
Kerala केरल: कोल्लम जिले में सोशल मीडिया के जरिए दोस्ती कर नाबालिग लड़की से दुष्कर्म के मामले में फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने आरोपी युवक को 25 साल के सश्रम कारावास की सजा और जुर्माना दोनों से दंडित किया है। यह मामला 2021 का बताया जा रहा है, जिसमें आरोपी ने सोशल मीडिया के माध्यम से संपर्क स्थापित कर नाबालिग के साथ गंभीर अपराध को अंजाम दिया था।
कोल्लम फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट के जज ए. एम. अशरफ ने इस मामले में फैसला सुनाते हुए आरोपी श्यामकुमार (26), निवासी वेलामनूर, परिपल्ली, को दोषी करार दिया। अदालत ने पाया कि आरोपी ने नाबालिग लड़की के साथ दुष्कर्म कर कानून का गंभीर उल्लंघन किया है।
मामले में आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) और POCSO एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया था। सुनवाई के दौरान आरोपी कोर्ट से फरार हो गया था, जिसके बाद उसके खिलाफ कार्यवाही आगे बढ़ाई गई और अंततः अदालत ने उसे दोषी मानते हुए सजा सुनाई।
अदालत ने आरोपी को 25 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा के साथ 70,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है। यदि आरोपी जुर्माना अदा करने में असमर्थ रहता है, तो उसे अतिरिक्त 18 महीने की साधारण कारावास की सजा भुगतनी होगी। वहीं, यदि जुर्माने की राशि जमा की जाती है, तो उसे पीड़िता के मुआवजे के रूप में उपयोग किया जाएगा।
कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (District Legal Services Authority) पीड़िता को मुआवजा योजना के तहत उचित सहायता प्रदान करे। इस फैसले को पीड़िता के अधिकारों और न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
इस मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक आर. सरिता ने प्रभावी पैरवी की। वहीं, परिपल्ली पुलिस स्टेशन के SHO ए. अल जाबेर ने मामले की जांच कर चार्जशीट अदालत में दाखिल की। जांच प्रक्रिया में एएसआई प्रसन्ना गोपन और सेलिना मंजू ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
अभियोजन के अनुसार, यह मामला सोशल मीडिया के दुरुपयोग से जुड़ा एक गंभीर अपराध था, जिसमें आरोपी ने भरोसा जीतकर नाबालिग को निशाना बनाया। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि ऐसे मामलों में सख्त सजा जरूरी है ताकि समाज में एक स्पष्ट संदेश जाए और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
फैसले के बाद कानून विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय POCSO मामलों में न्यायिक सख्ती का उदाहरण है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में तेजी से ट्रायल और कठोर सजा समाज में जागरूकता और डर दोनों पैदा करती है, जिससे ऐसे अपराधों पर अंकुश लगाया जा सकता है।
पीड़िता पक्ष के लिए यह फैसला राहत भरा माना जा रहा है, जबकि पुलिस और अभियोजन टीम ने इसे एक सफल ट्रायल बताया है।





