केरल

बाढ़ से 12 करोड़ की फसल बर्बाद, 6,294 किसान प्रभावित

Kavita2
9 Aug 2026 3:46 PM IST
बाढ़ से 12 करोड़ की फसल बर्बाद, 6,294 किसान प्रभावित
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पठानमथिट्टा। जिले में बाढ़ का असर कृषि क्षेत्र पर भी गंभीर रूप से पड़ा है। कृषि विभाग के शुरुआती आकलन के मुताबिक बाढ़ के कारण जिले में करीब 12 करोड़ रुपये की कृषि फसलों को नुकसान हुआ है। सबसे ज्यादा प्रभावित वे किसान हुए हैं, जिन्होंने ओणम बाजार को ध्यान में रखते हुए विभिन्न फसलों की खेती की थी। खेतों में पानी भरने और फसलें नष्ट होने से किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है।

कृषि विभाग की प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार जिले के 53 कृषि क्षेत्रों के किसानों की फसलें प्रभावित हुई हैं। अब तक करीब 425 हेक्टेयर कृषि भूमि पर खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आई है। बाढ़ की वजह से 6,294 किसानों की फसलें प्रभावित हुई हैं। विभाग ने नुकसान का शुरुआती आकलन जिला कलेक्टर को सौंप दिया है।

कई प्रमुख फसलें बर्बाद

बाढ़ के कारण जिले में केले, रबर, कंद-मूल, कसावा यानी कप्पा, नारियल, काली मिर्च, अदरक, पान, सुपारी, गन्ना और कटहल जैसी प्रमुख फसलों को भारी नुकसान हुआ है। इनमें कई ऐसी फसलें हैं, जिन्हें किसान ओणम बाजार में बिक्री के लिए तैयार कर रहे थे।

ओणम के दौरान कृषि उत्पादों की मांग बढ़ जाती है। ऐसे में त्योहार से पहले फसलें खराब होने से किसानों को दोहरा नुकसान झेलना पड़ रहा है। एक तरफ खेतों में लगी फसल बर्बाद हुई, वहीं दूसरी ओर बाजार में बेहतर कीमत मिलने की उम्मीद भी खत्म हो गई।

रानी और कोन्नी क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित

कृषि विभाग के अनुसार रानी, कोन्नी, अरनमुला, तिरुवल्ला, पंडालम, इराविपेरूर और मल्लापल्ली क्षेत्रों में फसल नुकसान अधिक हुआ है। इन इलाकों में बाढ़ के पानी ने खेतों को प्रभावित किया और कई स्थानों पर तैयार फसलें भी खराब हो गईं।

केले और कसावा जैसी फसलों को पानी भरने से विशेष नुकसान हुआ है। वहीं नारियल, काली मिर्च और रबर जैसी लंबे समय में तैयार होने वाली फसलों को नुकसान होने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। कई किसानों के लिए इन फसलों का नुकसान केवल एक सीजन की कमाई का नुकसान नहीं है, बल्कि आने वाले समय की आय पर भी असर डाल सकता है।

अभी पूरा नहीं हुआ नुकसान का आकलन

कृषि विभाग ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल नुकसान का आंकड़ा शुरुआती अनुमान पर आधारित है। जिन इलाकों में बाढ़ का पानी नहीं पहुंचा था, वहां फसलों को हुए नुकसान का आकलन अभी पूरा नहीं हुआ है। ऐसे में अंतिम रिपोर्ट तैयार होने के बाद नुकसान का आंकड़ा बढ़ सकता है।

कृषि अधिकारियों और संबंधित कर्मचारियों की ओर से प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया जा रहा है। खेतों में जाकर फसलों की स्थिति, प्रभावित क्षेत्रफल और किसानों के नुकसान का विवरण जुटाया जा रहा है। इसके आधार पर अंतिम आकलन तैयार किया जाएगा।

6,294 किसानों की फसलें प्रभावित

प्रारंभिक रिपोर्ट में 6,294 किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचने की बात सामने आई है। बड़ी संख्या में किसानों की आजीविका खेती पर निर्भर है। ऐसे में फसल बर्बाद होने का सीधा असर उनके घरेलू खर्च, अगली फसल की तैयारी और कर्ज चुकाने की क्षमता पर पड़ सकता है।

कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि प्रभावित किसानों की जानकारी एकत्र की जा रही है, ताकि सरकार के स्तर पर उपलब्ध राहत और सहायता योजनाओं के तहत आवश्यक कदम उठाए जा सकें।

ओणम बाजार के लिए की गई थी तैयारी

ओणम के अवसर पर बाजार में कृषि उत्पादों की मांग बढ़ जाती है। जिले के कई किसानों ने इसी को ध्यान में रखते हुए केले, कंद-मूल, कसावा, नारियल और अन्य फसलों की खेती की थी। बाढ़ के कारण इन फसलों को नुकसान होने से किसानों की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है।

किसानों को उम्मीद थी कि त्योहार के दौरान उन्हें अपनी उपज का अच्छा दाम मिलेगा। लेकिन बाढ़ ने खेतों में तैयार फसलों को नुकसान पहुंचा दिया। इससे बाजार में उपलब्धता और किसानों की आय दोनों प्रभावित होने की आशंका है।

केले और कंद-मूल फसलों को बड़ा नुकसान

बाढ़ के पानी का सबसे अधिक असर उन फसलों पर पड़ा जो खेतों में जमीन के आसपास या कम ऊंचाई पर उगाई जाती हैं। केले के पौधे कई स्थानों पर पानी और तेज बहाव की वजह से गिर गए। वहीं कंद-मूल और कसावा की फसलें पानी में रहने से खराब हो गईं।

नारियल, पान और सुपारी जैसी फसलों को भी नुकसान पहुंचा है। काली मिर्च और अदरक की खेती प्रभावित होने से किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

रबर और अन्य फसलों पर भी असर

जिले के कृषि क्षेत्र में रबर भी महत्वपूर्ण फसल है। बाढ़ और अत्यधिक नमी की स्थिति का रबर उत्पादन पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है। इसके अलावा गन्ना और कटहल जैसी फसलें भी प्रभावित हुई हैं।

कृषि विभाग की प्रारंभिक रिपोर्ट में इन सभी फसलों को हुए नुकसान को शामिल किया गया है। हालांकि अंतिम नुकसान का आकलन अभी बाकी है।

जिला कलेक्टर को सौंपी गई रिपोर्ट

जिला मुख्य कृषि अधिकारी ने कृषि फसलों को हुए नुकसान और किसानों को हुए आर्थिक नुकसान से संबंधित प्रारंभिक रिपोर्ट जिला कलेक्टर को सौंप दी है। रिपोर्ट के आधार पर आगे की प्रशासनिक कार्रवाई और राहत संबंधी प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है।

अधिकारियों का कहना है कि नुकसान का विस्तृत आकलन पूरा होने के बाद प्रभावित किसानों और फसलों का वास्तविक आंकड़ा सामने आएगा। इसके बाद सरकार को आवश्यक सहायता और मुआवजे के संबंध में रिपोर्ट भेजी जा सकती है।

अंतिम आंकड़े आने का इंतजार

फिलहाल 425 हेक्टेयर फसल और 6,294 किसानों के प्रभावित होने का आंकड़ा सामने आया है। करीब 12 करोड़ रुपये का नुकसान शुरुआती अनुमान है। जिन क्षेत्रों में सर्वेक्षण अभी पूरा नहीं हुआ है, वहां की रिपोर्ट आने के बाद नुकसान का कुल आंकड़ा बदल सकता है।

बाढ़ से प्रभावित किसानों की नजर अब प्रशासन और सरकार की ओर से मिलने वाली सहायता पर है। ओणम बाजार से पहले फसल खराब होने के कारण किसानों की आर्थिक स्थिति पर पड़े असर को देखते हुए राहत उपायों की उम्मीद बढ़ गई है। कृषि विभाग का विस्तृत सर्वे पूरा होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि जिले में बाढ़ से कृषि क्षेत्र को कुल कितना नुकसान हुआ और कितने किसानों को सरकारी सहायता की आवश्यकता होगी।

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