
Kerala केरल: राष्ट्रीय राजमार्ग 66 पर चेरथला 11th माइल फ्लाईओवर के पास मंगलवार शाम एक बड़ा सड़क हादसा टलते-टलते रह गया, जब फ्लाईओवर की सतह पर अचानक बड़ा गड्ढा बन गया और सड़क करीब 12 फीट नीचे धंस गई। यह घटना शाम लगभग 6:30 बजे की बताई जा रही है, जिसके बाद इलाके में अफरा-तफरी और दहशत का माहौल बन गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, घटना के समय एक सुपरफास्ट बस और एक कार फ्लाईओवर से गुजर रहे थे। जैसे ही दोनों वाहन वहां से निकले, उसके कुछ ही समय बाद सड़क का एक हिस्सा अचानक धंस गया और बड़ा गड्ढा बन गया। गनीमत यह रही कि कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ, लेकिन स्थिति बेहद खतरनाक हो गई थी।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों से क्षेत्र में लगातार भारी बारिश हो रही थी, जिससे फ्लाईओवर की संरचना पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। शुरुआती अनुमान के अनुसार, लगातार बारिश और पानी के रिसाव के कारण सड़क की नींव कमजोर हो गई, जिसके चलते यह बड़ा गड्ढा बना।
घटना के तुरंत बाद आसपास मौजूद राहगीरों, स्थानीय लोगों और ऑटो चालकों ने स्थिति को गंभीरता से देखते हुए अधिकारियों को सूचना दी। सूचना मिलते ही नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) और संबंधित कॉन्ट्रैक्टिंग एजेंसियों के अधिकारी मौके पर पहुंचे और स्थिति का निरीक्षण किया।
अधिकारियों ने फ्लाईओवर के क्षतिग्रस्त हिस्से का प्रारंभिक मूल्यांकन किया और यातायात को नियंत्रित करने के लिए तुरंत कदम उठाए। हालांकि, स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि घटना के बाद सुरक्षा बैरिकेड और चेतावनी संकेत लगाने में देरी हुई, जिससे वहां से गुजरने वाले लोगों में नाराजगी फैल गई।
कई लोगों ने कहा कि अगर समय रहते बैरिकेडिंग नहीं की गई होती, तो कोई बड़ा हादसा हो सकता था। इसी कारण स्थानीय लोगों और कुछ वाहन चालकों ने मौके पर विरोध भी जताया और प्रशासन की लापरवाही पर सवाल उठाए।
स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने बाद में गड्ढे के आसपास बैरिकेड्स लगाए और चेतावनी संकेत बोर्ड लगाए ताकि वाहन चालक सावधानीपूर्वक गुजर सकें। इसके साथ ही फ्लाईओवर पर वाहनों की गति सीमित कर दी गई और ट्रैफिक पुलिस को अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए।
नेशनल हाईवे अथॉरिटी के अधिकारियों ने बताया कि प्रारंभिक जांच में भारी बारिश को एक प्रमुख कारण माना जा रहा है, लेकिन तकनीकी टीम विस्तृत जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि निर्माण या रखरखाव में कोई कमी तो नहीं थी।
अधिकारियों ने यह भी कहा कि जब तक मरम्मत कार्य पूरा नहीं हो जाता, तब तक फ्लाईओवर के इस हिस्से पर विशेष निगरानी रखी जाएगी। इंजीनियरों की टीम लगातार स्थल पर निरीक्षण कर रही है और स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
यातायात विभाग ने भी अपील की है कि वाहन चालक इस मार्ग से गुजरते समय अत्यधिक सावधानी बरतें और निर्धारित गति सीमा का पालन करें। भारी वाहनों को विशेष निर्देश दिए गए हैं कि वे इस क्षेत्र से धीमी गति में गुजरें।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब इस तरह की समस्या सामने आई है। मानसून के दौरान कई बार सड़क और फ्लाईओवर की स्थिति खराब होने की शिकायतें की जाती रही हैं, लेकिन स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है।
इस घटना ने एक बार फिर राष्ट्रीय राजमार्गों की गुणवत्ता और रखरखाव पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार बारिश वाले क्षेत्रों में फ्लाईओवर और सड़कों की नियमित जांच बेहद जरूरी है, ताकि इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
फिलहाल प्रशासन ने मरम्मत कार्य शुरू करने की प्रक्रिया तेज कर दी है और दावा किया है कि स्थिति को जल्द ही सामान्य कर लिया जाएगा। साथ ही, भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए संरचनात्मक जांच और निगरानी को और मजबूत किया जाएगा।
यह घटना भले ही किसी बड़े हादसे में नहीं बदली, लेकिन इसने एक बार फिर सड़क सुरक्षा और बुनियादी ढांचे की मजबूती को लेकर गंभीर चिंता जरूर खड़ी कर दी है।





