
Kerala केरल: नेट्टायम पहाड़ी की चोटी पर एक कुएं की सफाई के दौरान 22 वर्षीय इंटरस्टेट वर्कर मिहिर मजूमदार की मौत ने सुरक्षा नियमों और श्रमिकों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। असम के रहने वाले मजूमदार मंगलवार को वट्टियूरकावु पहाड़ियों में 130 फीट गहरे कुएं में उतरकर सफाई का काम कर रहे थे, तभी सिर के बल गिरने से उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, गहरे कुएं में उतरते समय आम तौर पर ऑक्सीजन सिलेंडर और अन्य सुरक्षा उपकरण का उपयोग अनिवार्य है। लेकिन इस घटना में अधिकारियों ने यह नहीं देखा कि वर्कर के पास जान बचाने वाले उपकरण मौजूद थे या उन्होंने आवश्यक सावधानी बरती थी। घटना स्थल पर मौजूद लोगों का कहना है कि यह काम अत्यधिक जोखिम भरा था और कार्यकर्ताओं को पर्याप्त सुरक्षा नहीं दी गई थी।
इस हादसे के बाद इलाके में विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है। लोग आरोप लगा रहे हैं कि कुएं साफ करने वाले श्रमिकों की जान की कोई कीमत नहीं है और उन्हें खतरनाक परिस्थितियों में काम करने के लिए मजबूर किया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों ने सरकार और संबंधित विभागों से तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
इस घटना की पृष्ठभूमि और गंभीरता को देखते हुए यह ध्यान देना आवश्यक है कि पिछले सप्ताह भी वट्टियूरकावु इलाके में छह लोगों की मौत हो चुकी थी। इनमें से दो लोगों ने आत्महत्या की, एक बुज़ुर्ग ने खुद पर केरोसिन डालकर आग लगा ली, जबकि दो लोग नदी में डूब गए। डूबने वालों में एक पैंगोड कैंप का सैनिक भी शामिल था। इन घटनाओं से यह स्पष्ट होता है कि इलाके में सुरक्षा और स्वास्थ्य उपायों की भारी कमी है।
सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे खतरनाक कार्यों में केवल अनुभव ही पर्याप्त नहीं है। उचित प्रशिक्षण, ऑक्सीजन सपोर्ट, हार्नेस और अन्य सुरक्षा उपकरणों के बिना किसी को भी गहरे कुएं में नहीं उतरना चाहिए। इसके अलावा, प्रशासन और ठेकेदारों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सभी श्रमिक सुरक्षा मानकों का पालन करें।
वट्टियूरकावु इलाके के स्थानीय निवासियों ने बताया कि लगातार दुर्घटनाओं और मौतों के बावजूद सुरक्षा उपायों में कोई सुधार नहीं किया गया है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जिम्मेदार अधिकारियों को कड़ी चेतावनी दी जानी चाहिए और भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।
मिहिर मजूमदार की मौत ने न केवल इंटरस्टेट वर्कर्स की सुरक्षा पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि प्रशासन और ठेकेदारों की जवाबदेही पर भी ध्यान आकर्षित किया है। इस हादसे के बाद सरकार और संबंधित विभागों के लिए यह चुनौती है कि वे गहरे कुएं की सफाई के काम में लगे श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करें और भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए सख्त नियम लागू करें।





