केरल
वोट चोरी नहीं भ्रष्टाचार है हार की वजह', कांग्रेस पर बरसे राजीव चंद्रशेखर
Ratna Netam
29 Oct 2026 5:41 PM IST

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थिरुवनंतपुरम : मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और कथित 'वोट चोरी' के मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी तथा कांग्रेस के बीच राजनीतिक टकराव तेज हो गया है। केरल भाजपा अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि पार्टी की चुनावी हार का कारण वोट चोरी नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार, विकास की कमी और कमजोर प्रशासन है। उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर चुनावी हार के वास्तविक कारणों से ध्यान हटाने का आरोप लगाया। वहीं, कांग्रेस लगातार मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रही है।तिरुवनंतपुरम। केरल भाजपा अध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने कांग्रेस के वोट चोरी संबंधी आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि लोकतंत्र में चुनाव आयोग के भीतर मतभेद होना असामान्य बात नहीं है। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस अपनी चुनावी पराजय के लिए मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया को जिम्मेदार ठहरा रही है, जबकि उसे अपनी नीतियों और शासन से जुड़े सवालों का जवाब देना चाहिए।चंद्रशेखर ने 26 सितंबर को कोल्लम में मीडिया से बातचीत के दौरान कहा था कि किसी संवैधानिक संस्था के सदस्यों के बीच अलग-अलग राय होने से यह साबित नहीं हो जाता कि कोई अनियमितता हुई है।
चुनाव आयोग में मतभेद पर राजीव चंद्रशेखर का बयान
राजीव चंद्रशेखर ने चुनाव आयोग के तीन सदस्यों के बीच कथित मतभेदों से संबंधित सवालों का जवाब देते हुए कहा कि सामूहिक निर्णय लेने वाली संस्थाओं में विचारों का अलग होना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा है।उन्होंने पंचायत, नगरपालिका, राजनीतिक संगठन और न्यायिक पीठों का उदाहरण देते हुए कहा कि कई सदस्यों वाली संस्थाओं में कानूनी व्याख्याओं और फैसलों को लेकर अलग-अलग विचार हो सकते हैं।उनके अनुसार, केवल मतभेदों के आधार पर चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाना उचित नहीं है।हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया को अधिक विश्वसनीय और त्रुटिरहित बनाने के लिए चर्चा की जा सकती है।चंद्रशेखर ने कहा कि ऐसी चर्चा तथ्यों और ठोस प्रमाणों पर आधारित होनी चाहिए।
कांग्रेस की हार पर भ्रष्टाचार का आरोप
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए दावा किया कि पार्टी को चुनावों में हार इसलिए मिलती है क्योंकि जनता उसके शासन और नीतियों से संतुष्ट नहीं होती।उन्होंने भ्रष्टाचार, विकास कार्यों में ठहराव और प्रशासनिक प्रदर्शन को कांग्रेस की पराजय के कारणों के रूप में प्रस्तुत किया।चंद्रशेखर ने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेतृत्व इन मुद्दों पर आत्ममंथन करने के बजाय चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाकर अपनी राजनीतिक जिम्मेदारी से बचने का प्रयास कर रहा है।उन्होंने राहुल गांधी पर आरोप लगाया कि वह लंबे समय से चुनावी अनियमितताओं को लेकर ऐसे दावे कर रहे हैं जिनके समर्थन में पर्याप्त प्रमाण प्रस्तुत नहीं किए गए हैं।हालांकि, कांग्रेस की चुनावी हार के कारणों के संबंध में चंद्रशेखर का यह राजनीतिक आकलन है, कोई स्वतंत्र रूप से स्थापित निष्कर्ष नहीं।
राहुल गांधी पर भी साधा निशाना
राजीव चंद्रशेखर ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी की राजनीतिक रणनीति पर भी सवाल उठाए।उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2014 के बाद से कांग्रेस नेतृत्व चुनावी हार का कारण कथित धांधली को बताता रहा है।भाजपा नेता ने कहा कि चुनावी परिणामों को लेकर गंभीर सवाल उठाने का अधिकार सभी राजनीतिक दलों को है, लेकिन ऐसे आरोपों के साथ प्रमाण भी प्रस्तुत किए जाने चाहिए।उनका कहना था कि संवैधानिक संस्थाओं के प्रति विश्वास बनाए रखने के लिए राजनीतिक दलों को जिम्मेदारी से बयान देने चाहिए।दूसरी ओर कांग्रेस का दावा है कि मतदाता सूचियों में कथित गड़बड़ियों और चुनावी प्रक्रियाओं से जुड़े सवालों की निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है।
SIR को लेकर देशभर में राजनीतिक विवाद
विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR मतदाता सूची की समीक्षा और पात्र मतदाताओं की जानकारी अद्यतन करने की प्रक्रिया है।इस प्रक्रिया में मृत, स्थानांतरित और अन्य अयोग्य प्रविष्टियों की पहचान करने के साथ पात्र मतदाताओं के नाम सूची में सुनिश्चित करने का उद्देश्य होता है।हालांकि, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि SIR के दौरान पात्र मतदाताओं के नाम हटने का खतरा है।विपक्ष का कहना है कि इससे विशेष रूप से गरीब, प्रवासी और दस्तावेज संबंधी कठिनाइयों का सामना करने वाले नागरिक प्रभावित हो सकते हैं।भाजपा इस प्रक्रिया को मतदाता सूची की शुद्धता और चुनावी व्यवस्था की विश्वसनीयता से जोड़कर देख रही है।इस मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच लगातार बयानबाजी हो रही है।
कांग्रेस ने चुनाव आयोग से मांगा जवाब
कांग्रेस ने चुनाव आयोग के खिलाफ अपने अभियान को तेज करते हुए मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं पर जवाबदेही की मांग की है।29 सितंबर को हुई कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में पार्टी ने SIR की प्रक्रिया पर गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई थीं।कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी उठाई थी।पार्टी का आरोप है कि मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ पहुंचाने के लिए किया जा सकता है।हालांकि, भाजपा ने इन आरोपों को खारिज किया है। चुनावी अनियमितताओं के आरोपों को न्यायिक या आधिकारिक जांच में प्रमाणित हुए तथ्यों के रूप में नहीं देखा जा सकता।
केरल में कांग्रेस के रुख पर सवाल
राजीव चंद्रशेखर ने केरल और राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस के SIR संबंधी रुख में विरोधाभास होने का आरोप भी लगाया है।11 अक्टूबर को जारी एक बयान में उन्होंने कहा कि कांग्रेस एक ओर राष्ट्रीय स्तर पर मतदाता सूची पुनरीक्षण का विरोध कर रही है, जबकि दूसरी ओर केरल में इसी प्रक्रिया को लेकर उसके नेताओं के बयान अलग हैं।उन्होंने मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशन की टिप्पणियों का उल्लेख करते हुए कांग्रेस नेतृत्व से अपनी स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।चंद्रशेखर ने सवाल उठाया कि यदि कांग्रेस चुनावी प्रक्रिया की वैधता पर सवाल उठाती है, तो उसे उन चुनावों के आधार पर बनी सरकारों के बारे में भी अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए।वहीं, कांग्रेस नेताओं ने चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और पात्र मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा करने की आवश्यकता पर जोर दिया है।
कांग्रेस ने भी भाजपा के आरोपों का दिया जवाब
केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष और मंत्री सनी जोसेफ ने भाजपा के रुख को लेकर आपत्ति जताई है।उन्होंने कहा कि मतदाता सूची पुनरीक्षण से संबंधित चिंताओं को चुनाव आयोग और न्यायालयों के सामने उठाया गया है।कांग्रेस का तर्क है कि चुनावी व्यवस्था का उद्देश्य अधिक से अधिक पात्र नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित करना होना चाहिए।पार्टी का कहना है कि किसी भी प्रक्रिया में पारदर्शिता, निष्पक्षता और मतदाताओं के संवैधानिक अधिकारों का संरक्षण सर्वोपरि होना चाहिए।इस प्रकार भाजपा और कांग्रेस के बीच विवाद केवल चुनावी नतीजों तक सीमित नहीं है, बल्कि मतदाता सूची की विश्वसनीयता और चुनाव आयोग की जवाबदेही से भी जुड़ा हुआ है।
1 नवंबर की रैली से पहले बढ़ी सियासी बयानबाजी
कांग्रेस और विपक्षी इंडिया गठबंधन ने कथित वोट चोरी के मुद्दे पर अपना विरोध जारी रखने का फैसला किया है।29 अक्टूबर की रिपोर्टों के अनुसार, विपक्षी गठबंधन 1 नवंबर को बड़ी रैली आयोजित करने की तैयारी कर रहा है।कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा है कि पार्टी लोकतांत्रिक अधिकारों और चुनावी पारदर्शिता को लेकर अपना अभियान जारी रखेगी।इस बीच भाजपा के नेता विपक्ष के आरोपों का राजनीतिक स्तर पर जवाब दे रहे हैं।दोनों पक्षों के बीच चल रही बयानबाजी के कारण SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली राष्ट्रीय राजनीतिक चर्चा का प्रमुख विषय बन गई है।
चुनावी पारदर्शिता पर जारी रहेगा विवाद
राजीव चंद्रशेखर के बयान से स्पष्ट है कि भाजपा कांग्रेस की चुनावी हार को उसके शासन और राजनीतिक प्रदर्शन से जोड़ रही है, जबकि कांग्रेस मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं की जांच की मांग पर कायम है।चुनाव आयोग की भूमिका, मतदाताओं के अधिकारों और SIR की प्रक्रिया से जुड़े सवालों पर दोनों दलों के बीच मतभेद बने हुए हैं।फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाए रखते हुए प्रत्येक पात्र नागरिक के मतदान के अधिकार की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाए। आने वाले दिनों में विपक्ष के प्रदर्शन और राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाओं के बीच यह मुद्दा चर्चा में बना रह सकता है।
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