
Kerala केरल: घाटे में चल रहे अरलम फार्म को पुनर्जीवित करने के लिए किए जा रहे प्रयासों के बीच जंगली हाथियों का लगातार बढ़ता खतरा एक बड़ी बाधा बनकर सामने आ रहा है। राज्य का यह महत्वपूर्ण प्लांटिंग मटीरियल डिस्ट्रीब्यूशन सेंटर और कृषि विकास केंद्र पिछले लगभग एक दशक से वन्यजीवों के हमलों का सामना कर रहा है।
अरलम फार्म को कृषि क्षेत्र में एक मजबूत केंद्र के रूप में विकसित करने और उसकी आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए सरकार की ओर से विभिन्न चरणों में डाइवर्सिफिकेशन प्रोजेक्ट्स लागू किए गए थे। इन योजनाओं के तहत करोड़ों रुपये की लागत से विकास कार्य शुरू किए गए थे, जिनका उद्देश्य उत्पादन क्षमता बढ़ाना और फार्म को आत्मनिर्भर बनाना था।
हालांकि, लगातार जंगली हाथियों के प्रवेश और नुकसान के कारण इन योजनाओं पर गंभीर असर पड़ा है। स्थानीय अधिकारियों और कर्मचारियों के अनुसार, हाथियों के झुंड खेतों में घुसकर पौधों, बाड़ों और अन्य ढांचे को नुकसान पहुंचा रहे हैं, जिससे उत्पादन और विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
फार्म से जुड़े कर्मचारियों का कहना है कि यह समस्या नई नहीं है, बल्कि पिछले कई वर्षों से जारी है। वन्यजीवों के हमलों के कारण कई बार पौधरोपण कार्य भी बाधित हुए हैं, जिससे प्रोजेक्ट्स की गति धीमी पड़ गई है।
स्थानीय स्तर पर सुरक्षा उपाय किए जाने के बावजूद स्थिति पूरी तरह नियंत्रित नहीं हो पाई है। इस कारण करोड़ों रुपये की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर सवाल उठ रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकाला गया, तो अरलम फार्म जैसे महत्वपूर्ण कृषि केंद्र का भविष्य खतरे में पड़ सकता है। इसके लिए वन विभाग और कृषि विभाग के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता बताई जा रही है।
स्थानीय प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि हाथियों के आवागमन को नियंत्रित करने और फार्म की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नए उपायों पर विचार किया जा रहा है।
फिलहाल, अरलम फार्म के पुनरुद्धार की दिशा में चल रहे प्रयासों को जंगली हाथियों का यह लगातार खतरा चुनौती देता नजर आ रहा है।





