॉगर के रूप में जाना जाता है।वह कोल्लम जिले के ओचिरा में स्थित हबीबिया इस्लामिक अकादमी का संचालन करता था।इस संस्थान में धार्मिक शिक्षा से जुड़ी गतिविधियां संचालित की जाती थीं।आरोपी सोशल मीडिया पर धार्मिक विषयों को लेकर वीडियो भी पोस्ट करता था। इसी वजह से उसकी सार्वजनिक पहचान बनी हुई थी।हालांकि, अब उसके खिलाफ नाबालिग से कथित यौन शोषण जैसे गंभीर आरोप सामने आए हैं।
बीमारी ठीक करने के बहाने संपर्क बढ़ाने का आरोप
पुलिस के मुताबिक, पीड़िता और उसके परिवार का आरोपी से संपर्क धार्मिक उपचार के सिलसिले में हुआ था।आरोप है कि जौहरी ने परिवार को भरोसा दिलाया कि विशेष प्रार्थनाओं के माध्यम से बीमारी और कथित आध्यात्मिक परेशानियों को दूर किया जा सकता है।इसी भरोसे का फायदा उठाकर आरोपी ने नाबालिग से संपर्क बढ़ाया।जांचकर्ताओं के अनुसार, आरोपी ने कथित तौर पर उपचार के बहाने लड़की को अलग-अलग स्थानों पर बुलाया और उसका यौन शोषण किया।पुलिस का कहना है कि यह घटना किसी एक दिन तक सीमित नहीं थी, बल्कि कई अवसरों पर कथित शोषण किए जाने की शिकायत सामने आई है।आरोपों की जांच जारी है और अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।
2025 से 2026 के बीच हुईं कथित घटनाएं
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, नाबालिग के साथ कथित यौन शोषण की घटनाएं वर्ष 2025 से 2026 के बीच अलग-अलग समय पर हुईं।आरोपी ने धार्मिक उपचार के नाम पर परिवार का विश्वास हासिल किया था।पुलिस के सामने आई शिकायत के अनुसार, इसी विश्वास का फायदा उठाकर उसने पीड़िता के साथ कई बार कथित अपराध किया।मामला सामने आने के बाद पुलिस ने शिकायत दर्ज कर जांच शुरू की।पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शिकायत में लगाए गए आरोप गंभीर हैं और जांच के दौरान उपलब्ध साक्ष्यों की पड़ताल की जा रही है।
शिकायत के बाद पुलिस ने किया गिरफ्तार
पीड़िता की शिकायत के आधार पर पुलिस ने एक नवंबर 2026 को आरोपी मुहम्मद नियास जौहरी को गिरफ्तार कर लिया।गिरफ्तारी के बाद आरोपी को न्यायिक प्रक्रिया के तहत अदालत में पेश किया गया।अदालत ने उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।पुलिस ने आरोपी के खिलाफ बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण देने वाले कानून यानी पॉक्सो अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है।इसके अलावा भारतीय न्याय संहिता की दुष्कर्म और आपराधिक धमकी से संबंधित धाराएं भी लगाई गई हैं।पुलिस अब आरोपों से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जांच कर रही है।
इस्लामिक अकादमी को किया गया बंद
आरोपी की गिरफ्तारी के बाद ओचिरा स्थित हबीबिया इस्लामिक अकादमी को बंद किए जाने की जानकारी सामने आई है।यह वही संस्थान है, जिसके निदेशक के रूप में आरोपी कार्यरत था।मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, संबंधित अधिकारियों ने गिरफ्तारी के बाद संस्थान को बंद कराया है।अकादमी से जुड़े अन्य पहलुओं की भी पड़ताल की जा रही है।हालांकि, संस्थान के खिलाफ आगे किस प्रकार की प्रशासनिक कार्रवाई होगी, इसे लेकर विस्तृत आधिकारिक जानकारी का इंतजार है।
क्या अन्य बच्चियां भी हुईं शोषण का शिकार?
इस मामले में पुलिस की जांच केवल एक शिकायत तक सीमित नहीं है।जांचकर्ताओं को आशंका है कि आरोपी द्वारा अन्य नाबालिगों का भी कथित यौन शोषण किया गया हो सकता है।पुलिस इसी संभावना को ध्यान में रखते हुए जांच आगे बढ़ा रही है।हालांकि, अन्य पीड़िताओं की मौजूदगी की अभी पुष्टि नहीं हुई है।पुलिस का उद्देश्य यह पता लगाना है कि आरोपी ने अपने धार्मिक प्रभाव या संस्थान से जुड़े संबंधों का इस्तेमाल करके किसी अन्य व्यक्ति को भी निशाना बनाया था या नहीं।
मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, जांचकर्ता आरोपी के मोबाइल फोन और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच कर रहे हैं।पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इन उपकरणों में मामले से संबंधित कोई महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य मौजूद है या नहीं।डिजिटल उपकरणों की फॉरेंसिक जांच से बातचीत, संपर्क और अन्य संभावित साक्ष्यों की जानकारी मिल सकती है।हालांकि, ऐसे किसी साक्ष्य के मिलने या उससे किसी नए आरोप की पुष्टि होने के बारे में अभी अंतिम जानकारी उपलब्ध नहीं है।
कथित ऑडियो क्लिप की भी चर्चा
मामले से जुड़ी एक कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग सामने आने की खबर भी है।मलयालम मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार, इस रिकॉर्डिंग को मामले की जांच से जोड़कर देखा जा रहा है।हालांकि, रिकॉर्डिंग की प्रामाणिकता और उसका कानूनी महत्व जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।इसलिए किसी कथित ऑडियो को आरोपी के अपराध का अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता।
धार्मिक विश्वास के दुरुपयोग का गंभीर सवाल
इस घटना ने धार्मिक और आध्यात्मिक उपचार के नाम पर लोगों का विश्वास हासिल करके उसके कथित दुरुपयोग को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।किसी भी धार्मिक या शैक्षणिक संस्थान में बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों को किसी भी प्रकार के दबाव, धमकी या अनुचित व्यवहार के बारे में खुलकर शिकायत करने के लिए सुरक्षित वातावरण मिलना आवश्यक है।अभिभावकों को भी बच्चों की बात गंभीरता से सुननी चाहिए और असामान्य परिस्थितियों में तुरंत सहायता लेनी चाहिए।
नाबालिग की पहचान गोपनीय रखना जरूरी
पॉक्सो कानून के तहत यौन अपराधों से प्रभावित नाबालिगों की पहचान सार्वजनिक करना प्रतिबंधित है।इस मामले में भी पीड़िता की पहचान और उससे संबंधित निजी जानकारी गोपनीय रखना आवश्यक है।पुलिस की जांच में पीड़िता की सुरक्षा और उसके अधिकारों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
अब आगे क्या होगा?
फिलहाल आरोपी मुहम्मद नियास जौहरी न्यायिक हिरासत में है और मामले की जांच जारी है।पुलिस आरोपों से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों, शिकायत और अन्य जानकारियों की पड़ताल कर रही है।इसके साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि कहीं अन्य नाबालिगों के साथ भी इसी तरह की घटनाएं तो नहीं हुईं।इस मामले में आरोपी के खिलाफ लगे आरोपों की अंतिम पुष्टि अदालत में साक्ष्यों और गवाहों के परीक्षण के बाद ही होगी।
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