केरल
5,200 एकड़ ज़मीन अधिग्रहण पर तकरार: विधानसभा में सतीसन vs पिनराई
Tara Tandi
29 Oct 2026 5:37 PM IST

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तिरुवनंतपुरम: केरल इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट फंड बोर्ड (KIIFB) द्वारा कन्नूर में हजारों एकड़ जमीन का अधिग्रहण किए जाने को लेकर विधानसभा में पिनाराई विजयन और वी.डी. सतीसन के बीच तीखी बहस हुई। यह बहस जमीन के निर्माण कार्य के लिए उपयुक्त होने और इसके इस्तेमाल में हुई देरी को लेकर थी। सतीसन ने कहा कि हाई कोर्ट द्वारा नियुक्त एक विशेषज्ञ समिति ने पाया है कि इस जमीन पर 10 मीटर की गहराई तक खुदाई की गई थी। उन्होंने बताया कि खुदाई के बाद बचे हुए हिस्सों को कचरे और कीचड़ से भर दिया गया था।
पिनाराई ने माना कि अधिग्रहित जमीन के कुछ हिस्सों में खदान के गड्ढे हैं, लेकिन उन्होंने कहा कि ये असल में खदानें नहीं हैं और इनका इस्तेमाल औद्योगिक उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है। उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वे बुनियादी ढांचे के विकास में हुई प्रगति को नजरअंदाज कर KIIFB का मजाक उड़ा रहे हैं। सतीसन ने सवाल उठाया कि जब तिरुवनंतपुरम, कोच्चि या कोझिकोड में इस तरह की जमीन का अधिग्रहण नहीं किया गया, तो कन्नूर में 5,200 एकड़ जमीन क्यों अधिग्रहित की गई? उन्होंने कहा कि पहले 1,000 एकड़ जमीन लेने का फैसला हुआ था, जिसे बाद में बदलकर 5,200 एकड़ कर दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि 1,000 करोड़ रुपये में खरीदी गई इस जमीन पर छह साल में कोई विकास कार्य नहीं हुआ है।
उन्होंने बताया कि इस अधिग्रहण के लिए लिए गए कर्ज पर 12 प्रतिशत की वार्षिक ब्याज दर लग रही है। पिनाराई ने कहा कि KIIFB परियोजनाओं के लिए आवंटित कुल राशि में से जमीन अधिग्रहण पर केवल 5.9 प्रतिशत खर्च हुआ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जमीन अधिग्रहण की जिम्मेदारी राजस्व विभाग की थी। उन्होंने सुधा पिल्लई समिति द्वारा सौंपी गई रिपोर्ट को विकास के इतिहास का सबसे 'पिछड़ा' (regressive) दस्तावेज बताया। 'क्या लंदन में समाजवाद के लिए घंटी बजाई गई थी?' सतीसन ने मुख्यमंत्री रहते हुए लंदन स्टॉक एक्सचेंज में पिनाराई द्वारा घंटी बजाए जाने पर तंज कसते हुए पूछा कि क्या वह समाजवाद के लिए बजाई गई घंटी थी? सतीसन ने पिनाराई पर आरोप लगाया कि वे हर संदर्भ में निजीकरण की आलोचना करते हैं।
उन्होंने सवाल किया कि जब सरकार खुद फंड जुटा सकती है, तो KIIFB को कर्ज लेने की क्या जरूरत है? उन्होंने पूछा कि अगर कर्ज का भुगतान राज्य के खजाने से ही किया जाना था, तो फिर एक अलग एजेंसी की क्या जरूरत थी? पिनराई ने कहा कि जमीन का अधिग्रहण एक दूरगामी सोच के साथ किया गया था। पिनराई ने आरोप लगाया कि जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया के बारे में जानबूझकर लोगों को गुमराह करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि जमीन मालिकों को दिए गए मुआवजे की तुलना बाजार भाव से करना तर्कहीन है। उन्होंने बताया कि कन्नूर हवाई अड्डे के विकास के लिए यह जमीन एक दूरगामी सोच के साथ अधिग्रहित की गई थी। पिनराई के अनुसार, कोच्चि-बेंगलुरु औद्योगिक गलियारे, औद्योगिक और आईटी पार्कों, तथा एक अंतरराष्ट्रीय आयुर्वेद अनुसंधान केंद्र के लिए यह जमीन पहले ही अधिग्रहित कर ली गई थी।
'अगर आप मुझे रोकेंगे, तो आपमें से किसी को भी बोलने नहीं दिया जाएगा।' सतीसन ने चेतावनी दी कि अगर उन्हें बोलने नहीं दिया गया, तो वे सत्ता पक्ष के किसी भी सदस्य को भी बोलने नहीं देंगे। यह घटना तब हुई जब पिनराई स्थगन प्रस्ताव का जवाब दे रहे थे और विपक्ष ने सदन की कार्यवाही में बाधा डाली। सतीसन ने कहा, "चाहे आप कितना भी हंगामा करें या मुझे रोकने की कोशिश करें, मैं अपनी बात पूरी करके ही जाऊंगा। अगर आप मुझे बोलने से रोकेंगे, तो आपमें से किसी को भी बोलने नहीं दिया जाएगा।" हंगामा तब शुरू हुआ जब सतीसन ने कन्नूर में KIIFB द्वारा अधिग्रहित जमीन की एक तस्वीर दिखाई और कहा कि यह ऐसी जमीन है जहां से पत्थर निकाले गए थे (quarried land)। सत्ता पक्ष के सदस्य भी इस हंगामे में शामिल हो गए। स्पीकर ने हस्तक्षेप किया और दोनों पक्षों को शांत कराया।
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