केरल

ट्रेन में गांजा तस्करी का भंडाफोड़, 19 लाख का माल जब्त

Rajeshwari Nishad
6 Nov 2026 12:05 AM IST
ट्रेन में गांजा तस्करी का भंडाफोड़, 19 लाख का माल जब्त
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केरल। दीपावली से पहले नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) की बड़ी कार्रवाई सामने आई है। डिब्रूगढ़ से कन्याकुमारी जा रही विवेक एक्सप्रेस से 37.7 किलोग्राम गांजा बरामद किए जाने की जानकारी मिली है। बताया जा रहा है कि तस्करों ने गांजे की खेप को गुड़ की बोरियों में छिपाकर रखा था, ताकि जांच के दौरान किसी को संदेह न हो। बरामद गांजे की अनुमानित कीमत करीब 19 लाख रुपये बताई जा रही है। हालांकि, जब्ती के स्थान, कीमत और तस्करी में शामिल लोगों के संबंध में विस्तृत आधिकारिक पुष्टि अभी अपेक्षित है।
जानकारी के अनुसार, डिब्रूगढ़-कन्याकुमारी विवेक एक्सप्रेस के जरिए बड़ी मात्रा में मादक पदार्थ ले जाए जाने का मामला सामने आया है। ट्रेन की जांच के दौरान संदिग्ध बोरियों में गांजा होने का पता चला। सामान को सामान्य खाद्य सामग्री के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश किए जाने की बात कही जा रही है। गांजे की खेप मिलने के बाद इसकी तस्करी से जुड़े संभावित नेटवर्क को लेकर सवाल उठ रहे हैं।इस बरामदगी को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि विवेक एक्सप्रेस देश के सबसे लंबे रेल मार्गों में से एक पर संचालित होती है। यह ट्रेन असम के डिब्रूगढ़ से तमिलनाडु के कन्याकुमारी तक जाती है और रास्ते में कई राज्यों से होकर गुजरती है। लंबी दूरी और बड़ी संख्या में यात्रियों की आवाजाही के कारण ऐसी ट्रेनों में संदिग्ध सामान की पहचान करना सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
प्रारंभिक जानकारी में सामने आया है कि गांजे को गुड़ की बोरियों में छिपाकर ले जाया जा रहा था। आमतौर पर खाद्य सामग्री की बोरियां व्यापारिक सामान के रूप में दिखाई देती हैं। ऐसे में मादक पदार्थों को इस प्रकार छिपाने का उद्देश्य सुरक्षा एजेंसियों की नजरों से बचना हो सकता है। हालांकि, इस मामले में सामान किसने ट्रेन में चढ़ाया और इसे किस स्थान तक पहुंचाया जाना था, इसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।37.7 किलोग्राम गांजा बरामद होना तस्करी के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कार्रवाई मानी जा रही है। इतनी बड़ी मात्रा में मादक पदार्थ मिलने से इसकी आपूर्ति के संभावित स्रोत और वितरण नेटवर्क की जांच की आवश्यकता बढ़ जाती है। तस्करी के मामलों में जांच एजेंसियां आमतौर पर यह पता लगाने का प्रयास करती हैं कि नशीले पदार्थ कहां से लाए गए, उन्हें किन लोगों ने भेजा और उनकी अंतिम डिलीवरी किसे की जानी थी।
रेलवे सुरक्षा बल की भूमिका रेलवे परिसरों, यात्रियों और रेल संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण है। रेलवे में नशीले पदार्थों की तस्करी का संदेह होने पर आरपीएफ संबंधित पुलिस और अन्य सक्षम एजेंसियों के साथ समन्वय कर सकती है। गांजा जैसे प्रतिबंधित मादक पदार्थों की बरामदगी से जुड़े मामलों में स्वापक औषधि और मनःप्रभावी पदार्थ अधिनियम (एनडीपीएस एक्ट) के तहत कार्रवाई की जाती है।केरल में रेलवे के जरिए गांजे की तस्करी के मामले पहले भी सामने आ चुके हैं। फरवरी 2026 में अलुवा में विवेक एक्सप्रेस से बड़ी मात्रा में गांजा मिलने की खबर प्रकाशित हुई थी। इसी तरह सितंबर में पलक्कड़ रेलवे स्टेशन पर भी मादक पदार्थों की खेप पकड़ी गई थी। इन घटनाओं के बाद ट्रेनों और रेलवे स्टेशनों पर निगरानी बढ़ाए जाने की जानकारी सामने आई थी।
रेलवे में मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ निगरानी बढ़ाने के उद्देश्य से विभिन्न स्टेशनों पर विशेष जांच अभियान भी चलाए जाते रहे हैं। सितंबर 2026 में केरल रेलवे पुलिस और आरपीएफ की ओर से ट्रेनों तथा स्टेशनों पर जांच तेज किए जाने की खबर सामने आई थी। इन अभियानों का उद्देश्य नशीले पदार्थों की आवाजाही पर रोक लगाना और तस्करी में शामिल व्यक्तियों की पहचान करना है।त्योहारी सीजन में यात्रियों की संख्या बढ़ने के साथ रेलवे सुरक्षा व्यवस्था का महत्व और अधिक हो जाता है। दीपावली और अन्य त्योहारों के दौरान बड़ी संख्या में लोग एक राज्य से दूसरे राज्य की यात्रा करते हैं। ऐसे में रेलवे परिसरों में संदिग्ध गतिविधियों की पहचान तथा यात्रियों और सामान की सुरक्षा सुनिश्चित करना संबंधित एजेंसियों की प्राथमिकताओं में शामिल रहता है।
नशीले पदार्थों की तस्करी से जुड़ी घटनाएं केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं हैं। इनका असर सार्वजनिक स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा पर भी पड़ता है। गांजे की अवैध खरीद-बिक्री और परिवहन पर रोक लगाने के लिए एनडीपीएस अधिनियम में विभिन्न प्रावधान किए गए हैं। बरामद पदार्थ की मात्रा, संबंधित व्यक्ति की भूमिका और अन्य साक्ष्यों के आधार पर कानूनी कार्रवाई निर्धारित होती है।ऐसे मामलों में सामान के वास्तविक मालिक या उसे ले जाने वाले व्यक्ति की पहचान करना जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। किसी ट्रेन में लावारिस या संदिग्ध सामान मिलने से यह अपने आप साबित नहीं होता कि उसका मालिक कौन है। इसके लिए रेलवे रिकॉर्ड, उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज, गवाहों और अन्य साक्ष्यों की सहायता ली जा सकती है।
विवेक एक्सप्रेस से गांजा बरामद होने की इस घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतनी बड़ी खेप ट्रेन तक कैसे पहुंची। इसके अलावा यह जानना भी जरूरी होगा कि क्या सामान किसी यात्री के माध्यम से ले जाया जा रहा था या उसे किसी अन्य तरीके से ट्रेन में रखा गया था। संबंधित एजेंसियों की जांच से ही इन पहलुओं की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।फिलहाल 37.7 किलोग्राम गांजा मिलने की सूचना ने रेलवे के जरिए होने वाली संभावित तस्करी की ओर ध्यान आकर्षित किया है। मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी, जब्ती की आधिकारिक कीमत और आगे की कानूनी कार्रवाई को लेकर विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है।
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