
कोच्चि/तिरुवनंतपुरम। केरल के कोल्लम और तिरुवनंतपुरम जिलों में नावों के अलग-अलग हादसों के बाद लापता हुए तीन मछुआरों की तलाश अब तेज कर दी गई है। रविवार को भारतीय नौसेना भी खोज एवं बचाव अभियान में शामिल हो गई। लापता मछुआरों का पता लगाने के लिए नौसेना ने विशेष डाइविंग टीम के साथ अपना युद्धपोत INS कल्पेनी अभियान में उतारा है।
रक्षा विभाग के एक प्रवक्ता के अनुसार, नौसेना का जहाज शनिवार रात कोच्चि से तलाशी अभियान के लिए रवाना हुआ था। रविवार सुबह INS कल्पेनी ने नींदकारा से करीब एक नॉटिकल मील की दूरी पर लंगर डाला और इसके बाद खोज अभियान को आगे बढ़ाया गया।
विशेष डाइविंग टीम के साथ पहुंचा नौसेना का जहाज
रक्षा विभाग के प्रवक्ता ने बताया कि INS कल्पेनी पर भारतीय नौसेना की एक विशेष डाइविंग टीम मौजूद है। टीम को समुद्र में संभावित स्थानों पर उतरकर तलाश करने के लिए तैयार रखा गया है।
हालांकि, गोताखोरों को अभियान के लिए सही स्थान तक पहुंचाने के लिए हादसे से जुड़े स्थान की सटीक जानकारी जरूरी है। इसी उद्देश्य से नौसेना ने मरीन एनफोर्समेंट विंग से संपर्क किया है। मरीन एनफोर्समेंट की एक नाव भी INS कल्पेनी के आसपास मौजूद है और अभियान में सहयोग कर रही है।
नौसेना और स्थानीय एजेंसियों के बीच समन्वय के जरिए लापता मछुआरों की तलाश को प्रभावी बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
अलग-अलग नाव हादसों के बाद लापता हुए मछुआरे
अधिकारियों के मुताबिक कोल्लम और तिरुवनंतपुरम जिलों में नावों से जुड़े अलग-अलग हादसे हुए थे। इन घटनाओं के बाद कुल तीन मछुआरों के लापता होने की जानकारी सामने आई। स्थानीय स्तर पर उनकी तलाश पहले से की जा रही थी, लेकिन समुद्री क्षेत्र में तलाशी अभियान को व्यापक बनाने के लिए अब भारतीय नौसेना की सहायता ली गई है।
समुद्र में तलाश अभियान चलाना चुनौतीपूर्ण होता है। तेज धाराओं, बदलते मौसम और पानी की गहराई के कारण लापता लोगों तक पहुंचने में कठिनाई आती है। ऐसे में नौसेना की विशेष डाइविंग टीम और तकनीकी संसाधनों से अभियान को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
नींदकारा के पास बनाया गया खोज केंद्र
रविवार सुबह INS कल्पेनी ने नींदकारा से एक नॉटिकल मील दूर लंगर डाला। इसके बाद जहाज से अभियान की गतिविधियां शुरू की गईं। मरीन एनफोर्समेंट की नाव भी आसपास तैनात रही।
तलाशी अभियान के दौरान समुद्र में संभावित स्थानों की पहचान करने और वहां डाइविंग टीम को भेजने के लिए स्थानीय एजेंसियों से जानकारी जुटाई जा रही है। हादसे की परिस्थितियों और नावों की अंतिम स्थिति से संबंधित जानकारी भी अभियान के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
नौसेना के विशेषज्ञ गोताखोरों से उम्मीद
लापता मछुआरों की तलाश में नौसेना की विशेष डाइविंग टीम की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। प्रशिक्षित गोताखोर समुद्र के भीतर उन स्थानों की जांच कर सकते हैं, जहां सामान्य बचाव दलों के लिए पहुंचना मुश्किल होता है।
नौसेना के पास समुद्री खोज एवं बचाव अभियानों का व्यापक अनुभव है। ऐसे अभियानों में स्थानीय प्रशासन और समुद्री सुरक्षा एजेंसियों के साथ समन्वय कर संभावित स्थानों की पहचान की जाती है और उपलब्ध संसाधनों के आधार पर तलाशी का दायरा बढ़ाया जाता है।
परिवारों में चिंता का माहौल
तीन मछुआरों के लापता होने के बाद उनके परिवारों में चिंता का माहौल है। समुद्र में जाने वाले मछुआरों के लंबे समय तक वापस नहीं लौटने पर परिवार के लोग लगातार उनकी सुरक्षित वापसी की उम्मीद लगाए हुए हैं।
नौसेना के अभियान में शामिल होने से अब परिजनों को उम्मीद है कि तलाश में तेजी आएगी और लापता मछुआरों के संबंध में जल्द कोई जानकारी मिल सकेगी।
खराब परिस्थितियों के बीच अभियान
समुद्र में तलाशी अभियान हमेशा चुनौतीपूर्ण रहता है। पानी की गहराई, समुद्री धाराएं और मौसम की स्थिति खोज एवं बचाव कार्य को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे में अभियान में शामिल सभी एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है।
INS कल्पेनी पर मौजूद विशेष डाइविंग टीम को संभावित स्थान की सटीक जानकारी मिलने के बाद आगे की कार्रवाई करनी है। मरीन एनफोर्समेंट विंग की नाव इस प्रक्रिया में नौसेना को स्थानीय स्तर पर सहायता उपलब्ध करा रही है।
तलाश अभियान जारी
फिलहाल तीनों लापता मछुआरों की तलाश के लिए अभियान जारी है। भारतीय नौसेना के INS कल्पेनी के साथ विशेष डाइविंग टीम और मरीन एनफोर्समेंट विंग के जवान इस अभियान में जुटे हैं।
रविवार को शुरू किए गए इस संयुक्त अभियान का उद्देश्य समुद्र में लापता मछुआरों के संभावित स्थान का पता लगाना और उन्हें जल्द से जल्द खोज निकालना है। अधिकारियों की नजर मौसम और समुद्री परिस्थितियों पर भी बनी हुई है।
नौसेना के अभियान में शामिल होने के बाद अब तलाशी का दायरा बढ़ गया है। आने वाले समय में अभियान से मिलने वाली जानकारी के आधार पर खोज की दिशा और स्थान में बदलाव किया जा सकता है। फिलहाल परिवारों और स्थानीय लोगों की निगाहें बचाव दल की अगली सूचना पर टिकी हैं।





